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पटाखों के प्रदूषण में सांस लेना हो जाएगा मुश्किल
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पटाखों के प्रदूषण में सांस लेना हो जाएगा मुश्किल
मुजफ्फरनगर। दीवाली पर पटाखे और आतिशबाजी मुश्किलें खड़ी कर देंगे। पहले ही प्रदूषित चल रही जिले की हवा में सांस, अस्थमा और टीबी के रोगियों के लिए दीवाली के धूम-धड़ाके में सांस लेना और अधिक मुश्किल हो जाएगा। पिछले सप्ताह ही जिले का एक्यूआई तीन सौ के पर पहुंच गया था।
कोरोना की दूसरी लहर में लोग ऑक्सीजन की कमी से मुश्किलें झेल चुके हैं। कोरोना काल बीतने के बावजूद अभी भी कई लोग सांस लेने में शिकायत लेकर डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं। लोग अपने फेफड़ों की जांच भी करा रहे हैं। ऐसे में दीवाली पर होने वाली आतिशबाजी से प्रदूषण फैलेगा, जिस कारण लोगों की मुश्किलें बढ़ जाएगी। पटाखे जलने पर उससे हानिकारक गैस निकलती है। इस हवा में सांस लेना मुश्किल हो जाता है।
बढ़ जाएगी रोगियों की मुश्किलें
सीएमओ डॉ. एमएस फौजदार का कहना है कि डेंगू, वायरल के अलावा अन्य बीमारियों का प्रकोप चल रहा है। प्रदूषण व आतिशबाजी से टीबी, सांस, दमा, अस्थमा व कोविड के कारण फेफड़ों में संक्रमण झेल चुके मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है।
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स्मॉग बढ़ा सकता है मुश्किलें
जिला अस्पताल के सीनियर फिजीशियन डॉ. योगेंद्र त्रिखा का कहना है कि मौसम में नमी है, यह नमी धूल कणों के साथ मिलकर स्मॉग बनाती है, जिससे सुबह-शाम लोगों को सांस लेने में दिक्कत होती है।
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मुजफ्फरनगर। दीवाली पर पटाखे और आतिशबाजी मुश्किलें खड़ी कर देंगे। पहले ही प्रदूषित चल रही जिले की हवा में सांस, अस्थमा और टीबी के रोगियों के लिए दीवाली के धूम-धड़ाके में सांस लेना और अधिक मुश्किल हो जाएगा। पिछले सप्ताह ही जिले का एक्यूआई तीन सौ के पर पहुंच गया था।
कोरोना की दूसरी लहर में लोग ऑक्सीजन की कमी से मुश्किलें झेल चुके हैं। कोरोना काल बीतने के बावजूद अभी भी कई लोग सांस लेने में शिकायत लेकर डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं। लोग अपने फेफड़ों की जांच भी करा रहे हैं। ऐसे में दीवाली पर होने वाली आतिशबाजी से प्रदूषण फैलेगा, जिस कारण लोगों की मुश्किलें बढ़ जाएगी। पटाखे जलने पर उससे हानिकारक गैस निकलती है। इस हवा में सांस लेना मुश्किल हो जाता है।
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बढ़ जाएगी रोगियों की मुश्किलें
सीएमओ डॉ. एमएस फौजदार का कहना है कि डेंगू, वायरल के अलावा अन्य बीमारियों का प्रकोप चल रहा है। प्रदूषण व आतिशबाजी से टीबी, सांस, दमा, अस्थमा व कोविड के कारण फेफड़ों में संक्रमण झेल चुके मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है।
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स्मॉग बढ़ा सकता है मुश्किलें
जिला अस्पताल के सीनियर फिजीशियन डॉ. योगेंद्र त्रिखा का कहना है कि मौसम में नमी है, यह नमी धूल कणों के साथ मिलकर स्मॉग बनाती है, जिससे सुबह-शाम लोगों को सांस लेने में दिक्कत होती है।