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कानून की बात करेंगे तो डॉक्टर नहीं चला पाएंगे क्लीनिक : योगेश शर्मा

Mon, 11 Apr 2022 11:57 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 11 Apr 2022 11:57 PM IST
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If we talk about law, doctors will not be able to run clinics: Yogesh Sharma
पार्टी कार्यालय पर वार्ता करते भाकियू कार्यकर्ता। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
मुजफ्फरनगर। भाकियू जिलाध्यक्ष योगेश शर्मा ने कहा कि गलत तरीके से मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस ने अगर कार्यकर्ताओं को छेड़ा तो जेल भर देंगे। जरूरतमंद की आवाज उठाना गुनाह नहीं है। एकतरफा कार्रवाई की जा रही है। अस्पतालों के संचालन में कानून के साथ खिलवाड़ हो रहा है। मानक अधूरे हैं। अगर कानून की बात करेंगे तो डॉक्टरों के अस्पतालों की जांच निष्पक्षता से होनी चाहिए।
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महावीर चौक पर भाकियू कार्यालय पर कार्यकर्ताओं की सभा में जिलाध्यक्ष ने कहा कि भाकियू पीड़ितों की आवाज उठाती रही है और इससे पीछे हटने वाली नहीं है। बच्चा बदलने का प्रकरण प्रशासन की मौजूदगी में समाप्त हो गया था, लेकिन सत्ताधारी कुछ लोगों के इशारे पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। रिपोर्ट में डॉक्टर ने ही बच्चे को लड़का लिखा है। भाजपा जिला उपाध्यक्ष विकास शर्मा जिला पंचायत के सदस्य भी है। योजनाबद्ध तरीके के भाकियू को बदनाम करने का काम किया जा रहा है। संगठन इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। सभा के बाद पत्रकारों से बातचीत में भी योगेश शर्मा ने कहा कि नाइंसाफी बर्दाश्त नहीं करेंगे। पूर्व जिलाध्यक्ष धीरज लाटियान, मंडल अध्यक्ष नवीन राठी, प्रताप सिंह, सरदार अमीर सिंह, कुलदीप त्यागी, सतेंद्र चौहान, संजय त्यागी, जिला उपाध्यक्ष विकास शर्मा, राजीव राठी, गुलबहार, शक्ति सिंह मौजूद रहे।
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डॉक्टर के खिलाफ तहरीर, 17 को सिसौली में पंचायत
जिलाध्यक्ष ने बताया कि सिविल लाइन पुलिस को डॉक्टर के खिलाफ तहरीर दे दी है। पुलिस ने तीन दिन में कार्रवाई नहीं की तो 17 अप्रैल को सिसौली की मासिक पंचायत में फैसला लिया जाएगा। शहर के अधिकतर डॉक्टर कोई भी मानक पूरे नहीं करते। इनके पास हॉस्पिटल के मानचित्र तक नहीं है।
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ये था मामला
रोनी हरजीपुर निवासी राज सिंह अपनी पत्नी को प्रसव पीड़ा के बाद 18 फरवरी को अस्पताल के लिए लेकर चला था। रास्ते में प्रसव हो गया, जिस कारण नवजात को चोट लग गई। राज सिंह ने अपनी पत्नी को शामली रोड स्थित अस्पताल में भर्ती कराया, जबकि नवजात आरती को पंवार हॉस्टिपल में भर्ती कराया था। 28 फरवरी को राज सिंह की पत्नी की मौत हो गई। इसके बाद 13 मार्च को राज सिंह नवजात को अस्पताल से अपने घर ले गया। 14 मार्च को वह दोबारा अस्पताल पहुंचा और आरोप लगाया कि उसने लड़का भर्ती कराया था, जबकि अस्पताल में बच्चा बदलकर लड़की दे दी गई। भाकियू के जिला उपाध्यक्ष विकास शर्मा अन्य लोगों के साथ अस्पताल पहुंचे और प्रदर्शन किया था।

डीएनए जांच में लड़की हुई साबित
सिटी मजिस्ट्रेट अनूप कुमार के हस्तक्षेप के बाद डीएनए जांच के लिए सहमति बनीं थी। स्वास्थ्य विभाग ने नवजात और राज सिंह का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा था। आठ अप्रैल को रिपोर्ट आई, जिसमें सैंपल मैच हो गया।
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