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Muzaffarnagar News: तेजी से फैल रही आंखों में ग्लॉकोमा बीमारी, मिले 35 मरीज
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फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। ग्लॉकोमा (काला मोतियाबिंद) के लिए जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से विशेष अभियान चलाया गया है। इसके लिए जिला अस्पताल, सीएचसी व पीएचसी पर पहुंचने वाले मरीजों की स्क्रीनिंग की जा रही है। पांच दिनों में ग्लॉकोमा के 35 मरीज सामने आए, जिन्हें रेफर किया गया।
आंखों की सबसे खतरनाक बीमारी ग्लॉकोमा लोगों में तेजी से बढ़ रही है। एसीएमओ डॉ. दिव्या वर्मा ने बताया कि ग्लॉकोमा के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से विशेष अभियान चलाया गया है। इसके तहत ग्लॉकोमा के मरीजों की स्क्रीनिंग की जा रही है। पॉजीटिव पाए जाने वाले मरीजों को उपचार के लिए मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज और मेरठ मेडिकल के लिए रेफर किया जाता है। उन्होंने बताया कि 12 से 16 मार्च तक, पांच दिनों में पूरे जनपद में 537 मरीजों की स्क्रीनिंग की गई। इनमें से 35 मरीजों में ग्लॉकोमा पाया गया, जिन्हें उपचार के लिए रेफर कर दिया गया है।
स्वामी कल्याण देव जिला चिकित्सालय में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेम ने बताया कि ग्लॉकोमा का इलाज जिला चिकित्सालय में नहीं है। यह ऐसी बीमारी है, जिसके लिए पूरे जीवन दवा खानी पड़ती है। इस बीमारी का खतरा उन बच्चों को रहता है, जिनके माता पिता इससे पीड़ित हों। उन्हें समय-समय पर अपनी आंखों के प्रेशर और नसों की जांच करानी चाहिए। यह हाई ब्लड प्रेशर वाले मरीज को भी होने का खतरा रहता है। इससे आंखों की नसें डैमेज हो जाती हैं। दवा से काम न चलने पर इसका ऑपरेशन किया जाता है। हालांकि ऑपरेशन से केवल आगामी खतरे को रोका जा सकता है, ठीक नहीं किया जा सकता।
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इनसेट
यह है ग्लॉकोमा के लक्षण
-आंखों में दर्द रहना
-आंखों में भारीपन रहना
-नजदीक चश्मे जल्दी-जल्दी बदलना
-साइड का दिखाई ना देना
-आंखों में सूजन रहना
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। ग्लॉकोमा (काला मोतियाबिंद) के लिए जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से विशेष अभियान चलाया गया है। इसके लिए जिला अस्पताल, सीएचसी व पीएचसी पर पहुंचने वाले मरीजों की स्क्रीनिंग की जा रही है। पांच दिनों में ग्लॉकोमा के 35 मरीज सामने आए, जिन्हें रेफर किया गया।
आंखों की सबसे खतरनाक बीमारी ग्लॉकोमा लोगों में तेजी से बढ़ रही है। एसीएमओ डॉ. दिव्या वर्मा ने बताया कि ग्लॉकोमा के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से विशेष अभियान चलाया गया है। इसके तहत ग्लॉकोमा के मरीजों की स्क्रीनिंग की जा रही है। पॉजीटिव पाए जाने वाले मरीजों को उपचार के लिए मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज और मेरठ मेडिकल के लिए रेफर किया जाता है। उन्होंने बताया कि 12 से 16 मार्च तक, पांच दिनों में पूरे जनपद में 537 मरीजों की स्क्रीनिंग की गई। इनमें से 35 मरीजों में ग्लॉकोमा पाया गया, जिन्हें उपचार के लिए रेफर कर दिया गया है।
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स्वामी कल्याण देव जिला चिकित्सालय में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेम ने बताया कि ग्लॉकोमा का इलाज जिला चिकित्सालय में नहीं है। यह ऐसी बीमारी है, जिसके लिए पूरे जीवन दवा खानी पड़ती है। इस बीमारी का खतरा उन बच्चों को रहता है, जिनके माता पिता इससे पीड़ित हों। उन्हें समय-समय पर अपनी आंखों के प्रेशर और नसों की जांच करानी चाहिए। यह हाई ब्लड प्रेशर वाले मरीज को भी होने का खतरा रहता है। इससे आंखों की नसें डैमेज हो जाती हैं। दवा से काम न चलने पर इसका ऑपरेशन किया जाता है। हालांकि ऑपरेशन से केवल आगामी खतरे को रोका जा सकता है, ठीक नहीं किया जा सकता।
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यह है ग्लॉकोमा के लक्षण
-आंखों में दर्द रहना
-आंखों में भारीपन रहना
-नजदीक चश्मे जल्दी-जल्दी बदलना
-साइड का दिखाई ना देना
-आंखों में सूजन रहना