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Muzaffarnagar News: भूलता नहीं खाैफनाक मंजर...बिजली कड़की और गिरने लगे पत्थर
Sun, 31 Aug 2025 12:57 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
Updated Sun, 31 Aug 2025 12:57 AM IST
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श्रद्धालु ममतेश और आकांक्षा के शवों के पास विलाप करते परिजन। संवाद।
- फोटो : संवाद
मुजफ्फरनगर। छह श्रद्धालुओं की मौत के बाद करुण-क्रंदन से उत्तरी रामपुरी में हर आंख से आंसू बहे। कटड़ा से बचकर लौटे 11 श्रद्धालुओं की आंखों में भूस्खलन और मौत की दस्तक का खौफ साफ दिखा। पांच दिन की पीड़ा झेलकर अपने घर की दहलीज नसीब हुई। घर लौटी संगीता कहती हंै कि पहले बिजली कड़की और फिर पत्थर गिरने लगे। जान बचाने के लिए लोग भागने लगे। जो संभल गए, वह बच निकले और जो फंस गए उनकी जान निकल गई।
जम्मू-कश्मीर से लौटी खुशी (16) की आंख के आंसू नहीं थम रहे। कहती हैं कि माता के दर्शन के लिए सब बेहद उत्साहित थे। अलग-अलग जत्थों में बंट गए। सबसे ज्यादा खुश बच्चे थे। रामपुरी के अधिकतर लोग आगे निकल गए थे, जबकि हम पीछे रह गए थे।
बारिश के बीच जोर से धम की आवाज हुई। फिर शोर-शराबा होने लगा। इसके बाद हम आगे नहीं बढ़े और सुरक्षित अपने स्थान पर रुक गए। शुरुआत में कोई कुछ नहीं समझ पाया, लेकिन धीरे-धीरे हादसे की भयावहता का पता चला तो रूह कांप गई। श्रद्धालुओं को लेकर आए सुमित कहते हैं कि पांच दिन बेहद पीड़ा में गुजरे हैं।
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जम्मू-कश्मीर से लौटी खुशी (16) की आंख के आंसू नहीं थम रहे। कहती हैं कि माता के दर्शन के लिए सब बेहद उत्साहित थे। अलग-अलग जत्थों में बंट गए। सबसे ज्यादा खुश बच्चे थे। रामपुरी के अधिकतर लोग आगे निकल गए थे, जबकि हम पीछे रह गए थे।
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बारिश के बीच जोर से धम की आवाज हुई। फिर शोर-शराबा होने लगा। इसके बाद हम आगे नहीं बढ़े और सुरक्षित अपने स्थान पर रुक गए। शुरुआत में कोई कुछ नहीं समझ पाया, लेकिन धीरे-धीरे हादसे की भयावहता का पता चला तो रूह कांप गई। श्रद्धालुओं को लेकर आए सुमित कहते हैं कि पांच दिन बेहद पीड़ा में गुजरे हैं।
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