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गठबंधन पर अंतिम निर्णय जनवरी के अंत तक: अजित सिंह
Fri, 21 Dec 2018 12:32 AM IST
Deepak Kausik
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Published by: Deepak Kausik
Updated Fri, 21 Dec 2018 12:32 AM IST
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पत्रकारों से वार्ता करते चौधरी अजित सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
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रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने महागठबंधन के सवाल पर कहा कि अंतिम निर्णय जनवरी के अंत तक ही हो पाएगा। कांग्रेस को साथ लेने के सवाल को वह टाल गए। किसानों के कर्ज माफ नहीं करने के आरबीआई गवर्नर के बयान को अजित सिंह ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया। राफेल पर सरकार को क्लीनचिट देने पर उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कोई जांच एजेंसी नहीं है। इसकी जांच जेपीसी से होनी चाहिए। उन्होंने गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाने पर प्रदेश सरकार को घेरा।
मेरठ रोड स्थित लोक निर्माण विभाग के डाक बंगले पर पत्रकारों से वार्ता में रालोद अध्यक्ष अजित सिंह ने कहा कि देश में माहौल बदल रहा है। तीन महीने पहले तक जो हमारी बात सुनने को तैयार नहीं था, अब वह सरकार के प्रति खुद नाराजगी व्यक्त कर रहा है। पांच राज्यों के चुनाव ने यह संकेत दे भी दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा को हराने के लिए सभी विपक्षी दल एक हैं। आपस में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन भाजपा के सवाल पर कोई भेद नहीं है। रीजनल पार्टियों का अपना महत्व है, इसे नकारा नहीं जा सकता। महागठबंधन में सभी क्षेत्रीय पार्टियां शामिल होनी चाहिए।
प्रदेश में गठबंधन को लेकर अंतिम निर्णय जनवरी के अंत तक ही हो पाएगा, तभी सीटों का बंटवारा भी होगा। उन्होंने कहा कि इतना तय है कि बसपा, सपा और रालोद में गठबंधन होगा। कांग्रेस को गठबंधन में शामिल करने के सवाल पर वह कुछ नहीं बोले। आरबीआई गवर्नर के किसानों का कर्ज माफ नहीं करने के बयान को उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताया। कहा कि उद्यमियों का कर्ज माफ हो सकता है किसानों का नहीं। बुलंदशहर की घटना को उन्होंने साजिश बताते हुए कहा कि एक प्लान के तहत घटना को अंजाम दिया गया। जनता साजिश को समझ गई और विफल कर दिया।
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छोटे चौधरी ने कहा कि गन्ने की उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। प्रदेश सरकार ने लागत बढ़ने के बाद भी दाम में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। राफेल को लेकर केंद्र सरकार को क्लीनचिट देने के सवाल पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट कोई जांच एजेंसी नहीं है। राफेल सौदे की जांच जेपीसी से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीति दृष्टि से मुजफ्फरनगर महत्वपूर्ण जनपद है। वह भाजपा को यहीं से पटखनी देने के लिए माहौल तैयार कर रहे हैं। पश्चिम के वह सभी जिलों में दौरा कर रहे हैं। भाईचारा स्थापित करने का काम किया जा रहा है।
मुजफ्फरनगर से चुनाव लड़ने के सवाल को वे टाल गए, कहा कि जनता जहां से चाहेगी, उन्हें से चुनाव लड़ा जाएगा। इस अवसर पर राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक चंद त्यागी, पूर्व मंत्री धर्मवीर बालियान, योगराज सिंह, पूर्व विधायक मुश्ताक चौधरी, नवाजिश आलम, जिलाध्यक्ष अजीत राठी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रमा नागर, प्रदेश प्रवक्ता सुनील रोहटा, सुधीर भारतीय, राहुल राणा, अभिषेक चौधरी, धर्मेंद्र तोमर, संजय राठी, कृष्णपाल फौजी, पराग चौधरी, विदित मलिक आदि मौजूद रहे।
अभी मायावती से आमने-सामने वार्ता नहीं हुई
मुजफ्फरनगर। प्रदेश सपा-बसपा और रालोद के गठबंधन की बात तेजी के साथ चल रही है। एक आश्चर्यजनक बात यह है कि रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह और बसपा सुप्रीमो मायावती की आज तक कभी भी आमने-सामने बैठकर कोई बात नहीं हुई है। मध्यस्थता से ही बातचीत चल रही है। एक सवाल के जवाब में चौधरी अजित सिंह ने खुद स्वीकार किया कि बहन जी से उनकी कभी भी सीधे बातचीत नहीं हुई है।
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मेरठ रोड स्थित लोक निर्माण विभाग के डाक बंगले पर पत्रकारों से वार्ता में रालोद अध्यक्ष अजित सिंह ने कहा कि देश में माहौल बदल रहा है। तीन महीने पहले तक जो हमारी बात सुनने को तैयार नहीं था, अब वह सरकार के प्रति खुद नाराजगी व्यक्त कर रहा है। पांच राज्यों के चुनाव ने यह संकेत दे भी दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा को हराने के लिए सभी विपक्षी दल एक हैं। आपस में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन भाजपा के सवाल पर कोई भेद नहीं है। रीजनल पार्टियों का अपना महत्व है, इसे नकारा नहीं जा सकता। महागठबंधन में सभी क्षेत्रीय पार्टियां शामिल होनी चाहिए।
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प्रदेश में गठबंधन को लेकर अंतिम निर्णय जनवरी के अंत तक ही हो पाएगा, तभी सीटों का बंटवारा भी होगा। उन्होंने कहा कि इतना तय है कि बसपा, सपा और रालोद में गठबंधन होगा। कांग्रेस को गठबंधन में शामिल करने के सवाल पर वह कुछ नहीं बोले। आरबीआई गवर्नर के किसानों का कर्ज माफ नहीं करने के बयान को उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताया। कहा कि उद्यमियों का कर्ज माफ हो सकता है किसानों का नहीं। बुलंदशहर की घटना को उन्होंने साजिश बताते हुए कहा कि एक प्लान के तहत घटना को अंजाम दिया गया। जनता साजिश को समझ गई और विफल कर दिया।
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छोटे चौधरी ने कहा कि गन्ने की उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। प्रदेश सरकार ने लागत बढ़ने के बाद भी दाम में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। राफेल को लेकर केंद्र सरकार को क्लीनचिट देने के सवाल पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट कोई जांच एजेंसी नहीं है। राफेल सौदे की जांच जेपीसी से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीति दृष्टि से मुजफ्फरनगर महत्वपूर्ण जनपद है। वह भाजपा को यहीं से पटखनी देने के लिए माहौल तैयार कर रहे हैं। पश्चिम के वह सभी जिलों में दौरा कर रहे हैं। भाईचारा स्थापित करने का काम किया जा रहा है।
मुजफ्फरनगर से चुनाव लड़ने के सवाल को वे टाल गए, कहा कि जनता जहां से चाहेगी, उन्हें से चुनाव लड़ा जाएगा। इस अवसर पर राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक चंद त्यागी, पूर्व मंत्री धर्मवीर बालियान, योगराज सिंह, पूर्व विधायक मुश्ताक चौधरी, नवाजिश आलम, जिलाध्यक्ष अजीत राठी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रमा नागर, प्रदेश प्रवक्ता सुनील रोहटा, सुधीर भारतीय, राहुल राणा, अभिषेक चौधरी, धर्मेंद्र तोमर, संजय राठी, कृष्णपाल फौजी, पराग चौधरी, विदित मलिक आदि मौजूद रहे।
अभी मायावती से आमने-सामने वार्ता नहीं हुई
मुजफ्फरनगर। प्रदेश सपा-बसपा और रालोद के गठबंधन की बात तेजी के साथ चल रही है। एक आश्चर्यजनक बात यह है कि रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह और बसपा सुप्रीमो मायावती की आज तक कभी भी आमने-सामने बैठकर कोई बात नहीं हुई है। मध्यस्थता से ही बातचीत चल रही है। एक सवाल के जवाब में चौधरी अजित सिंह ने खुद स्वीकार किया कि बहन जी से उनकी कभी भी सीधे बातचीत नहीं हुई है।