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आईटीएफ टेनिस टूर्नामेंट ने बढ़ाई मुजफ्फरनगर की शान
अमर उजाला/ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 20 Nov 2018 12:58 AM IST
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मुजफ्फरनगर में बना ग्रास कोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
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अंतरराष्ट्रीय टेनिस महासंघ (आईटीएफ) के सर्किट में मुजफ्फरनगर जिले की पहचान को नया मुकाम दिया है। दंगे के पांच साल बाद सर्विस क्लब के ग्रास कोर्ट पर देश-विदेश के 50 से ज्यादा महिला टेनिस खिलाड़ियों का जुटना एक उपलब्धि है। खेती-किसानी की पहचान वाले जिले में टेनिस का यह मेला कई उम्मीदें जगाने में फिर कामयाब रहा। हर साल टूर्नामेंट का सिलसिला यदि कायम हो तो निश्चित ही खेल प्रतिभाओं को शिखर छूने का मौका मिलेगा।
सर्विस क्लब के ग्रास कोर्ट की विश्व स्तरीय ख्याति बढ़ गई है। वर्ष 1938 में स्थापित सर्विस क्लब से मुजफ्फरनगर और शामली का स्वर्णिम इतिहास जुड़ा है। राजनीति, कानून, उद्यमी, चिकित्सा और सामाजिक क्षेत्र की शख्सियत क्लब के सदस्य रह चुके है। डीएम प्रशासक का दायित्व निभाते है। सर्विस क्लब को अंतरराष्ट्रीय पहचान भावना स्वरूप मेमोरियल महिला आईटीएफ टेनिस टूर्नामेंट से मिली। सड़क हादसे में असमय विदा हो गई बेटी की स्मृति में उद्यमी ने आलोक स्वरूप ने यह पहल की।
वर्ष 2002 में पहली बार आईटीएफ महिला टेनिस टूर्नामेंट का आयोजन हुआ। 16 साल में जिले में सात टूर्नामेंट हो चुके है, जिसमें आईटीएफ वूमेन सर्किट की खिलाड़ी खेलने आती है। उत्तर भारत में यह अकेली ऐसी प्रतियोगिता है, जिसमें विजेता टेनिस खिलाड़ियों को 25 हजार डॉलर की इनामी राशि वितरित की जाती है। गन्ना, गुड़ और किसानी देश भर में जिले की पहली पहचान थी, मगर अब महिला टेनिस टूर्नामेंट भी चर्चे है। स्लोवाकिया, आस्ट्रिया, स्लोविनिया, सर्बिया, जापान, चीन, इंडोनेशिया, यूएसए, रूस, बुल्गारिया, जर्मनी, चेक गणराज्य, कजाकिस्तान, उजबेकिस्तान आदि देशों की श्रेष्ठ खिलाड़ियों ने आठ दिन चले टूर्नामेंट में भागेदारी की।
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गुयाना के राजदूत एम पोलार्ड ने उद्घाटन के दिन ग्रास कोर्ट की गुणवत्ता देख कर तारीफ की। सानिया मिर्जा तक सर्विस क्लब में आ चुकी है। वर्ष 2013 के दंगे ने सद्भाव, भाईचारे को जो क्षति पहुंचाई थी, उसका असर टूर्नामेंट पर भी पड़ा। यही वजह है कि बीते पांच साल में कोई आयोजन नहीं हुआ। आयोजन समिति से जुड़े आलोक स्वरूप और रविंद्र चौधरी बताते है कि गर्मी के मौसम में टूर्नामेंट कराने को आईटीएफ से तारीखें मिली थी, लेकिन विदेशी खिलाड़ियों को दिक्कतें आती है। इसलिए नवंबर माह में टूर्नामेंट रखा गया। प्रयास रहेगा कि टूर्नामेंट हर साल कराया जाए।
उपेक्षा के बावजूद मिले अर्जुन अवार्डी
