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दो सगे भाईयों को आजीवान कारावास-80 हजार अर्थदंड की सजा
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दो सगे भाईयों को आजीवान कारावास-80 हजार अर्थदंड की सजा
मुजफ्फरनगर। बिहारी गांव में किशोर की हत्या के मामले में दो भाईयों को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। एडीजे दस अशोक कुमार ने फैसला सुनाया।
एडीजीसी कुलदीप कुमार और अधिवक्ता ठाकुर दुष्यंत सिंह ने बताया कि 6 सितंबर 2019 को थाना सिखेड़ा के गांव बिहारी निवासी निसार पुत्र इब्राहिम का 12 वर्षीय बेटा अबुजर घर के बाहर खेलने के दौरान लापता हो गया था। निसार ने थाना सिखेडा में मामला दर्ज कराया था। अगले ही दिन अबुजर का शव ईंख के खेत में पड़ा मिला था। उसकी गर्दन रेत कर हत्या की थी। पुलिस की जांच पड़ताल में गांव के दो सगे भाई सिब्बू व हारुन पुत्र मल्लू प्रकाश में आए थे। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। सिखेडा पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। सुनवाई के लिए यह मामला सेशन कोर्ट को सुपुर्द किया गया था। आरोप तय होने के बाद अभियोजन की तरफ से बाहर गवाह पेश किए गए। बचाव पक्ष ने दो गवाह पेश किए। कोर्ट ने 25 जनवरी को आरोपियों को दोष सिद्घ घोषित किया। 27 जनवरी को एडीजे - 10 अशोक कुमार ने सुनवाई कर दोनों भाईयों को आजीवन कारावास व 80 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। पीड़ित पक्ष की तरफ से एडीजीसी कुलदीप कुमार व अधिवक्ता ठाकुर दुष्यंत सिंह ने कोर्ट में पैरवी की।
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मुजफ्फरनगर। बिहारी गांव में किशोर की हत्या के मामले में दो भाईयों को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। एडीजे दस अशोक कुमार ने फैसला सुनाया।
एडीजीसी कुलदीप कुमार और अधिवक्ता ठाकुर दुष्यंत सिंह ने बताया कि 6 सितंबर 2019 को थाना सिखेड़ा के गांव बिहारी निवासी निसार पुत्र इब्राहिम का 12 वर्षीय बेटा अबुजर घर के बाहर खेलने के दौरान लापता हो गया था। निसार ने थाना सिखेडा में मामला दर्ज कराया था। अगले ही दिन अबुजर का शव ईंख के खेत में पड़ा मिला था। उसकी गर्दन रेत कर हत्या की थी। पुलिस की जांच पड़ताल में गांव के दो सगे भाई सिब्बू व हारुन पुत्र मल्लू प्रकाश में आए थे। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। सिखेडा पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। सुनवाई के लिए यह मामला सेशन कोर्ट को सुपुर्द किया गया था। आरोप तय होने के बाद अभियोजन की तरफ से बाहर गवाह पेश किए गए। बचाव पक्ष ने दो गवाह पेश किए। कोर्ट ने 25 जनवरी को आरोपियों को दोष सिद्घ घोषित किया। 27 जनवरी को एडीजे - 10 अशोक कुमार ने सुनवाई कर दोनों भाईयों को आजीवन कारावास व 80 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। पीड़ित पक्ष की तरफ से एडीजीसी कुलदीप कुमार व अधिवक्ता ठाकुर दुष्यंत सिंह ने कोर्ट में पैरवी की।