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405 गांवों में शुरू हुआ घरौनी बनाने का कार्य
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405 गांवों में शुरू हुआ घरौनी बनाने का कार्य
मुजफ्फरनगर। जिले में संपत्ति कार्ड बनाने की योजना पर काम शुरू हो गया है। 405 गांवों में घरौनी (ग्रामीण आवासीय अभिलेख) बनाने का कार्य चल रहा है। लेखपाल अब तक इन गांवों के 94 हजार 415 लोगों का डाटा एकत्र कर चुके हैं।
सर्वे ऑफ इंडिया के निर्देश पर जिला प्रशासन गांवों में आबादी का डाटा एकत्र कर रहा है। गांव में किस व्यक्ति के पास कितनी जमीन है, इसका डाटा लेखपाल तैयार कर रहे हैं। परिवार में जमीन में किसका कितना हिस्सा है यह भी तैयार हो रहा है। यह प्रक्रिया गांवों में स्थित प्रापर्टी के मालिकाना हक से जुड़ी है। कृषि भूमि पर तो पहले से ही नाम दर्ज रहते हैं, लेकिन गांवों में आबादी की भूमि में समस्या रहती है।
संपत्ति का रिकार्ड बन जाने से गांवों में भी आम आदमी घर बनाने के लिए लोन ले सकेगा। लेखपालों द्वारा सर्वे किए जाने के बाद ड्रोन कैमरे के माध्यम से गांव की आबादी का नक्शा तैयार किया जाएगा। जिले में कुल 728 गांव हैं। तहसीलों ने जो सर्वे का काम शुरू किया है, उसमें अब तक 405 गांवों में सर्वे प्रारंभ हो पाया है।
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94 हजार 415 परिवारों का डाटा एकत्र किया गया है। इसमें सदर तहसील के 126 गांवों में 29940 परिवारों का डाटा तैयार हुआ है। तहसील खतौली के 99 गांवों के 19470 परिवारों का डाटा लिया जा चुका है। जानसठ के 110 गांवों के 24804 लोगों को रिकार्डबद्ध किया जा चुका है।
बुढ़ाना के 70 गांवों के 20200 लोगों को रिकार्ड एकत्र हो गया है। कार्य में निरंतर तेजी लाई जा रही है। बुढ़ाना के एसडीएम कुमार भूूपेंद्र ने बताया कि एक गांव का पूर्ण डाटा तैयार होने के बाद ड्रोन कैमरे के माध्यम से उसका नक्शा तैयार किया जाएगा। प्रत्येक तहसील में 20-20 गांव फाइनल स्थिति में है। जल्द ही इन गांवों में संपत्ति कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
संपत्ति कार्ड के होंगे लाभ
- घर के सभी बालिग सदस्यों के संपत्ति कार्ड बनाए जाएंगे।
- संपत्ति कार्ड में उसकी संपत्ति का ब्योरा दिया जाएगा
- संपत्ति कार्ड से ग्रामीण अब बैंक से होम लोन भी ले सकेंगे।
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मुजफ्फरनगर। जिले में संपत्ति कार्ड बनाने की योजना पर काम शुरू हो गया है। 405 गांवों में घरौनी (ग्रामीण आवासीय अभिलेख) बनाने का कार्य चल रहा है। लेखपाल अब तक इन गांवों के 94 हजार 415 लोगों का डाटा एकत्र कर चुके हैं।
सर्वे ऑफ इंडिया के निर्देश पर जिला प्रशासन गांवों में आबादी का डाटा एकत्र कर रहा है। गांव में किस व्यक्ति के पास कितनी जमीन है, इसका डाटा लेखपाल तैयार कर रहे हैं। परिवार में जमीन में किसका कितना हिस्सा है यह भी तैयार हो रहा है। यह प्रक्रिया गांवों में स्थित प्रापर्टी के मालिकाना हक से जुड़ी है। कृषि भूमि पर तो पहले से ही नाम दर्ज रहते हैं, लेकिन गांवों में आबादी की भूमि में समस्या रहती है।
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संपत्ति का रिकार्ड बन जाने से गांवों में भी आम आदमी घर बनाने के लिए लोन ले सकेगा। लेखपालों द्वारा सर्वे किए जाने के बाद ड्रोन कैमरे के माध्यम से गांव की आबादी का नक्शा तैयार किया जाएगा। जिले में कुल 728 गांव हैं। तहसीलों ने जो सर्वे का काम शुरू किया है, उसमें अब तक 405 गांवों में सर्वे प्रारंभ हो पाया है।
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94 हजार 415 परिवारों का डाटा एकत्र किया गया है। इसमें सदर तहसील के 126 गांवों में 29940 परिवारों का डाटा तैयार हुआ है। तहसील खतौली के 99 गांवों के 19470 परिवारों का डाटा लिया जा चुका है। जानसठ के 110 गांवों के 24804 लोगों को रिकार्डबद्ध किया जा चुका है।
बुढ़ाना के 70 गांवों के 20200 लोगों को रिकार्ड एकत्र हो गया है। कार्य में निरंतर तेजी लाई जा रही है। बुढ़ाना के एसडीएम कुमार भूूपेंद्र ने बताया कि एक गांव का पूर्ण डाटा तैयार होने के बाद ड्रोन कैमरे के माध्यम से उसका नक्शा तैयार किया जाएगा। प्रत्येक तहसील में 20-20 गांव फाइनल स्थिति में है। जल्द ही इन गांवों में संपत्ति कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
संपत्ति कार्ड के होंगे लाभ
- घर के सभी बालिग सदस्यों के संपत्ति कार्ड बनाए जाएंगे।
- संपत्ति कार्ड में उसकी संपत्ति का ब्योरा दिया जाएगा
- संपत्ति कार्ड से ग्रामीण अब बैंक से होम लोन भी ले सकेंगे।