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भूसे पर छाई महंगाई, महंगे हो गए दूध और मिठाई
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बुढ़ाना। इस बार भूसे के दाम लगातार आसमान छूते जा रहे हैं। नतीजतन, दूध के दामों में भी बढ़ोतरी हो गई है। दूध से निर्मित मिठाइयों के दाम भी बढ़ गए हैं। भूसे की कीमतों में अधिक इजाफे से पशुपालकों की भी मुसीबतें बढ़ गई हैं।
गांवों में आमतौर पर 600 से 800 रुपये प्रति क्विंटल मिलने वाला भूसा अब 1500 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। भूसे के दामों में जबरदस्त उछाल के कारण पशुपालक भूसे के अभाव में अपने पशुओं को पराली खिलाने पर मजबूर हो गए हैं। भूसे के दाम बढ़ने के कारण पराली के दाम भी बढ़ गए हैं। पशुओं का चारा व राशन महंगा होने के कारण पशुपालकों को दूध के दाम भी बढ़ाने पड़ गए हैं।
गांव और कस्बे में कुछ दिनों पहले तक दूध 40 से 45 रुपये प्रति लीटर मिल रहा था, अब वह 50 से 55 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि डेयरियों पर दूध के दाम 60 रुपये तक पहुंच गए हैं। दूध के दामों में बढ़ोतरी से मिठाई विक्रेताओं को मिठाइयों के दाम भी बढ़ाने पड़ गए हैं। कस्बे में चाय दस रुपये से बढ़कर 15 रुपये हो गई है। पशुपालकों का कहना है कि अभी आगे भी पता नहीं कब तक भूसे की किल्लत से जूझना होगा। भूसे की किल्लत के कारण इस वर्ष हरा चारा भी महंगा मिलेगा।
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महंगाई ने जनता की कमर तोड़ के रख दी है। पशु भी इस महंगाई से अछूते नहीं रहे हैं। भूसे के दाम आसमान पर चले गए हैं। - डॉ. अनिल डबास, मिंडकाली
दूध से निर्मित मिठाइयों के दाम भी बढ़ाने पड़ रहे हैं। महंगाई ने तो कमर तोड़ के रख दी है। इससे पहले दूध के दाम आज तक इतने कभी नहीं बढ़े हैं। चाय के दाम भी पांच रुपये बढ़ाने पड़ गए हैं। - बबलू, चाय और मिठाई विक्रेता
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गांवों में आमतौर पर 600 से 800 रुपये प्रति क्विंटल मिलने वाला भूसा अब 1500 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। भूसे के दामों में जबरदस्त उछाल के कारण पशुपालक भूसे के अभाव में अपने पशुओं को पराली खिलाने पर मजबूर हो गए हैं। भूसे के दाम बढ़ने के कारण पराली के दाम भी बढ़ गए हैं। पशुओं का चारा व राशन महंगा होने के कारण पशुपालकों को दूध के दाम भी बढ़ाने पड़ गए हैं।
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गांव और कस्बे में कुछ दिनों पहले तक दूध 40 से 45 रुपये प्रति लीटर मिल रहा था, अब वह 50 से 55 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि डेयरियों पर दूध के दाम 60 रुपये तक पहुंच गए हैं। दूध के दामों में बढ़ोतरी से मिठाई विक्रेताओं को मिठाइयों के दाम भी बढ़ाने पड़ गए हैं। कस्बे में चाय दस रुपये से बढ़कर 15 रुपये हो गई है। पशुपालकों का कहना है कि अभी आगे भी पता नहीं कब तक भूसे की किल्लत से जूझना होगा। भूसे की किल्लत के कारण इस वर्ष हरा चारा भी महंगा मिलेगा।
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महंगाई ने जनता की कमर तोड़ के रख दी है। पशु भी इस महंगाई से अछूते नहीं रहे हैं। भूसे के दाम आसमान पर चले गए हैं। - डॉ. अनिल डबास, मिंडकाली
दूध से निर्मित मिठाइयों के दाम भी बढ़ाने पड़ रहे हैं। महंगाई ने तो कमर तोड़ के रख दी है। इससे पहले दूध के दाम आज तक इतने कभी नहीं बढ़े हैं। चाय के दाम भी पांच रुपये बढ़ाने पड़ गए हैं। - बबलू, चाय और मिठाई विक्रेता