{"_id":"6197f2f241071c6fe90ced01","slug":"feelings-of-late-have-been-respected-muzaffarnagar-news-mrt5655329143","type":"story","status":"publish","title_hn":"देर से ही सही भावनाओं का हुआ सम्मान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देर से ही सही भावनाओं का हुआ सम्मान
विज्ञापन
विनोद मलिक, पूर्व ब्लॉक प्रमुख बुढ़ाना।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देर से ही सही भावनाओं का हुआ सम्मान
मुजफ्फरनगर, बुढ़ाना। केंद्र सरकार द्वारा कृषि कानून वापसी के ऐलान के बाद क्षेत्र के किसानों में खुशी की लहर है। हालांकि किसानों ने कहा कि जब तक पूरी प्रक्रिया अपनाकर संसद में इसे पारित नहीं किया जाता वो संतुष्ट नहीं होंगे। इस फैसले को लेकर बुढ़ाना के किसानों ने खुशी जाहिर करते हुए इसे अपनी जीत बताया है।
पिछले साल केंद्र सरकार ने तीन नए कृषि कानून लागू किए थे। इसको लेकर बुढ़ाना कस्बे और देहात क्षेत्र के किसान भी विरोध में शामिल थे, लेकिन अब जब पीएम मोदी ने कृषि कानून वापस लेने का ऐलान किया, तो वे बेहद खुश दिखाई दिए।
किसान सेवा समिति के चेयरमैन सुरेंद्र सहरावत ने कहा कि आखिर प्रधानमंत्री ने तीनों कृषि कानून वापस लेकर अपनी हठधर्मिता तथा गलती का अहसास कर लिया है। इसके साथ ही यह भी साबित हो गया है कि यह इस सरकार की एक ऐतिहासिक गलती थी। पूर्व ब्लॉक प्रमुख विनोद मलिक ने कहा कि कृषि कानून वापस लेना किसानों की जीत है। इस आंदोलन में सैकड़ों की किसानों की जाने गई। उन किसानों के परिवारों को भी उचित मुआवजा मिलना चाहिए।
विज्ञापन
भाकियू तहसील अध्यक्ष अनुज बालियान ने कहा कि नए कृषि कानून काले कानून के समान थे। केंद्र सरकार ने देर से ही सही इन कानूनों को वापस लेकर किसानों की भावनाओं का सम्मान रखने प्रयास किया है। रालोद नेता रजनीश मलिक उर्फ पिंकी चौधरी ने कहा कि अन्नदाता सरकार के साथ संघर्ष से विचलित नहीं हुए। यह किसानों की जीत है।
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर, बुढ़ाना। केंद्र सरकार द्वारा कृषि कानून वापसी के ऐलान के बाद क्षेत्र के किसानों में खुशी की लहर है। हालांकि किसानों ने कहा कि जब तक पूरी प्रक्रिया अपनाकर संसद में इसे पारित नहीं किया जाता वो संतुष्ट नहीं होंगे। इस फैसले को लेकर बुढ़ाना के किसानों ने खुशी जाहिर करते हुए इसे अपनी जीत बताया है।
पिछले साल केंद्र सरकार ने तीन नए कृषि कानून लागू किए थे। इसको लेकर बुढ़ाना कस्बे और देहात क्षेत्र के किसान भी विरोध में शामिल थे, लेकिन अब जब पीएम मोदी ने कृषि कानून वापस लेने का ऐलान किया, तो वे बेहद खुश दिखाई दिए।
विज्ञापन
किसान सेवा समिति के चेयरमैन सुरेंद्र सहरावत ने कहा कि आखिर प्रधानमंत्री ने तीनों कृषि कानून वापस लेकर अपनी हठधर्मिता तथा गलती का अहसास कर लिया है। इसके साथ ही यह भी साबित हो गया है कि यह इस सरकार की एक ऐतिहासिक गलती थी। पूर्व ब्लॉक प्रमुख विनोद मलिक ने कहा कि कृषि कानून वापस लेना किसानों की जीत है। इस आंदोलन में सैकड़ों की किसानों की जाने गई। उन किसानों के परिवारों को भी उचित मुआवजा मिलना चाहिए।
विज्ञापन
भाकियू तहसील अध्यक्ष अनुज बालियान ने कहा कि नए कृषि कानून काले कानून के समान थे। केंद्र सरकार ने देर से ही सही इन कानूनों को वापस लेकर किसानों की भावनाओं का सम्मान रखने प्रयास किया है। रालोद नेता रजनीश मलिक उर्फ पिंकी चौधरी ने कहा कि अन्नदाता सरकार के साथ संघर्ष से विचलित नहीं हुए। यह किसानों की जीत है।

सुरेंद्र सहरावत, चेयरमैन, किसान सेवा समिति बुढ़ाना।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

रजनीश मलिक उर्फ पिंकी चौधरी, रालोद नेता।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

अनुज बालियान, तहसील अध्यक्ष भाकियू बुढ़ाना।- फोटो : MUZAFFARNAGAR