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भक्तों ने जिनेंद्र भगवान का अभिषेक किया
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खतौली में जैन मंडी स्थित पार्श्वनाथ जैन मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित माता जी।
- फोटो : KHATAULI
भक्तों ने जिनेंद्र भगवान का अभिषेक किया
खतौली। जैन मंडी स्थित पार्श्वनाथ जैन मंदिर में शिवभूषण महाराज व विज्ञानमति माता जी ससंघ के आशीर्वाद से श्रद्धालुओं ने संगीतमयी भक्ति तरंगों के साथ मांगलिक क्रियाओं से चौसठ रिद्धि महामंडल विधान का आयोजन किया। विधान की मांगलिक क्रियाएं पंडित जैन शास्त्री ने नेतृत्व में संपन्न कराई गई।
रविवार की सुबह स्त्री, पुरुष व बच्चे पीत व केसरिया वस्त्रों में एकत्र हुए। भक्तों ने दिव्य मंत्रोच्चार के साथ जिनेंद्र भगवान की शांति धारा, अभिषेक व पूजन किया। अष्ट द्रव्य पूजन सामग्री समर्पित की गई। भक्ति संगीत की मधुर ध्वनि पर सुश्रावकों ने भक्ति नृत्य किए। धार्मिक विधान के लिए सुंदर माण्डले का निर्माण किया गया था। आचार्य विद्या सागर अवतरण दिवस मनाया गया। धर्मसभा में विज्ञानमति माता जी ने कहा कि मंदिर भगवान पार्श्वनाथ का अतिशकारी मंदिर है। धार्मिक विधान में शामिल होकर हम अपने भावों में विशुद्धि लाते हैं। धर्म के मार्ग का अनुसरण हमारे जीवन में सदाचार लाता है। सदाचारी व्यक्ति का सर्वत्र सम्मान होता है। संसार में वही सुखी जीवन बिता सकता है, जो संतोष को धारण करें। धर्माचरण करने वाला व्यक्ति महान होता है। गुरु हमें दिशा बोध देते हैं व सन्मार्ग के लिए प्रेरित करते हैं। अच्छे विचार ही हमारे जीवन में संस्कार लाते हैं। राग द्वेष से तनाव और अशांति बढ़ती है। परमात्मा की भक्ति एवं जिनवाणी का मनन जीवन में परिवर्तन लाने के साधन है। संतों की वाणी का श्रवण जीवन में परम आवश्यक है। इस अवसर पर सिद्धार्थ जैन, प्रदीप टीकरी, नवीन, विनोद ठेेकेदार, राजीव, रवि, सुशील, हंसकुमार, नीरज, अरुण जैन, सुनील, सुभाष, मनीष, पीयूष, सिद्धांत, पल्लव, उमंग, शुभम, तुषांग, संजय, आलोक, मनोज, प्रवीण, बबीता, सपना, नीलम, रुपाली, प्रियंका, सुषमा, रेणु, दर्शिता, किरणमाला, रितिका, दीपक, अनिल, आदीश प्रवक्ता, सारिका, निधि, रुची, प्राची, सुनीता, पूनम, रेशी, राखी आदि उपस्थित रहीं।
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खतौली। जैन मंडी स्थित पार्श्वनाथ जैन मंदिर में शिवभूषण महाराज व विज्ञानमति माता जी ससंघ के आशीर्वाद से श्रद्धालुओं ने संगीतमयी भक्ति तरंगों के साथ मांगलिक क्रियाओं से चौसठ रिद्धि महामंडल विधान का आयोजन किया। विधान की मांगलिक क्रियाएं पंडित जैन शास्त्री ने नेतृत्व में संपन्न कराई गई।
रविवार की सुबह स्त्री, पुरुष व बच्चे पीत व केसरिया वस्त्रों में एकत्र हुए। भक्तों ने दिव्य मंत्रोच्चार के साथ जिनेंद्र भगवान की शांति धारा, अभिषेक व पूजन किया। अष्ट द्रव्य पूजन सामग्री समर्पित की गई। भक्ति संगीत की मधुर ध्वनि पर सुश्रावकों ने भक्ति नृत्य किए। धार्मिक विधान के लिए सुंदर माण्डले का निर्माण किया गया था। आचार्य विद्या सागर अवतरण दिवस मनाया गया। धर्मसभा में विज्ञानमति माता जी ने कहा कि मंदिर भगवान पार्श्वनाथ का अतिशकारी मंदिर है। धार्मिक विधान में शामिल होकर हम अपने भावों में विशुद्धि लाते हैं। धर्म के मार्ग का अनुसरण हमारे जीवन में सदाचार लाता है। सदाचारी व्यक्ति का सर्वत्र सम्मान होता है। संसार में वही सुखी जीवन बिता सकता है, जो संतोष को धारण करें। धर्माचरण करने वाला व्यक्ति महान होता है। गुरु हमें दिशा बोध देते हैं व सन्मार्ग के लिए प्रेरित करते हैं। अच्छे विचार ही हमारे जीवन में संस्कार लाते हैं। राग द्वेष से तनाव और अशांति बढ़ती है। परमात्मा की भक्ति एवं जिनवाणी का मनन जीवन में परिवर्तन लाने के साधन है। संतों की वाणी का श्रवण जीवन में परम आवश्यक है। इस अवसर पर सिद्धार्थ जैन, प्रदीप टीकरी, नवीन, विनोद ठेेकेदार, राजीव, रवि, सुशील, हंसकुमार, नीरज, अरुण जैन, सुनील, सुभाष, मनीष, पीयूष, सिद्धांत, पल्लव, उमंग, शुभम, तुषांग, संजय, आलोक, मनोज, प्रवीण, बबीता, सपना, नीलम, रुपाली, प्रियंका, सुषमा, रेणु, दर्शिता, किरणमाला, रितिका, दीपक, अनिल, आदीश प्रवक्ता, सारिका, निधि, रुची, प्राची, सुनीता, पूनम, रेशी, राखी आदि उपस्थित रहीं।
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