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भगवान श्रीकृष्ण को जगतगुरू कहा गया : मनोज महाराज
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देवबंद में कथावाचक मनोज महाराज से आशीर्वाद लेते श्रद्धालु
- फोटो : DEVBAND
संवाद न्यूज एजेंसी
देवबंद। श्रीमद् भागवत कथा में अंतिम दिन कथावाचक मनोज महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण लीला का वर्णन किया। उन्होंने भक्तों को बताया कि भगवान श्रीकृष्ण को जगदगुरु कहा गया है।
शिक्षक नगर में श्रीमद् भागवत कथा की अमृतवर्षा करते हुए कथावाचक मनोज महाराज ने कहा कि विषम परिस्थितियों में भी सहज बने रहना, परिस्थितियों के साथ सामंजस्य स्थापित करना, मार्गदर्शन का साकार स्वरूप, बांसुरी साधने, सुदामा के चरण धोने, द्रोपदी का चीर बढ़ाने, महाभारत में रथ हांकने, युधिष्ठर के राजसूय यज्ञ में झूठी पत्तल उठाने तथा राम का अनुगामी होकर परिस्थिति अनुरूप दो कदम और आगे बढ़ने का नाम ही कृष्ण है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण से जीवन भर कुछ न कुछ छूटता ही रहा। वहीं, वे जीवन भर त्याग करते रहे। हमारी आज की पीढ़ी जो कुछ भी छूटने पर टूटने लगती है, उसे श्रीकृष्ण को गुरु बना लेना चाहिए। कथावाचक ने कहा कि जो भक्त श्रीकृष्ण को समझ लेगा वह कभी अवसाद में नहीं जाएगा। श्रीकृष्ण आनंद के देवता हैं। कुछ छूटने पर भी कैसे खुश रहा जा सकता है, यह उनसे अच्छा कोई सिखा नहीं सकता।
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इस मौके पर शिवांश चौधरी, डॉ. कांता त्यागी, डोली गोयल, राजेश देवी, शुभलेश शर्मा, मुकेश शर्मा, विनोद त्यागी, अमरीश कुमार, डॉ. विजयपाल, अरुण कुमार, केहर सिंह, ममता वर्मा, सुशीला देवी, संयोगिता, शिवानी चौधरी, सुमन, सविता व नीलम आदि श्रद्धालु रहे।
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देवबंद। श्रीमद् भागवत कथा में अंतिम दिन कथावाचक मनोज महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण लीला का वर्णन किया। उन्होंने भक्तों को बताया कि भगवान श्रीकृष्ण को जगदगुरु कहा गया है।
शिक्षक नगर में श्रीमद् भागवत कथा की अमृतवर्षा करते हुए कथावाचक मनोज महाराज ने कहा कि विषम परिस्थितियों में भी सहज बने रहना, परिस्थितियों के साथ सामंजस्य स्थापित करना, मार्गदर्शन का साकार स्वरूप, बांसुरी साधने, सुदामा के चरण धोने, द्रोपदी का चीर बढ़ाने, महाभारत में रथ हांकने, युधिष्ठर के राजसूय यज्ञ में झूठी पत्तल उठाने तथा राम का अनुगामी होकर परिस्थिति अनुरूप दो कदम और आगे बढ़ने का नाम ही कृष्ण है।
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उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण से जीवन भर कुछ न कुछ छूटता ही रहा। वहीं, वे जीवन भर त्याग करते रहे। हमारी आज की पीढ़ी जो कुछ भी छूटने पर टूटने लगती है, उसे श्रीकृष्ण को गुरु बना लेना चाहिए। कथावाचक ने कहा कि जो भक्त श्रीकृष्ण को समझ लेगा वह कभी अवसाद में नहीं जाएगा। श्रीकृष्ण आनंद के देवता हैं। कुछ छूटने पर भी कैसे खुश रहा जा सकता है, यह उनसे अच्छा कोई सिखा नहीं सकता।
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इस मौके पर शिवांश चौधरी, डॉ. कांता त्यागी, डोली गोयल, राजेश देवी, शुभलेश शर्मा, मुकेश शर्मा, विनोद त्यागी, अमरीश कुमार, डॉ. विजयपाल, अरुण कुमार, केहर सिंह, ममता वर्मा, सुशीला देवी, संयोगिता, शिवानी चौधरी, सुमन, सविता व नीलम आदि श्रद्धालु रहे।