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Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर - एक हजार के जुर्माने में सेशन कोर्ट से पूर्व विधायक दोषमुक्त
Wed, 17 Jan 2024 03:00 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 17 Jan 2024 03:00 AM IST
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- विधानसभा चुनाव 2017 के नामांकन के दौरान आचार संहिता के उल्लंघन का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। विधानसभा चुनाव 2017 के नामांकन के दौरान आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में भाजपा के पूर्व विधायक उमेश मलिक पर लगाए गए एक हजार रुपये के जुर्माने में सेशन कोर्ट ने पूर्व विधायक को दोषमुक्त करार दिया है। बचाव पक्ष ने निचली अदालत के फैसले को सेशन कोर्ट में चुनौती दी थी।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता श्यामवीर सिंह ने बताया कि भाजपा ने 2017 के चुनाव में बुढ़ाना विधानसभा सीट से उमेश मलिक को प्रत्याशी घोषित किया था। 21 जनवरी 2017 को नामांकन दाखिल करने के लिए भाजपा प्रत्याशी थाना सिविल लाइंस क्षेत्र में महावीर चौक से कलक्ट्रेट के प्रकाश चौक गेट की तरफ पहुंचे थे। इस मामले में पुलिस ने धारा 144 के उल्लंघन में परिवाद दाखिल किया था। प्रकरण की सुनवाई विशेष न्यायालय (एमपी/एमएलए कोर्ट) के पीठासीन अधिकारी मयंक जायसवाल ने करते हुए पिछले साल जुलाई में विधायक पर एक हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी।
निचली अदालत के फैसले को बचाव पक्ष ने सेशन कोर्ट में चुनौती दी। प्रकरण की सुनवाई एडीजे-3 के पीठासीन अधिकारी गोपाल उपाध्याय ने की। बचाव पक्ष ने बताया कि पूर्व विधायक को दोषमुक्त करार दिया गया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। विधानसभा चुनाव 2017 के नामांकन के दौरान आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में भाजपा के पूर्व विधायक उमेश मलिक पर लगाए गए एक हजार रुपये के जुर्माने में सेशन कोर्ट ने पूर्व विधायक को दोषमुक्त करार दिया है। बचाव पक्ष ने निचली अदालत के फैसले को सेशन कोर्ट में चुनौती दी थी।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता श्यामवीर सिंह ने बताया कि भाजपा ने 2017 के चुनाव में बुढ़ाना विधानसभा सीट से उमेश मलिक को प्रत्याशी घोषित किया था। 21 जनवरी 2017 को नामांकन दाखिल करने के लिए भाजपा प्रत्याशी थाना सिविल लाइंस क्षेत्र में महावीर चौक से कलक्ट्रेट के प्रकाश चौक गेट की तरफ पहुंचे थे। इस मामले में पुलिस ने धारा 144 के उल्लंघन में परिवाद दाखिल किया था। प्रकरण की सुनवाई विशेष न्यायालय (एमपी/एमएलए कोर्ट) के पीठासीन अधिकारी मयंक जायसवाल ने करते हुए पिछले साल जुलाई में विधायक पर एक हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी।
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निचली अदालत के फैसले को बचाव पक्ष ने सेशन कोर्ट में चुनौती दी। प्रकरण की सुनवाई एडीजे-3 के पीठासीन अधिकारी गोपाल उपाध्याय ने की। बचाव पक्ष ने बताया कि पूर्व विधायक को दोषमुक्त करार दिया गया है।
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