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बोले जिला विद्यालय निरीक्षक, प्रयोगात्मक कार्यों के बिना शिक्षा अधूरी
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बोले जिला विद्यालय निरीक्षक, प्रयोगात्मक कार्यों के बिना शिक्षा अधूरी
मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय विज्ञान एवं संचार परिषद विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार के तत्वाधान में प्रगति विज्ञान संस्था द्वारा राजकीय इंटर कॉलेज में पांच दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन अध्यापकों को टीएलएम बनाने का प्रशिक्षण दिया गया।
विज्ञान की कार्यशाला में जिला विद्यालय निरीक्षक गजेंद्र कुमार ने कहा कि विज्ञान या अन्य किसी भी विषय का शिक्षण रोजमर्रा के जीवन से जोड़ कर ही कराया जा सकता है। प्रयोगात्मक कार्यों के बिना शिक्षा अधूरी है। कार्यक्रम प्रभारी दीपक शर्मा ने वृक्षों का बार कोड बनाकर उनकी आयु ज्ञात करना, प्रकाश के अपवर्तन, परावर्तन, गुरुत्वाकर्षण, ध्वनि आदि विषयों को सरल बनाने के लिए आवश्यक उपकरण बनाने की ट्रेनिंग शिक्षकों को दी। प्रधानाचार्य डॉ विकास कुमार ने विज्ञान कहानी, वैज्ञानिकों की जीवनी, विज्ञान नाटिका लेखन के उदाहरण प्रस्तुत कर जीरो इंनवेस्टमेंट मॉडल बनाने पर जोर दिया गया।
कार्यशाला में विभिन्न माध्यमिक विद्यालयों के 40 से अधिक शिक्षक शिक्षिकाओं ने प्रतिभाग किया। सतेंद्र कुमार, मदन गोपाल, रेणु आदि का सहयोग रहा। कार्यक्रम का संचालन डॉ विकास शर्मा ने किया।
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मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय विज्ञान एवं संचार परिषद विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार के तत्वाधान में प्रगति विज्ञान संस्था द्वारा राजकीय इंटर कॉलेज में पांच दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन अध्यापकों को टीएलएम बनाने का प्रशिक्षण दिया गया।
विज्ञान की कार्यशाला में जिला विद्यालय निरीक्षक गजेंद्र कुमार ने कहा कि विज्ञान या अन्य किसी भी विषय का शिक्षण रोजमर्रा के जीवन से जोड़ कर ही कराया जा सकता है। प्रयोगात्मक कार्यों के बिना शिक्षा अधूरी है। कार्यक्रम प्रभारी दीपक शर्मा ने वृक्षों का बार कोड बनाकर उनकी आयु ज्ञात करना, प्रकाश के अपवर्तन, परावर्तन, गुरुत्वाकर्षण, ध्वनि आदि विषयों को सरल बनाने के लिए आवश्यक उपकरण बनाने की ट्रेनिंग शिक्षकों को दी। प्रधानाचार्य डॉ विकास कुमार ने विज्ञान कहानी, वैज्ञानिकों की जीवनी, विज्ञान नाटिका लेखन के उदाहरण प्रस्तुत कर जीरो इंनवेस्टमेंट मॉडल बनाने पर जोर दिया गया।
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कार्यशाला में विभिन्न माध्यमिक विद्यालयों के 40 से अधिक शिक्षक शिक्षिकाओं ने प्रतिभाग किया। सतेंद्र कुमार, मदन गोपाल, रेणु आदि का सहयोग रहा। कार्यक्रम का संचालन डॉ विकास शर्मा ने किया।
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