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सभी धर्म-संस्कृति का मुल्क है हिंदुस्तान : मदनी
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Fri, 18 Aug 2017 01:02 AM IST
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कार्यक्रम में विचार रखते वक्ता।
- फोटो : अमर उजाला
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जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कहा कि हिंदुस्तान सभी धर्म व संस्कृति के लोगों का मुल्क है, इसकी बुनियाद में हमारे बुजुर्गों का खून शामिल है। कुछ सांप्रदायिक ताकतें मुल्क में नफरत की आग फैलाने का काम रही हैं। उन्होंने कहा कि ईदुल अजहा करीब है। मुसलमानों को संदेश दिया कि गाय की कुर्बानी बिल्कुल न करें और दूसरे अन्य कुर्बानी के लिए वैध जानवर की बेखौफ कुर्बानी करें।
रुड़की रोड स्थित एक पैलेस में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के तत्वावधान में जश्न-ए-आजादी को लेकर कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कहा कि आज फिरकापरस्त ताकतें मुल्क में आग लगाना चाहती है। इसकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए। मुल्क में हिंदू-मुस्लिम और सिख-ईसाई एक साथ प्यार और मुहब्बत के साथ रहने का पैगाम देते हैं। उन्होंने कहा कि संगठन ने हमेशा मुल्क की तरक्की और मुल्क में रहने वालों की भलाई के लिए काम किया है।
बकरीद पर गाय की कुर्बानी न करने की अपील की। साथ ही कहा कि हुकूमत और जिला प्रशासन से मुसलमानों के इस मुकद्दस त्यौहार को मनाने में सामने आने वाली हर तरह की परेशानी को दूर कराए। वहीं, शुक्रताल आश्रम से आए पंडित अजय कृष्ण ने कहा कि जिन लोगों ने देश की आजादी में योगदान नहीं दिया, वहीं आज देशभक्त बने हुए हैं। ईसाई धर्म गुरु फादर जगत सिंह ने कहा कि देश में अमन व अमान और भाईचारे के लिए सबको साथ लेकर चलने की जरूरत है।
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पंजाबी समाज के अध्यक्ष सरदार जंग सिंह ने कहा कि नफरत फैलाने वालों को मोहब्बत से जवाब दिए जाने की जरूरत है। मदनी ने कहा कि फिरकापरस्त ताक़तें इतिहास को बदलना चाहती हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष मौलाना नाजिर हसन व संचालन संयुक्त सचिव मौलाना मुस्तफा और शहर सचिव मौलाना ताहिर कासमी ने संयुक्त रूप से किया। इस दौरान उपाध्यक्ष मौलाना नजर मोहम्मद, पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक, मौलाना जुबेर रहमानी, अशोक बालियान, सपा नेता प्रमोद त्यागी,
हाजी शाहिद त्यागी तिलावते कुरान मौलाना नौशाद, हाजी शाहिद त्यागी, मौलाना शाहनवाज कासमी, मौलाना ताहिर क़ासमी, मौलाना मुकर्रम कासमी, मौलाना कासिम, कारी शाहिद हुसैनी, मुरसलीन प्रधान, मौलाना जुबेर रहमानी, मौलाना मौहम्मद अहमद, हाजी अजीजुर्रहमान, मौलाना ख़ालिद जाहिद, मौलाना अब्दुल्ला, कलीम त्यागी, कारी सलीम कासमी, कारी कलीम कासमी, हाफिज तहसीन राना, आसिफ कुरैशी, मौलाना मुदस्सिर, मौलाना इनाम, हाजी जमील अहमद, अकील अहमद, मुफ्ति तनमीक, मौलाना अरशद, मौलाना यामीन, कारी नफीस, मौलाना महबूब, कारी असरार आदि मौजूद रहे।
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रुड़की रोड स्थित एक पैलेस में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के तत्वावधान में जश्न-ए-आजादी को लेकर कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कहा कि आज फिरकापरस्त ताकतें मुल्क में आग लगाना चाहती है। इसकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए। मुल्क में हिंदू-मुस्लिम और सिख-ईसाई एक साथ प्यार और मुहब्बत के साथ रहने का पैगाम देते हैं। उन्होंने कहा कि संगठन ने हमेशा मुल्क की तरक्की और मुल्क में रहने वालों की भलाई के लिए काम किया है।
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बकरीद पर गाय की कुर्बानी न करने की अपील की। साथ ही कहा कि हुकूमत और जिला प्रशासन से मुसलमानों के इस मुकद्दस त्यौहार को मनाने में सामने आने वाली हर तरह की परेशानी को दूर कराए। वहीं, शुक्रताल आश्रम से आए पंडित अजय कृष्ण ने कहा कि जिन लोगों ने देश की आजादी में योगदान नहीं दिया, वहीं आज देशभक्त बने हुए हैं। ईसाई धर्म गुरु फादर जगत सिंह ने कहा कि देश में अमन व अमान और भाईचारे के लिए सबको साथ लेकर चलने की जरूरत है।
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पंजाबी समाज के अध्यक्ष सरदार जंग सिंह ने कहा कि नफरत फैलाने वालों को मोहब्बत से जवाब दिए जाने की जरूरत है। मदनी ने कहा कि फिरकापरस्त ताक़तें इतिहास को बदलना चाहती हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष मौलाना नाजिर हसन व संचालन संयुक्त सचिव मौलाना मुस्तफा और शहर सचिव मौलाना ताहिर कासमी ने संयुक्त रूप से किया। इस दौरान उपाध्यक्ष मौलाना नजर मोहम्मद, पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक, मौलाना जुबेर रहमानी, अशोक बालियान, सपा नेता प्रमोद त्यागी,
हाजी शाहिद त्यागी तिलावते कुरान मौलाना नौशाद, हाजी शाहिद त्यागी, मौलाना शाहनवाज कासमी, मौलाना ताहिर क़ासमी, मौलाना मुकर्रम कासमी, मौलाना कासिम, कारी शाहिद हुसैनी, मुरसलीन प्रधान, मौलाना जुबेर रहमानी, मौलाना मौहम्मद अहमद, हाजी अजीजुर्रहमान, मौलाना ख़ालिद जाहिद, मौलाना अब्दुल्ला, कलीम त्यागी, कारी सलीम कासमी, कारी कलीम कासमी, हाफिज तहसीन राना, आसिफ कुरैशी, मौलाना मुदस्सिर, मौलाना इनाम, हाजी जमील अहमद, अकील अहमद, मुफ्ति तनमीक, मौलाना अरशद, मौलाना यामीन, कारी नफीस, मौलाना महबूब, कारी असरार आदि मौजूद रहे।