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जूनियर इंजीनियरों पर डेढ़ करोड़ फर्जी बिल बनाने का दबाव बना रहा एसडीओ
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 02 Mar 2017 12:17 AM IST
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एसडीओ के खिलाफ नारेबाजी करते जूनियर इंजीनियर।
- फोटो : अमर उजाला
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सिंचाई विभाग में चल रहे फर्जीवाड़े की जांच को शासन ने मुख्य अभियंता गंगा एसके शर्मा की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की है। बुधवार को कमेटी के सामने जूनियर इंजीनियरों ने एसडीओ जयपाल के खिलाफ प्रदर्शन किया। एसडीओ पर डेढ़ करोड़ के फर्जी बिल तैयार कराने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया। वहीं ठेकेदार भी जांच कमेटी से मिले और अपनी समस्या बताई।
सिंचाई विभाग में इस समय हाईप्रोफाइल ड्रामा चल रहा है। ड्रेनेज खंड के एसडीओ जयपाल ने अधिशासी अभियंता केपी सिंह की शिकायत की है कि उन्होंने मानक के अनुसार काम नहीं किया। वहीं जूनियर इंजीनियरों को आरोप है कि एसडीओ जयपाल पर चार जगह बरेली, मुजफ्फरनगर, बड़ौत और शामली का चार्ज है। एसडीओ अपने क्षेत्र के जेई पर फर्जी बिल बनाने का दबाव बनाता है। चारों स्थानों पर यही समस्या है।
जेई प्रमुख अभियंता सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग को लिखकर भेज चुके हैं कि वह एसडीओ जयपाल के साथ काम नहीं कर सकते। यहां तक आरोप लगाया कि डेढ़ करोड़ के फर्जी बिल बनवाने के लिए जूनियर इंजीनियरों को प्रताड़ित कर रहा है। ठेकेदारों से कमीशन के रूप में एक करोड़ से ज्यादा एडवांस वसूल चुका है। इन सब मामलों की जांच करने के लिए बुधवार को मुख्य अभियंता गंगा मेरठ की अध्यक्षता में कमेटी गंगा नहर के सिंचाई विभाग के डाक बंगले पर पहुंची।
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टीम के सामने एसडीओ जयपाल सिंह ने अपना पक्ष रखा। टीम ने जयपाल को अपनी शिकायत शपथ पत्र पर देने के लिए कहा। यह भी कहा कि जब तक शपथ पत्र पर बिंदू नहीं आएंगे, वह जांच नहीं करेंगे। वहीं इस दौरान एसडीओ के खिलाफ जूनियर इंजीनियरों ने एकत्र होकर जमकर नारेबाजी की। मौजूद ठेकेदारों ने एडवांस दिए गए पैसे के अलावा छोटे ठेके बंद करने का मामला भी रखा। जांच के दौरान लगभग दो घंटे तक विभाग में अफरा-तफरी का माहौल रहा।
शासन से आए सभी बिंदुओं पर जांच होगी
मुजफ्फरनगर। जांच कमेटी के अध्यक्ष मुख्य अभियंता एसके शर्मा ने बताया कि शासन ने जिन बिंदुओं पर जांच सौंपी है, उन सबकी गहनता से जांच होगी। सबसे पहले शिकायतकर्ता से शपथ पत्र के साथ शिकायत ली जाएगी। यदि शिकायत झूठ पाई जाती है तो शिकायत करने वाले के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। जांच पूरी होने में थोड़ा समय लगेगा।
मुझे नहीं पता मेरे पास कितने चार्ज
मुजफ्फरनगर। आरोपों से घिरे शिकायतकर्ता एसडीओ जयपाल सिंह से जब पूछा गया कि उनके पास कितने खंड का चार्ज है, इस पर वह बोले मेरे लड़के की शादी थी, मैं उसमें व्यस्त था। फिलहाल मुझे भी मालूम नहीं है कि मेरे पास कितने खंडों का चार्ज है।
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सिंचाई विभाग में इस समय हाईप्रोफाइल ड्रामा चल रहा है। ड्रेनेज खंड के एसडीओ जयपाल ने अधिशासी अभियंता केपी सिंह की शिकायत की है कि उन्होंने मानक के अनुसार काम नहीं किया। वहीं जूनियर इंजीनियरों को आरोप है कि एसडीओ जयपाल पर चार जगह बरेली, मुजफ्फरनगर, बड़ौत और शामली का चार्ज है। एसडीओ अपने क्षेत्र के जेई पर फर्जी बिल बनाने का दबाव बनाता है। चारों स्थानों पर यही समस्या है।
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जेई प्रमुख अभियंता सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग को लिखकर भेज चुके हैं कि वह एसडीओ जयपाल के साथ काम नहीं कर सकते। यहां तक आरोप लगाया कि डेढ़ करोड़ के फर्जी बिल बनवाने के लिए जूनियर इंजीनियरों को प्रताड़ित कर रहा है। ठेकेदारों से कमीशन के रूप में एक करोड़ से ज्यादा एडवांस वसूल चुका है। इन सब मामलों की जांच करने के लिए बुधवार को मुख्य अभियंता गंगा मेरठ की अध्यक्षता में कमेटी गंगा नहर के सिंचाई विभाग के डाक बंगले पर पहुंची।
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टीम के सामने एसडीओ जयपाल सिंह ने अपना पक्ष रखा। टीम ने जयपाल को अपनी शिकायत शपथ पत्र पर देने के लिए कहा। यह भी कहा कि जब तक शपथ पत्र पर बिंदू नहीं आएंगे, वह जांच नहीं करेंगे। वहीं इस दौरान एसडीओ के खिलाफ जूनियर इंजीनियरों ने एकत्र होकर जमकर नारेबाजी की। मौजूद ठेकेदारों ने एडवांस दिए गए पैसे के अलावा छोटे ठेके बंद करने का मामला भी रखा। जांच के दौरान लगभग दो घंटे तक विभाग में अफरा-तफरी का माहौल रहा।
शासन से आए सभी बिंदुओं पर जांच होगी
मुजफ्फरनगर। जांच कमेटी के अध्यक्ष मुख्य अभियंता एसके शर्मा ने बताया कि शासन ने जिन बिंदुओं पर जांच सौंपी है, उन सबकी गहनता से जांच होगी। सबसे पहले शिकायतकर्ता से शपथ पत्र के साथ शिकायत ली जाएगी। यदि शिकायत झूठ पाई जाती है तो शिकायत करने वाले के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। जांच पूरी होने में थोड़ा समय लगेगा।
मुझे नहीं पता मेरे पास कितने चार्ज
मुजफ्फरनगर। आरोपों से घिरे शिकायतकर्ता एसडीओ जयपाल सिंह से जब पूछा गया कि उनके पास कितने खंड का चार्ज है, इस पर वह बोले मेरे लड़के की शादी थी, मैं उसमें व्यस्त था। फिलहाल मुझे भी मालूम नहीं है कि मेरे पास कितने खंडों का चार्ज है।