फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   Five years of Muzaffarnagar riots - 1

दंगे का दर्द भूलने लगे पीड़ित, अपने-अपने गांवों में करते हैं मजदूरी कार्य

Fri, 07 Sep 2018 12:21 AM IST
अमर उजाला/ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला/ब्यूरो, मुजफ्फरनगर Updated Fri, 07 Sep 2018 12:21 AM IST
विज्ञापन
Five years of Muzaffarnagar riots - 1
गांव में मजदूरी करता युवक। - फोटो : अमर उजाला
सात सितंबर 2013 को जनपद में भड़की दंगे की लपटों की चपेट में गठवाला खाप क्षेत्र के गांव भी आ गए थे। लांक, बहावडी, लिसाढ़, फुगाना व खरड़ में हत्या आगजनी आदि की घटनाएं हुई थी। बीतते जा रहे वक्त के साथ-साथ पीड़ित भी उस दर्द को भूलते जा रहे हैं। दंगे के कारण गांव छोड़कर बाहर गए लोग वापस अपने-अपने गांवों में मजदूरी व चिनाई आदि के कार्यों में काम करने आते हैं।  फुगाना गांव में रहने वाले शकूरा तथा खरड़ गांव के साजिद व नाजिम आदि का कहना है कि वे बेफिक्र गांव में रहते हैं। गांव वालों के कहने पर वे रुक गए थे। वे अपने-अपने स्थानों पर खुश हैं।
विज्ञापन

 
पांच वर्ष पहले जिले में हुए सांप्रदायिक दंगे के दौरान फुगाना गांव में इस्लाम शेख पुत्र न्यादर तथा आशु लोहार की मौत हो गई थी। भय के कारण गांव के सभी मुसलमान अपने-अपने घर छोड़कर शिविरों में चले गए थे। फुगाना गांव में शकूरा लोहार व हमीद तेली का परिवार गांव में ही रह गया था। पूर्व प्रधान थाम सिंह तथा वर्तमान प्रधान जितेंद्र मलिक का कहना है कि उन्होंने गांव वालों को वापस लाने का बहुत प्रयास किया, लेकिन कोई नहीं आया। शकूरा व हमीद का परिवार गांव में बेफिक्र रह रहे हैं।
विज्ञापन


उनके दुख दर्द में सभी ग्रामीण शामिल होते हैं। विवाह आदि में उन्हें अपने यहां दावत पर भी बुलाते हैं। ग्राम प्रधान ने बताया कि उनके गांव से जाने वाले परिवार अब गांव में बेफिक्र मजदूरी कार्यों में आने लगे हैं। मकानों के निर्माण कार्यों से लेकर खेत के कार्यों में भी मजदूरी करने आते हैं। दोनों समुदाय के लोग दंगे के दर्द को भूलने लगे हैं। गठवाला खाप के खरड़ गांव में सगीर की दंगे के दौरान मौत हो गई थी। खरड़ गांव सेेे भी कई परिवार बाहर चले गए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


साजिद पुत्र खलील तथा नाजिम पुत्र हकीमू आदि के परिवार आज भी गांव में किसानों के सभी कार्य करते हैं। गांव वालों के रोकने पर वे गांव में रुक गए थे, जो विश्वास गांव वालों ने दिलाया था वह विश्वास आज भी कायम है। खरड गांव के ही नहीं पूरे गठवाला क्षेत्र के ग्रामीण उनके पास काम करवाने आते हैं। वे अपने गांव में खुश हैं।

खरड़ गांव की महिला प्रधान अलका के पति नितिन मलिक का कहना है कि उन्होंने गांव से जाने वालों को वापस बुलाने का बहुत प्रयास किया। वे वापस तो नहीं आए, लेकिन मजदूरी के कार्यों मेें बुलाने पर सहर्ष गांव में आ जाते हैं। गांव वालों के साथ सबके ठीक संबंध है। दंगे के उस दर्द को समय बीतने के साथ-साथ सब भूलते जा रहे हैं। 

विभिन्न कालोनियों में रह रहे हैं दंगा पीडित  
सांप्रदायिक दंगे की आग की चपेट में आए गठवाला खाप के गांव फुगाना, खरड, लांक, बहावड़ी व लिसाढ़ के दंगा पीडित ग्रामीण विभिन्न स्थानों पर बनी कालोनियों में रह रहे हैं। कालोनियों में रहने वाले सभी परिवार अपने-अपने गांवों से अपने घर व जमीन आदि बेचकर चले गए। दंगा पीडित कालोनियों में रहने वाले इन परिवारों के लोगों का अपने गांवों में आना जाना आरंभ हो गया है।  

सात सितंबर 2013 में भड़के दंगे के कारण गठवाला खाप के कई गांवों में आगजनी, हत्या आदि के घटनाएं हुई थी। दंगे के भय के कारण पहले पीडित परिवार क्षेत्र के गांव जौला, लोई, बुढ़ाना, जोगियाखेड़ा आदि गांवों में प्रशासन व विभिन्न संस्थाओं द्वारा लगाए गए राहत शिविरों में चले गए थे। बाद में धीरे-धीरे सरकार द्वारा मुआवजा मिलने के बाद तथा गांव के अपने घर बार बेचकर दंगा पीड़ितों ने कस्बा शहर तथा दंगा पीड़ित कालोनियों में अपने आशियाने बना लिए।


गांव लोई, परासौली, जोगियाखेड़ा, सराय, जौला आदि स्थानों पर विभिन्न संस्थाओं द्वारा दंगा पीड़ितों के लिए कालोनी बनाकर उनमें आवास आवंटित किए गए। दंगा पीड़ित सभी लोग विभिन्न स्थानों पर बनी कालोनियों में रह रहे हैं। वे कस्बे व देहात तक मजदूरी कार्य करने के लिए जाते हैं। इस क्षेत्र में किसी भी समुदाय के लोग को एक दूसरे का भय नहीं सताता। सभी लोग पूर्व की भांति अपने-अपने आशियाने बनाकर  रह रहे हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed