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Muzaffarnagar News: मंसूरपुर - थप्पड़ कांड वाले छात्र का स्कूल में प्रवेश नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

Tue, 07 Nov 2023 12:41 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर Updated Tue, 07 Nov 2023 12:41 AM IST
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Khubbapur case: Supreme Court strict on not allowing student involved in slapping incident in school
खुब्बापुर प्रकरण : कहा - अभिभावकों की पसंद के स्कूल में राज्य सरकार को प्रवेश कराना चाहिए
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंसूरपुर (मुजफ्फरनगर)। पहाड़ा याद नहीं मिलने पर स्कूल में छात्र की सहपाठियों से पिटाई कराने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। अभी तक छात्र का प्रवेश नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से सवाल किए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभिभावकों की पसंद के स्कूल में राज्य सरकार को प्रवेश कराना चाहिए। बीएसए शुभम शुक्ला सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए और शिक्षा विभाग का पक्ष रखा।
पिछले महीने 24 अगस्त को अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र की पिटाई के बाद वीडियो वायरल हो गया था। महात्मा गांधी के पोते तुषार गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में प्रकरण की सुनवाई चल रही है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अभी तक छात्र के किसी स्कूल में प्रवेश नहीं होने का मामला उठाया गया। प्रदेश सरकार के अधिवक्ता से पूछा गया कि क्या किसी स्कूल में बच्चे का प्रवेश कराया गया है। अधिवक्ता ने कमेटी गठित करने का तर्क देते हुए कहा कि बच्चे का परिवार सीबीएसई के स्कूल में प्रवेश चाहता है, यूपी सरकार का कोई भी क्षेत्र में ऐसा स्कूल में नहीं है। बच्चे के प्रवेश के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उधर, पीड़ित के अधिवक्ता ने कहा कि किसी अच्छे स्कूल में सरकार की मदद से प्रवेश होना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 10 नवंबर को होगी।
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यह था पूरा मामला
खुब्बापुर गांव के स्कूल में शिक्षिका तृप्ता त्यागी ने पांच का पहाड़ा नहीं सुनाने पर अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र की सहपाठियों से पिटाई करा दी थी। इस दौरान जातीय टिप्पणी का भी आरोप है। प्रकरण के दौरान पीड़ित छात्र के चचेरे भाई ने वीडियो बना लिया। वीडियो के वायरल होते ही देशभर से प्रतिक्रियाएं आने लगीं और शिक्षिका की गिरफ्तार की मांग उठने लगी। आरोपी शिक्षिका पर एफआईआर दर्ज हो गई है। खुब्बापुर गांव के पीड़ित छात्र का अभी तक किसी स्कूल में प्रवेश नहीं हो सका है। जमीयत उलमा ने छात्र के घर पर शिक्षक भेजकर पढ़ाई शुरू करा दी है।
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सरकार मदद करे तो यहां पढ़ाएंगे
छात्र के पिता इरशाद का कहना है कि उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से दो स्कूलों के नाम दिए हैं। इनमें जिला मुख्यालय का शारदेन पब्लिक स्कूल और होली एंजल्स पब्लिक स्कूल हैं। अगर सरकार मदद करेगी तो इन दोनों स्कूलों में बच्चे को पढ़ा सकते हैं। पीड़ित ने कहा कि हम किसान हैं, निजी खर्च पर इन स्कूलों में पढ़ाना आसान काम नहीं होगा। यहां बच्चे को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए सरकार की मदद की जरूरत पड़ेगी। वहीं, छात्र की पढ़ाई के लिए जमीयत ने पहल की थी। शाहपुर के स्कूल में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर बात हो गई थी, लेकिन इस दौरान बच्चे की सुरक्षा और गांव से आने जाने को लेकर दोनों पक्षों ने चिंता जताई। इसके बाद यहां प्रवेश नहीं हो सका। इसके बाद एक शिक्षक घर पर जाकर ही बच्चे को पढ़ा रहा है।
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