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यूक्रेन से घर पहुंचा बुढ़ाना का हर्ष
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बुढ़ाना में यूक्रेन से बुढ़ाना पहुंचे हर्ष को मिठाई खिलाते उसके पिता व परिजन।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
यूक्रेन से घर पहुंचा बुढ़ाना का हर्ष
मुजफ्फरनगर, बुढ़ाना। युक्रेन के इवानो शहर में मेडिकल की पढ़ाई करने गया हर्ष जिंदगी मौत से जूझता हुआ शुक्रवार सुबह स्वदेश वापस लौट आया। उसके घर पहुंचते ही परिजनों के चहरे पर खुशी लौट आई। हर्ष के घर पहुंचने से उसके घर दीपावली जैसी खुशियां छा गई।
बुढ़ाना का हर्ष मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए युक्रेन के इवानो शहर में गया था। 24 फरवरी को रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया। हर्ष ने बताया कि उसने अपनी आंखों से आसमान से आग बरसती देखी। सायरन की आवाज सुनते ही सभी छात्र नजदीक बने बंकरों में पहुंच गए। उसने अपनी आंखों से आसमान से मिसाइल को गिरती हुई भी देखी। 25 फरवरी को उसने व साथियों ने 7 घंटे लाईन में लगकर अपना-अपना सारा कैश ले लिया। रोमानिया के बॉर्डर पर -6 डिग्री सेल्सियस में उन्होनें 72 घंटें खड़े रहकर खुले आसमान के नीचे गुजारे। स्वदेश लोटने का जज्बा तथा परिजनों व रिश्तेदारों द्वारा बढ़ाए गए हौसले ने उनकी हिम्मत को नही टूटने दिया।
शुक्रवार को सुबह करीब साढ़े सात बजें उनकी फ्लाईट स्वदेश पहुंची। परिजनों के बीच पहुंचे हर्ष की खुशी का ठिकाना नही है। हर्ष ने बताया कि वह यही से यूक्रेन में फंसे अपने अन्य साथियों को भी वहां से निकलवाने का प्रयास कर रहे है। उनकी हिम्मत व हौसला बढ़ा रहे है। हर्ष ने बताया कि उसका एमबीबीएस का तीसरा वर्ष है। आगे पढ़ाई का क्या होगा कुछ पता नही है। जीवन है तो सब कुछ है। आगे भी बेहतर प्रयास किए जा सकते है। इस मौके पर हर्ष की माता अलका, पिता अनुज, भाई आकर्ष के अलावा पड़ोसी आशीष व चिराग सहित कई रिश्तेदार मौजूद रहे।
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मुजफ्फरनगर, बुढ़ाना। युक्रेन के इवानो शहर में मेडिकल की पढ़ाई करने गया हर्ष जिंदगी मौत से जूझता हुआ शुक्रवार सुबह स्वदेश वापस लौट आया। उसके घर पहुंचते ही परिजनों के चहरे पर खुशी लौट आई। हर्ष के घर पहुंचने से उसके घर दीपावली जैसी खुशियां छा गई।
बुढ़ाना का हर्ष मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए युक्रेन के इवानो शहर में गया था। 24 फरवरी को रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया। हर्ष ने बताया कि उसने अपनी आंखों से आसमान से आग बरसती देखी। सायरन की आवाज सुनते ही सभी छात्र नजदीक बने बंकरों में पहुंच गए। उसने अपनी आंखों से आसमान से मिसाइल को गिरती हुई भी देखी। 25 फरवरी को उसने व साथियों ने 7 घंटे लाईन में लगकर अपना-अपना सारा कैश ले लिया। रोमानिया के बॉर्डर पर -6 डिग्री सेल्सियस में उन्होनें 72 घंटें खड़े रहकर खुले आसमान के नीचे गुजारे। स्वदेश लोटने का जज्बा तथा परिजनों व रिश्तेदारों द्वारा बढ़ाए गए हौसले ने उनकी हिम्मत को नही टूटने दिया।
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शुक्रवार को सुबह करीब साढ़े सात बजें उनकी फ्लाईट स्वदेश पहुंची। परिजनों के बीच पहुंचे हर्ष की खुशी का ठिकाना नही है। हर्ष ने बताया कि वह यही से यूक्रेन में फंसे अपने अन्य साथियों को भी वहां से निकलवाने का प्रयास कर रहे है। उनकी हिम्मत व हौसला बढ़ा रहे है। हर्ष ने बताया कि उसका एमबीबीएस का तीसरा वर्ष है। आगे पढ़ाई का क्या होगा कुछ पता नही है। जीवन है तो सब कुछ है। आगे भी बेहतर प्रयास किए जा सकते है। इस मौके पर हर्ष की माता अलका, पिता अनुज, भाई आकर्ष के अलावा पड़ोसी आशीष व चिराग सहित कई रिश्तेदार मौजूद रहे।
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