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सार्वजनिक शौचालयों पर लटके रहते हैं ताले
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सार्वजनिक शौचालयों पर लटके रहते हैं ताले
मुजफ्फरनगर, भौराकलां/सिखेड़ा। जिले को ओडीएफ करने के लिए जगह-जगह सार्वजनिक शौचालय बनाए गए, लेकिन लोगों को लाभ नहीं मिला। अधिकतर जगह दिनभर इन शौचालयों पर ताले लटके रहते हैं। कहीं दरवाजे और खिड़कियां तोड़ दी गई है तो कहीं शौचालयों को लेकर विवाद चल रहा है।
भौराकलां के बस स्टैंड पर सार्वजनिक शौचालय बनाया गया है, लेकिन इस पर ताला लटका रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि इस शौचालय पर सरकार के लाखों रुपये खर्च हुए हैं, लेकिन इसका कोई लाभ ग्रामीणों को नहीं मिला है। ग्रामीण कहते हैं कि अगर शौचालय बनाया है तो इस पर 24 घंटे सुविधा होनी चाहिए। यहां न कोई कर्मचारी है और न ही ताला खुलता है। इसके अलावा निराना गेट पर सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराया गया, लेकिन यह विवादों की भेेंट चढ़ गया। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि लोगों को सार्वजनिक शौचालय का पूरा लाभ नहीं मिल सका है।
सही जगह का नहीं किया चयन
भोपा। मोरना विकासखंड क्षेत्र में तीन ग्राम पंचायतों को छोड़ बाकी सभी ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक शौचालय पूर्ण रूप से तैयार कर ग्राम पंचायत वह गांव में संचालित समूह के सुपुर्द कर दिए गए हैं। ग्राम पंचायतों मजरा गांव सार्वजनिक शौचालय से आज भी वंचित है। कई स्थानों सार्वजनिक शौचालय बनाते समय सही जगह का चयन ना करने से वह पूर्ण रूप से उपयोग में नहीं है। एडीओ सीपी शर्मा ने बताया कि मोरना विकास खंड क्षेत्र में 50 ग्राम पंचायत लगती है। तीन ग्राम पंचायतों खोकनी, वजीराबाद कुछ और सभी ग्राम पंचायतों के सर्वजन शौचालय को गांव में संचालित स्वयं सहायता समूह केेे सुपुर्द कर दिया हैैं। संवाद
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कई जगहों पर निर्माण ही नहीं हो पाया
मोरना। विकास खंड क्षेत्र में लगने वाली ग्राम पंचायतों के लगभग 24 मजरा गांव है। ग्रामीणों का कहना है कि सभी ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कराया गया है, लेकिन उन से लगने वाले मजरा गांव में सार्वजनिक शौचालय का निर्माण नहीं हो पाया है, जो उनके लिए एक बड़ी समस्या भी है। कई स्थानों पर सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराते समय जगह का सही से चयन नहीं हो पाया। जिसके कारण वह या तो किसी नई बस्ती में बन गए या ऐसे स्थान पर बना दिए गए जहां ग्रामीणों का वास्ता कम है। कई ग्राम पंचायतों में कई कई दिन तक सार्वजनिक शौचालय पर ताले लटके रहते हैं। संवाद
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मुजफ्फरनगर, भौराकलां/सिखेड़ा। जिले को ओडीएफ करने के लिए जगह-जगह सार्वजनिक शौचालय बनाए गए, लेकिन लोगों को लाभ नहीं मिला। अधिकतर जगह दिनभर इन शौचालयों पर ताले लटके रहते हैं। कहीं दरवाजे और खिड़कियां तोड़ दी गई है तो कहीं शौचालयों को लेकर विवाद चल रहा है।
भौराकलां के बस स्टैंड पर सार्वजनिक शौचालय बनाया गया है, लेकिन इस पर ताला लटका रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि इस शौचालय पर सरकार के लाखों रुपये खर्च हुए हैं, लेकिन इसका कोई लाभ ग्रामीणों को नहीं मिला है। ग्रामीण कहते हैं कि अगर शौचालय बनाया है तो इस पर 24 घंटे सुविधा होनी चाहिए। यहां न कोई कर्मचारी है और न ही ताला खुलता है। इसके अलावा निराना गेट पर सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराया गया, लेकिन यह विवादों की भेेंट चढ़ गया। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि लोगों को सार्वजनिक शौचालय का पूरा लाभ नहीं मिल सका है।
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सही जगह का नहीं किया चयन
भोपा। मोरना विकासखंड क्षेत्र में तीन ग्राम पंचायतों को छोड़ बाकी सभी ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक शौचालय पूर्ण रूप से तैयार कर ग्राम पंचायत वह गांव में संचालित समूह के सुपुर्द कर दिए गए हैं। ग्राम पंचायतों मजरा गांव सार्वजनिक शौचालय से आज भी वंचित है। कई स्थानों सार्वजनिक शौचालय बनाते समय सही जगह का चयन ना करने से वह पूर्ण रूप से उपयोग में नहीं है। एडीओ सीपी शर्मा ने बताया कि मोरना विकास खंड क्षेत्र में 50 ग्राम पंचायत लगती है। तीन ग्राम पंचायतों खोकनी, वजीराबाद कुछ और सभी ग्राम पंचायतों के सर्वजन शौचालय को गांव में संचालित स्वयं सहायता समूह केेे सुपुर्द कर दिया हैैं। संवाद
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कई जगहों पर निर्माण ही नहीं हो पाया
मोरना। विकास खंड क्षेत्र में लगने वाली ग्राम पंचायतों के लगभग 24 मजरा गांव है। ग्रामीणों का कहना है कि सभी ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कराया गया है, लेकिन उन से लगने वाले मजरा गांव में सार्वजनिक शौचालय का निर्माण नहीं हो पाया है, जो उनके लिए एक बड़ी समस्या भी है। कई स्थानों पर सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराते समय जगह का सही से चयन नहीं हो पाया। जिसके कारण वह या तो किसी नई बस्ती में बन गए या ऐसे स्थान पर बना दिए गए जहां ग्रामीणों का वास्ता कम है। कई ग्राम पंचायतों में कई कई दिन तक सार्वजनिक शौचालय पर ताले लटके रहते हैं। संवाद