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जयंती: किसानों के दिलों में आज भी गूंज रही बाबा की ललकार, 15 साल बाद भी जिंदा है महेंद्र सिंह टिकैत का आंदोलन

Tue, 06 Oct 2026 04:11 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 06 Oct 2026 04:11 PM IST
सार

खाप पंचायतों से निकलकर चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने किसान समस्याओं को आंदोलन का रूप दिया और भारतीय किसान यूनियन को मजबूत संगठन बनाया। 1987 के करमूखेड़ी बिजलीघर आंदोलन से मिली पहचान के बाद भाकियू ने मेरठ, रजबपुर और दिल्ली के वोट क्लब तक बड़े आंदोलन किए। 15 साल बाद भी सिसौली और किसानों के बीच बाबा महेंद्र सिंह टिकैत की सादगी, तेवर और आंदोलन की विरासत याद की जाती है।

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Mahendra Singh Tikait Voice Still Echoes Among Farmers, His Legacy Lives On 15 Years Later
खेत में बैठे किसान मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत फाइल फोटो

विस्तार

खाप पंचायतों से निकलकर बाबा महेंद्र सिंह टिकैत अपनी सादगी और संगठन शक्ति के दम पर किसानों के मसीहा बन गए। सामाजिक मुद्दों पर शुरू हुआ पंचायतों दौर 1986 में किसानों की समस्याओं तक पहुंचा और भाकियू का गठन हुआ। बिजली की समस्या पर सितंबर 1986 में जनता इंटर कॉलेज बड़ौत के बाद 17 अक्तूबर 1986 को सिसौली के देवी मंदिर, वर्तमान किसान भवन पर पंचायत में बाबा को संगठन का अध्यक्ष बनाया गया था।

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सिसौली में 17 जनवरी 1987 को मांग रखी गई कि बिजली की बढ़ी दरें वापस ली जाए। गन्ने का मूल्य 48 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए। गेहूं का मूल्य 292 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए। शामली के खेड़ी करमू बिजली पर 27 जनवरी 1987 को घेराव का फैसला हुआ था। चार दिन धरना चला, नतीजा नहीं निकला।

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Mahendra Singh Tikait Voice Still Echoes Among Farmers, His Legacy Lives On 15 Years Later
अमर उजाला में 12 अगस्त 1987 के अंक में प्रकाशित समाचार। फोटो में चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत और त

17 फरवरी 1987 को सिसौली पंचायत में तय हुआ कि एक मार्च 1987 को खेड़ी करमू बिजलीघर का घेराव होगा। प्रशासन की उम्मीद से ज्यादा यहां लाखों किसान एकत्र हो गए। पुलिस ने गोली चला दी, जिसमें गठवाला खाप के लिसाढ़ गांव के जयपाल सिंह और सिंभालका गांव के अकबर अली शहीद हो गए थे।

एक पीएसी के जवान की भी मौत हो गई थी। एक अप्रैल 1987 को शामली में ऐतिहासिक रैली की गई। इस रैली के बाद ही तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह ने बिजली के दामों में पांच रुपये की कमी की थी।
भाकियू कोषाध्यक्ष दरियाव सिंह बताते हैं कि यहीं से टिकैत के नए रूप का जन्म हुआ। लाखों की भीड़ उन्हें सुनने पहुंचने लगी थी। उनका अंदाज किसानों को भाता था।

सिसौली के जयवीर सिंह बताते हैं कि उनकी सादगी किसानों को खींच लाती थी। यही वजह है कि आज भी किसानों के दिलों में बाबा की ललकार गूंज रही है।

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Mahendra Singh Tikait Voice Still Echoes Among Farmers, His Legacy Lives On 15 Years Later
सिसौली किसान भवन में चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की जयंती पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते भाकि

इस तरह बनीं और छा गई भाकियू
- वर्ष 1986 में जनता इंटर कॉलेज बड़ौत में पश्चिम के खाप चौधरियों की बैठक। अध्यक्ष पद पर चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के नाम पर विचार।

- 17 अक्तूबर 1986 सिसौली में खाप चौधरी और किसानों की बैठक। बालियान खाप के चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को भाकियू का अध्यक्ष बनाया।
- 17 जनवरी 1987 को सिसौली में मासिक पंचायत। 27 जनवरी को शामली के करमूखेड़ी बिजलीघर पर धरने का फैसला। चार दिन धरना चला।

- 17 फरवरी 1987 को सिसौली में पंचायत। एक मार्च को शामली के करमूखेड़ी बिजलीघर पर महापंचायत का एलान किया।
- एक मार्च 1987 को करमूखेड़ी में महापंचायत, पुलिस की फायरिंग में दो किसानों का बलिदान। यहीं से भाकियू को सुर्खियां मिली।

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शहर के शाकुंतलम में चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को श्रद्धांजलि देते गठवाला खाप के चौधरी राजेंद्र म

अब तक भाकियू के सबसे बड़े आंदोलन
मेरठ कमिश्ननरी का घेराव : भाकियू ने 27 जनवरी से 19 फरवरी 1988 तक तक लंबा धरना प्रदर्शन किया। टिकैत की पहली बार गिरफ्तारी के प्रयास असफल रहे।
रजबपुर सत्याग्रह : रजबपुर में पांच किसानों की मौत के बाद भाकियू ने छह मार्च 1988 से 23 जून 1988 तक सत्याग्रह किया। जेल भरो आंदोलन किया।

वोट क्लब का धरना : किसानों के मुद्दे पर 25 से 31 अक्तूबर 1988 तक दिल्ली के वोट क्लब पर धरना दिया। देशभर के किसानों का सैलाब उमड़ा।
अलीगढ़ के खैर का आंदोलन : खैर में किसानों के मुद्दे पर भाकियू ने बड़ी पंचायत की। गेहूं और अन्य फसलों का मुद्दा उठाया।

नईमा अपहरण कांड : तीन अगस्त 1989 से 10 अक्तूबर 1989 तक भोपा में आंदोलन। सीकरी की नईमा की बरामदगी के लिए हुआ था आंदोलन।
दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन : संयुक्त किसान मोर्चा के साथ भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत आंदोलन का बड़ा चेहरा बनें।

Mahendra Singh Tikait Voice Still Echoes Among Farmers, His Legacy Lives On 15 Years Later
चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत - फोटो : अमर उजाला

सियासत के लंबरदारों की सिसौली परिक्रमा
- 11 अगस्त 1987 : तत्कालीन सीएम वीर बहादुर सिंह
- 29 मई 1990 : तत्कालीन उप प्रधानमंत्री देवीलाल
- 11 दिसंबर 1990 : तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर
- 15 सितंबर 1994 : सीएम मुलायम सिंह पहुंचे
- 09 अगस्त 1996 : तत्कालीन प्रधानमंत्री देवगौड़ा
- 04 मार्च 2001 : पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह

इस तरह भाकियू ने बनाए राजनीतिक विंग
भाकियू ने 17 जून 1996 को हरिद्वार किसान पंचायत में राजनीतिक विंग भारतीय किसान कामगार पार्टी का एलान किया। टिकैत ने कहा कि चुनाव से दूर रहेंगे। सिसौली में पंचायत कर विंग की कमान चौधरी अजित सिंह को दी गई। भाकियू कार्यकर्ता राजपाल बालियान को खतौली से टिकट मिला और वह विधायक चुने गए थे। इसके बाद 2004 में किसान भवन से बहुजन किसान दल का गठन किया गया। लेकिन चुनाव के नतीजे पक्ष में नहीं आए।

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