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पूर्व राष्ट्रपति को भाते थे मीरापुर के पेडे व गुड़
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पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भाते थे मीरापुर के पेड़े व गुड़
मुजफ्फरनगर। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी कभी मुजफ्फरनगर नहीं आए, लेकिन जनपद के इतिहास पर आधारित लेखक अली जाफर जैदी की किताब ‘इंकशाफ-ए-हकीकत’ का उन्होंने विमोचन किया था। पूर्व राष्ट्रपति को जनपद का गुड़ और कस्बा मीरापुर के पेड़े बहुत भाते थे। सपा नेता शबाब जैदी के बुलावे पर वे जनपद में आने के लिए उत्सुक थे, लेकिन कोविड-19 ने उनकी राह रोक ली थी।
सपा सरकार में संगीत-नाट्य अकादमी के सदस्य रहे शबाब जैदी पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को अपना राजनीतिक गुरु मानते हैं। वे अक्सर पूर्व राष्ट्रपति से मिलने नई दिल्ली जाते रहते थे। पूर्व राष्ट्रपति ने शबाब जैदी के ताया अली जाफर जैदी द्वारा लिखित मुजफ्फरनगर के इतिहास पर आधारित किताब ‘इंकशाफ-ए-हकीकत’ का भी अपने आवास पर मार्च 2019 में विमोचन किया था। बकौल शबाब जैदी, पूर्व राष्ट्रपति को मुजफ्फरनगर का गुड़ और कस्बा मीरापुर के पेड़े बहुत भाते थे। वे अंतिम बार फरवरी 2020 में पूर्व राष्ट्रपति से मिले थे, जिन्होंने मुजफ्फरनगर आने की इच्छा भी जाहिर की थी। हालांकि अगले ही महीने कोविड-19 के चलते लॉकडाउन लगने के कारण उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी।
मुखर्जी का नाम मेरे जीवन से जुड़ गया: यादव
मुजफ्फरनगर। पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने मेरे जीवन से हमेशा के लिए जुड़ गए हैं। उनके जाने का मुझे बहुत गम है। यह कहना है डीएवी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य शिव कुमार यादव का।
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प्रधानाचार्य यादव कहते हैं कि 2012 में पांच सितंबर का दिन मेरे लिए बहुत ही गौरव भरा था। इस दिन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने मुझे अपने हाथों से शिक्षा के क्षेत्र में मेरे कार्यों के लिए मुझे पुरस्कार दिया। एक शिक्षक के लिए इससे बड़ा कोई सम्मान नहीं होता। राष्ट्रपति पुरस्कार पाकर मैं खुश था। उनके हाथ से दिया गया यह पुरस्कार मेरे जीवन से जुड़ गया है। उनके जाने का मुझे बेहद गम है। वह बहुत की सादगी वाले इंसान थे। मेरे कॉलेज और मेरे घर पर उनके साथ मेरा फोटो हमेशा प्रणव मुखर्जी की याद दिलाता रहेगा।
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मुजफ्फरनगर। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी कभी मुजफ्फरनगर नहीं आए, लेकिन जनपद के इतिहास पर आधारित लेखक अली जाफर जैदी की किताब ‘इंकशाफ-ए-हकीकत’ का उन्होंने विमोचन किया था। पूर्व राष्ट्रपति को जनपद का गुड़ और कस्बा मीरापुर के पेड़े बहुत भाते थे। सपा नेता शबाब जैदी के बुलावे पर वे जनपद में आने के लिए उत्सुक थे, लेकिन कोविड-19 ने उनकी राह रोक ली थी।
सपा सरकार में संगीत-नाट्य अकादमी के सदस्य रहे शबाब जैदी पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को अपना राजनीतिक गुरु मानते हैं। वे अक्सर पूर्व राष्ट्रपति से मिलने नई दिल्ली जाते रहते थे। पूर्व राष्ट्रपति ने शबाब जैदी के ताया अली जाफर जैदी द्वारा लिखित मुजफ्फरनगर के इतिहास पर आधारित किताब ‘इंकशाफ-ए-हकीकत’ का भी अपने आवास पर मार्च 2019 में विमोचन किया था। बकौल शबाब जैदी, पूर्व राष्ट्रपति को मुजफ्फरनगर का गुड़ और कस्बा मीरापुर के पेड़े बहुत भाते थे। वे अंतिम बार फरवरी 2020 में पूर्व राष्ट्रपति से मिले थे, जिन्होंने मुजफ्फरनगर आने की इच्छा भी जाहिर की थी। हालांकि अगले ही महीने कोविड-19 के चलते लॉकडाउन लगने के कारण उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी।
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मुखर्जी का नाम मेरे जीवन से जुड़ गया: यादव
मुजफ्फरनगर। पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने मेरे जीवन से हमेशा के लिए जुड़ गए हैं। उनके जाने का मुझे बहुत गम है। यह कहना है डीएवी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य शिव कुमार यादव का।
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प्रधानाचार्य यादव कहते हैं कि 2012 में पांच सितंबर का दिन मेरे लिए बहुत ही गौरव भरा था। इस दिन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने मुझे अपने हाथों से शिक्षा के क्षेत्र में मेरे कार्यों के लिए मुझे पुरस्कार दिया। एक शिक्षक के लिए इससे बड़ा कोई सम्मान नहीं होता। राष्ट्रपति पुरस्कार पाकर मैं खुश था। उनके हाथ से दिया गया यह पुरस्कार मेरे जीवन से जुड़ गया है। उनके जाने का मुझे बेहद गम है। वह बहुत की सादगी वाले इंसान थे। मेरे कॉलेज और मेरे घर पर उनके साथ मेरा फोटो हमेशा प्रणव मुखर्जी की याद दिलाता रहेगा।