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भक्तामर स्तोत्र की महाआरती का समापन
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खतौली जैनमंदिर में पूजा करते श्रद्धालु।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
भक्तामर स्तोत्र की महाआरती का समापन
खतौली। जक्कीवाला जैन मंदिर में श्रद्धालुओं ने नियमित रूप से 15 अगस्त से एक अक्तूबर रात्रि तक भक्तामर स्तोत्र की महाआरती की। कार्यक्रम का संचालन कर रहे सुनील जैन ने बताया कि यह असीम पुण्यकारी कार्य होता है। श्रावकगण प्रतिदिन सायं काल में भक्ताभर स्तोत्र के 48 स्लोक पूर्ण शुद्धि के साथ वाचन करते थे और मंत्र के साथ दीप प्रज्ज्वलित करते हुए इसकी स्थापना करते थे।
आचार्य मानुतुंम स्वामी द्वारा रचित भक्तामर स्तोत्र को पढ़ने, सुनने व कहने मात्र से ही प्राणियों के सारे पाप कर्म नष्ट हो जाते है। इसमें आदि देव तीर्थंकर ऋषभदेव की स्तुति की गई है। आध्यात्मिक गुरू डॉ. मंजु ने भी कहा कि इसके 45 वें श्लोक का वाचन असाध्य रोगों को ठीक करने में सहायक है। अनेक शोधों के द्वारा वैज्ञानिक क्षेत्रों में भी इसको प्रमाणित किया गया है। इसके छठवें श्लोक का वाचन छात्रों को प्रतिदिन कहना चाहिए। इससे बुद्धि व मेघा की वृद्धि होती है। कार्यक्रम का मार्गदर्शन राजनानी जैन ने किया।
कार्यक्रम में शिवभूषण महाराज का पावन आशीर्वाद प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में सहयोग करने वालों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर छवि जैन, नवीन, सुरेंद्र, संदीप, सुषमा, राजरानी, उषा, कुसुम, सोमलता, नमिता, प्रिंस, अनीता, किरण, सरिता, पवन, सारिका, मुकेश, स्नेह, साधना, अंजलि, त्रिशला, मधु, कमलेश आदि मौजूद रहे।
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खतौली। जक्कीवाला जैन मंदिर में श्रद्धालुओं ने नियमित रूप से 15 अगस्त से एक अक्तूबर रात्रि तक भक्तामर स्तोत्र की महाआरती की। कार्यक्रम का संचालन कर रहे सुनील जैन ने बताया कि यह असीम पुण्यकारी कार्य होता है। श्रावकगण प्रतिदिन सायं काल में भक्ताभर स्तोत्र के 48 स्लोक पूर्ण शुद्धि के साथ वाचन करते थे और मंत्र के साथ दीप प्रज्ज्वलित करते हुए इसकी स्थापना करते थे।
आचार्य मानुतुंम स्वामी द्वारा रचित भक्तामर स्तोत्र को पढ़ने, सुनने व कहने मात्र से ही प्राणियों के सारे पाप कर्म नष्ट हो जाते है। इसमें आदि देव तीर्थंकर ऋषभदेव की स्तुति की गई है। आध्यात्मिक गुरू डॉ. मंजु ने भी कहा कि इसके 45 वें श्लोक का वाचन असाध्य रोगों को ठीक करने में सहायक है। अनेक शोधों के द्वारा वैज्ञानिक क्षेत्रों में भी इसको प्रमाणित किया गया है। इसके छठवें श्लोक का वाचन छात्रों को प्रतिदिन कहना चाहिए। इससे बुद्धि व मेघा की वृद्धि होती है। कार्यक्रम का मार्गदर्शन राजनानी जैन ने किया।
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कार्यक्रम में शिवभूषण महाराज का पावन आशीर्वाद प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में सहयोग करने वालों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर छवि जैन, नवीन, सुरेंद्र, संदीप, सुषमा, राजरानी, उषा, कुसुम, सोमलता, नमिता, प्रिंस, अनीता, किरण, सरिता, पवन, सारिका, मुकेश, स्नेह, साधना, अंजलि, त्रिशला, मधु, कमलेश आदि मौजूद रहे।
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