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Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर - को.शा. 13235 बनेगी प्रदेश में 0238 का विकल्प
Sat, 10 Feb 2024 12:15 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
Updated Sat, 10 Feb 2024 12:15 AM IST
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- प्रदेश सरकार ने पूरे प्रदेश में नई प्रजाति को दी है स्वीकृति
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। गन्ने की नई प्रजाति को.शा. 13235 को प्रदेश सरकार ने पूरे प्रदेश में स्वीकृति प्रदान की है। इस प्रजाति को किसानों के पास अधिक से अधिक पहुंचाने के लिए बीज वितरण किया जा रहा है। इस प्रजाति को प्रदेश में 0238 का विकल्प बनाने की तैयारी है।
गन्ना शोध केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक ओएस जोशिया का कहना है कि गन्ने की प्रजाति 13235 अरली में 0238 के मुकाबले हर चीज में बेहतर है। इसे प्रदेश सरकार ने संपूर्ण प्रदेश में सामान्य खेती के लिए स्वीकृत किया है। इसकी उपज का औसत 0238 से अधिक है। इसका गन्ना सीधा, मध्यम मोटा, मध्यम कड़ा, पीला हरा सफेदी लिए हुए एवं ठोस है। इसके अगोले पर कांटे नहीं है। पत्तियां आसानी से उतर जाती हैं। इसकी रिकवरी 12.43 प्रतिशत से 13.40 प्रतिशत तक है। उनका कहना है कि 0238 में आ रहे लाल सड़न रोग को देखते हुए किसानों को अब 13235 पर ही फोकस करना चाहिए।
तीन अन्य प्रजातियों का बीज भी दे रहे
गन्ना शोध केंद्र से किसानों को 13235 के अतिरिक्त जिन नई प्रजातियों को बीज दिया जा रहा है। इनमें 14201, 15023 और 17231 शामिल हैं। किसान सभी प्रजातियों को टेस्ट कर रहा है। रिकवरी में 15023 सबसे ऊपर है, लेकिन गन्ना मुलायम होने के कारण जंगली जानवर नुकसान करते हैं।
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0238 आ गई है बीमारी की चपेट में
गन्ना शोध केंद्र के निदेशक डॉ. जयप्रकाश सिंह का कहना है कि 0238 पूरे प्रदेश में लाल सड़न रोग की चपेट में आ गई है। हमारे जनपद में भी यह बीमारी पकड़ बना चुकी है। ऐसे में किसानों को विकल्प के रूप में 13235 को अपनाना चाहिए। यह प्रजाति किसी भी तरह 0238 से कम नहीं है।
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मुजफ्फरनगर। गन्ने की नई प्रजाति को.शा. 13235 को प्रदेश सरकार ने पूरे प्रदेश में स्वीकृति प्रदान की है। इस प्रजाति को किसानों के पास अधिक से अधिक पहुंचाने के लिए बीज वितरण किया जा रहा है। इस प्रजाति को प्रदेश में 0238 का विकल्प बनाने की तैयारी है।
गन्ना शोध केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक ओएस जोशिया का कहना है कि गन्ने की प्रजाति 13235 अरली में 0238 के मुकाबले हर चीज में बेहतर है। इसे प्रदेश सरकार ने संपूर्ण प्रदेश में सामान्य खेती के लिए स्वीकृत किया है। इसकी उपज का औसत 0238 से अधिक है। इसका गन्ना सीधा, मध्यम मोटा, मध्यम कड़ा, पीला हरा सफेदी लिए हुए एवं ठोस है। इसके अगोले पर कांटे नहीं है। पत्तियां आसानी से उतर जाती हैं। इसकी रिकवरी 12.43 प्रतिशत से 13.40 प्रतिशत तक है। उनका कहना है कि 0238 में आ रहे लाल सड़न रोग को देखते हुए किसानों को अब 13235 पर ही फोकस करना चाहिए।
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तीन अन्य प्रजातियों का बीज भी दे रहे
गन्ना शोध केंद्र से किसानों को 13235 के अतिरिक्त जिन नई प्रजातियों को बीज दिया जा रहा है। इनमें 14201, 15023 और 17231 शामिल हैं। किसान सभी प्रजातियों को टेस्ट कर रहा है। रिकवरी में 15023 सबसे ऊपर है, लेकिन गन्ना मुलायम होने के कारण जंगली जानवर नुकसान करते हैं।
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0238 आ गई है बीमारी की चपेट में
गन्ना शोध केंद्र के निदेशक डॉ. जयप्रकाश सिंह का कहना है कि 0238 पूरे प्रदेश में लाल सड़न रोग की चपेट में आ गई है। हमारे जनपद में भी यह बीमारी पकड़ बना चुकी है। ऐसे में किसानों को विकल्प के रूप में 13235 को अपनाना चाहिए। यह प्रजाति किसी भी तरह 0238 से कम नहीं है।