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माताओं का त्याग राष्ट्र का प्रेरक : सोमदेव
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नई मंडी में आर्य समाज के वर्षिकोत्सव पर वेदपाठी संगीता आर्या को सम्मानित करते आचार्य गुरुदत्त आ?
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
माताओं का त्याग राष्ट्र का प्रेरक : सोमदेव
मुजफ्फरनगर। नई मंडी आर्य समाज में तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव का शुभारंभ वेद मंत्रोच्चार के साथ देवयज्ञ से हुआ। वैदिक विद्वान आचार्य सोमदेव ने कहा कि भारत की माताएं वीर पुत्र-पुत्रियों की जननी है। माताओं का त्याग और सेवा राष्ट्र की प्रेरक है।
दयानंद मार्ग स्थित नई मंडी आर्य समाज के भवन में आयोजित वार्षिकोत्सव में प्रवचन करते हुए आचार्य सोमदेव ने कहा कि परिवार में नारी के अनुशासन, संयम, सदाचरण, साहस और योग्यता का संतान तथा समाज में विशेष प्रभाव होता है। श्रीराम, श्रीकृष्ण, ऋषि दयानंद, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, लक्ष्मी बाई जैसे वीर, चरित्रवान महान व्यक्तित्व भारत धरा की माताओं ने पैदा किए। वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि माता ही बच्चों की प्रथम गुरु और देवता होती है। सनातन संस्कृति में नारी को शक्ति स्वरूपा मानकर पूजा गया है। महर्षि दयानंद ने वेदों के प्रमाण से स्त्रियों को वेद पढ़ने, यज्ञ करने एवं विधा ग्रहण करने का अधिकार दिलाया। सभा अध्यक्षा शकुंतला आर्या ने कहा कि संतान के निर्माण में माता की भूमिका सबसे अहम है। वेदपाठी संगीता आर्या का उत्कृष्ट वैदिक प्रचारार्थ सेवाओं के लिए आचार्य गुरुदत्त आर्य ने शाल और सम्मान राशि भेंट कर अभिनंदन किया। खुशी आर्या तथा कोलकता के भजनोपदेशक कैलाश कर्मठ ने प्रेरक भजन सुनाए। यज्ञमान अंकित और शिक्षिका नेहा रही। आनंद पाल सिंह आर्य, आर.पी. शर्मा, सुरेंद्र सिंह आर्य, मंगत सिंह, योगेश्वर दयाल, आनंद स्वरूप, मुकेश आर्य, सतीश आर्य, मंजू आर्या, प्रियंका आर्या, राकेश आर्या आदि मौजूद रही। संचालन आर.पी.शर्मा ने किया।
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मुजफ्फरनगर। नई मंडी आर्य समाज में तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव का शुभारंभ वेद मंत्रोच्चार के साथ देवयज्ञ से हुआ। वैदिक विद्वान आचार्य सोमदेव ने कहा कि भारत की माताएं वीर पुत्र-पुत्रियों की जननी है। माताओं का त्याग और सेवा राष्ट्र की प्रेरक है।
दयानंद मार्ग स्थित नई मंडी आर्य समाज के भवन में आयोजित वार्षिकोत्सव में प्रवचन करते हुए आचार्य सोमदेव ने कहा कि परिवार में नारी के अनुशासन, संयम, सदाचरण, साहस और योग्यता का संतान तथा समाज में विशेष प्रभाव होता है। श्रीराम, श्रीकृष्ण, ऋषि दयानंद, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, लक्ष्मी बाई जैसे वीर, चरित्रवान महान व्यक्तित्व भारत धरा की माताओं ने पैदा किए। वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि माता ही बच्चों की प्रथम गुरु और देवता होती है। सनातन संस्कृति में नारी को शक्ति स्वरूपा मानकर पूजा गया है। महर्षि दयानंद ने वेदों के प्रमाण से स्त्रियों को वेद पढ़ने, यज्ञ करने एवं विधा ग्रहण करने का अधिकार दिलाया। सभा अध्यक्षा शकुंतला आर्या ने कहा कि संतान के निर्माण में माता की भूमिका सबसे अहम है। वेदपाठी संगीता आर्या का उत्कृष्ट वैदिक प्रचारार्थ सेवाओं के लिए आचार्य गुरुदत्त आर्य ने शाल और सम्मान राशि भेंट कर अभिनंदन किया। खुशी आर्या तथा कोलकता के भजनोपदेशक कैलाश कर्मठ ने प्रेरक भजन सुनाए। यज्ञमान अंकित और शिक्षिका नेहा रही। आनंद पाल सिंह आर्य, आर.पी. शर्मा, सुरेंद्र सिंह आर्य, मंगत सिंह, योगेश्वर दयाल, आनंद स्वरूप, मुकेश आर्य, सतीश आर्य, मंजू आर्या, प्रियंका आर्या, राकेश आर्या आदि मौजूद रही। संचालन आर.पी.शर्मा ने किया।
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