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चरथावल में मरा हुआ तेंदुआ मिला
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 19 Dec 2016 12:10 AM IST
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चरथावल में मिला तेंदूए का शव।
- फोटो : अमर उजाला
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चरथावल रविवार शाम कुटेसरा नहर पटरी पर एक मरा हुआ तेंदुआ मिलने की सूचना पर लोगों की भीड़ लग गई। ग्रामीण उसको उठाकर बस स्टैंड पर पहुंच गए। सूचना पर वन विभाग की टीम तेंदुए को लेकर जिला मुख्यालय चली गई।
करीब छह बजे कुटेसरा के जंगल में खेत पर से लौट ग्रामीणों को नहर पटरी पर एक मृत तेंदुआ दिखाई दिया। ग्रामीण उसको उठाकर बुग्गी से गांव के बस स्टैंड पर आ गए। जहां उसको देखने के लिए लोगों का हुजूम मौके पर उमड़ पड़ा। युवाओं ने तेंदुए के साथ फोटो भी खींची। सूचना पर कुटेसरा चौकी प्रभारी सुबोध कुमार मौके पर पहुंच गए।
वन विभाग के डिप्टी रेंजर कुलदीप कुमार एवं उत्सव कुमार भी पहुंचे। टीम प्राथमिक तौर पर तेंदुए की जांच कर मुजफ्फरनगर ले गए। डिप्टी रेंजर ने बताया कि तेंदुआ नर जाति का है। काफी कमजोर हालत में होने के कारण उसके भूख और प्यास के कारण उसकी मौत की संभावना जताई जा रही है।
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बकौल वन विभाग कड़कड़ाती ठंड और अकेला पड़ने के कारण काफी दिनों में वह भूख से तड़पना भी एक वजह उसकी मौत का कारण बन सकती है। डिप्टी रेंजर ने उसका वजन करीब 60 से 70 किलो के करीब और उम्र दो से ढाई साल के बीच बताई है। चूंकि उसके शरीर पर कोई चोट के निशान नहीं है। सोमवार को पशु चिकित्सकों की टीम से पोस्टमार्टम कराने के बाद विभाग की टीम उसका अंतिम संस्कार की कार्रवाई पूरी करेगा।
तीन साल पहले कुटेसरा में तेंदुए ने मचाया था आतंक
चरथावल। पूर्व प्रधान याकूब अली, इकबाल, शमशाद त्यागी ने बताया कि 2014 में गांव में तेंदुए ने कई दिनों तक आतंक मचाया था। गांव के बीच बस्ती में दर्जन भर बकरी व अन्य पशुओं को शिकार बनाया था। जिसके बाद से ग्रामीणों खौफजदा थे। वन विभाग की टीम ने आठ दिनों तक गांव में डेरा डालकर जंगल में पिंजरे में बकरी के बच्चें को छोड़ा था, लेकिन तेंदुआ हाथ नहीं आ पाया था। इसके अलावा दूधली और न्यामू में तेंदुए से हड़कंप मचा था।
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करीब छह बजे कुटेसरा के जंगल में खेत पर से लौट ग्रामीणों को नहर पटरी पर एक मृत तेंदुआ दिखाई दिया। ग्रामीण उसको उठाकर बुग्गी से गांव के बस स्टैंड पर आ गए। जहां उसको देखने के लिए लोगों का हुजूम मौके पर उमड़ पड़ा। युवाओं ने तेंदुए के साथ फोटो भी खींची। सूचना पर कुटेसरा चौकी प्रभारी सुबोध कुमार मौके पर पहुंच गए।
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वन विभाग के डिप्टी रेंजर कुलदीप कुमार एवं उत्सव कुमार भी पहुंचे। टीम प्राथमिक तौर पर तेंदुए की जांच कर मुजफ्फरनगर ले गए। डिप्टी रेंजर ने बताया कि तेंदुआ नर जाति का है। काफी कमजोर हालत में होने के कारण उसके भूख और प्यास के कारण उसकी मौत की संभावना जताई जा रही है।
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बकौल वन विभाग कड़कड़ाती ठंड और अकेला पड़ने के कारण काफी दिनों में वह भूख से तड़पना भी एक वजह उसकी मौत का कारण बन सकती है। डिप्टी रेंजर ने उसका वजन करीब 60 से 70 किलो के करीब और उम्र दो से ढाई साल के बीच बताई है। चूंकि उसके शरीर पर कोई चोट के निशान नहीं है। सोमवार को पशु चिकित्सकों की टीम से पोस्टमार्टम कराने के बाद विभाग की टीम उसका अंतिम संस्कार की कार्रवाई पूरी करेगा।
तीन साल पहले कुटेसरा में तेंदुए ने मचाया था आतंक
चरथावल। पूर्व प्रधान याकूब अली, इकबाल, शमशाद त्यागी ने बताया कि 2014 में गांव में तेंदुए ने कई दिनों तक आतंक मचाया था। गांव के बीच बस्ती में दर्जन भर बकरी व अन्य पशुओं को शिकार बनाया था। जिसके बाद से ग्रामीणों खौफजदा थे। वन विभाग की टीम ने आठ दिनों तक गांव में डेरा डालकर जंगल में पिंजरे में बकरी के बच्चें को छोड़ा था, लेकिन तेंदुआ हाथ नहीं आ पाया था। इसके अलावा दूधली और न्यामू में तेंदुए से हड़कंप मचा था।