मुजफ्फरनगर। हॉकी, शूटिंग, कुश्ती, वॉलीबाल और कबड्डी जिले के परंपरागत खेल रहे है। उपेक्षा की वजह से जहां दंगल के मेले अब नहीं सजते, वैसे ही डीएवी डिग्री कॉलेज में हॉकी प्रतियोगिता बंद हो चुकी है। दशकों से नुमाइश कैंप की शूटिंग रेंज पर निशानेबाज नहीं जुटे। हालांकि जिला रायफल्स एवं शूटिंग एसोसिएशन के पास बजट की कोई कमी नहीं है। अर्जुन पुरस्कार से अलंकृत कुश्ती में अनुज चौधरी और कबड्डी में संजीव कुमार, शूटिंग में शामली के अनवर सुल्तान जैसे अंतरराष्ट्रीय नामचीन खिलाड़ी जिले का गौरव बने है। टेनिस में भी यदि प्रतिभाओं को मौका मिले, तो सर्विस क्लब का प्रयास सार्थक होगा।
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सर्विस क्लब के ग्रास कोर्ट की विश्व स्तरीय ख्याति बढ़ गई है। वर्ष 1938 में स्थापित सर्विस क्लब से मुजफ्फरनगर और शामली का स्वर्णिम इतिहास जुड़ा है। राजनीति, कानून, उद्यमी, चिकित्सा और सामाजिक क्षेत्र की शख्सियत क्लब के सदस्य रह चुके है। डीएम प्रशासक का दायित्व निभाते है। सर्विस क्लब को अंतरराष्ट्रीय पहचान भावना स्वरूप मेमोरियल महिला आईटीएफ टेनिस टूर्नामेंट से मिली। सड़क हादसे में असमय विदा हो गई बेटी की स्मृति में उद्यमी ने आलोक स्वरूप ने यह पहल की।
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वर्ष 2002 में पहली बार आईटीएफ महिला टेनिस टूर्नामेंट का आयोजन हुआ। 16 साल में जिले में सात टूर्नामेंट हो चुके है, जिसमें आईटीएफ वूमेन सर्किट की खिलाड़ी खेलने आती है। उत्तर भारत में यह अकेली ऐसी प्रतियोगिता है, जिसमें विजेता टेनिस खिलाड़ियों को 25 हजार डॉलर की इनामी राशि वितरित की जाती है। गन्ना, गुड़ और किसानी देश भर में जिले की पहली पहचान थी, मगर अब महिला टेनिस टूर्नामेंट भी चर्चे है। स्लोवाकिया, आस्ट्रिया, स्लोविनिया, सर्बिया, जापान, चीन, इंडोनेशिया, यूएसए, रूस, बुल्गारिया, जर्मनी, चेक गणराज्य, कजाकिस्तान, उजबेकिस्तान आदि देशों की श्रेष्ठ खिलाड़ियों ने आठ दिन चले टूर्नामेंट में भागेदारी की।
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गुयाना के राजदूत एम पोलार्ड ने उद्घाटन के दिन ग्रास कोर्ट की गुणवत्ता देख कर तारीफ की। सानिया मिर्जा तक सर्विस क्लब में आ चुकी है। वर्ष 2013 के दंगे ने सद्भाव, भाईचारे को जो क्षति पहुंचाई थी, उसका असर टूर्नामेंट पर भी पड़ा। यही वजह है कि बीते पांच साल में कोई आयोजन नहीं हुआ। आयोजन समिति से जुड़े आलोक स्वरूप और रविंद्र चौधरी बताते है कि गर्मी के मौसम में टूर्नामेंट कराने को आईटीएफ से तारीखें मिली थी, लेकिन विदेशी खिलाड़ियों को दिक्कतें आती है। इसलिए नवंबर माह में टूर्नामेंट रखा गया। प्रयास रहेगा कि टूर्नामेंट हर साल कराया जाए।
उपेक्षा के बावजूद मिले अर्जुन अवार्डी
मुजफ्फरनगर। हॉकी, शूटिंग, कुश्ती, वॉलीबाल और कबड्डी जिले के परंपरागत खेल रहे है। उपेक्षा की वजह से जहां दंगल के मेले अब नहीं सजते, वैसे ही डीएवी डिग्री कॉलेज में हॉकी प्रतियोगिता बंद हो चुकी है। दशकों से नुमाइश कैंप की शूटिंग रेंज पर निशानेबाज नहीं जुटे। हालांकि जिला रायफल्स एवं शूटिंग एसोसिएशन के पास बजट की कोई कमी नहीं है। अर्जुन पुरस्कार से अलंकृत कुश्ती में अनुज चौधरी और कबड्डी में संजीव कुमार, शूटिंग में शामली के अनवर सुल्तान जैसे अंतरराष्ट्रीय नामचीन खिलाड़ी जिले का गौरव बने है। टेनिस में भी यदि प्रतिभाओं को मौका मिले, तो सर्विस क्लब का प्रयास सार्थक होगा।