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अल्लाह की खुशी और नजदीकी पाने के लिए रखा जाता है रोजा: कैसर
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देवबंद। दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने कहा कि अल्लाह के बंदे सिर्फ अल्लाह ताआला की खुशी हासिल करने और नजदीकी पाने के लिए रोजा रखते हैं। वह सच्चे दिल से अपने रब की इबादत करते हैं।
रविवार को पवित्र रमजान माह की विशेषताओं पर रोशनी डालते हुए मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने कहा कि रमजान का महीना साल के सब महीनों में ज्यादा मुबारक व फजीलत वाला है। अल्लाह ने किसी माह को ये बुजुर्गी और अजमत नहीं अता फरमाई जो इस महीने को अता की है। इस माह में हर काम पर बेइंतेहा सवाब और बदला मिलता है। इस माह में अल्लाह की रहमतें अपने बंदों को तलाश करती हैं। उन्होंने कहा कि जो नीयत के खरे पन के साथ अल्लाह की इबादत करते हैं, रोजा रखते हैं, नमाजें पढ़ते हैं और कुरआन की तिलावत करते हैं चाहे वो रमजान हो या फिर आम दिन उसे बेहद सवाब मिलता है। उन्होंने कहा कि अल्लाह को दिखावा पसंद नहीं है वो दिलों की हालत को जांचता और देखता है जो अल्लाह के बंदे सिर्फ अल्लाह की खुशी हासिल करने के लिए और उसकी नजदीकी पाने के लिए रोजा रखते हैं, न कुछ खाते हैं, न पीते हैं और न दूसरे बुरे काम करते हैं, उन्हें अल्लाह दीन और दुनिया की बेशुमार दौलत अता करता है। मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने कहा कि रोजा इसका नाम नहीं कि आप न तो कुछ खाएं न कुछ पीयें, बल्कि खाने पीने के साथ साथ जुबान पर भी कंट्रोल करें, बुरा न कहें, बुरी बातें न करें, गाली गलौज न करें, निगाह पर भी काबू रखें, बुरी नजर डालने से रोकें और वो काम जिनसे रोजे में खलल पड़ता है उनसे अपनी हिफाजत करें।
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रविवार को पवित्र रमजान माह की विशेषताओं पर रोशनी डालते हुए मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने कहा कि रमजान का महीना साल के सब महीनों में ज्यादा मुबारक व फजीलत वाला है। अल्लाह ने किसी माह को ये बुजुर्गी और अजमत नहीं अता फरमाई जो इस महीने को अता की है। इस माह में हर काम पर बेइंतेहा सवाब और बदला मिलता है। इस माह में अल्लाह की रहमतें अपने बंदों को तलाश करती हैं। उन्होंने कहा कि जो नीयत के खरे पन के साथ अल्लाह की इबादत करते हैं, रोजा रखते हैं, नमाजें पढ़ते हैं और कुरआन की तिलावत करते हैं चाहे वो रमजान हो या फिर आम दिन उसे बेहद सवाब मिलता है। उन्होंने कहा कि अल्लाह को दिखावा पसंद नहीं है वो दिलों की हालत को जांचता और देखता है जो अल्लाह के बंदे सिर्फ अल्लाह की खुशी हासिल करने के लिए और उसकी नजदीकी पाने के लिए रोजा रखते हैं, न कुछ खाते हैं, न पीते हैं और न दूसरे बुरे काम करते हैं, उन्हें अल्लाह दीन और दुनिया की बेशुमार दौलत अता करता है। मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने कहा कि रोजा इसका नाम नहीं कि आप न तो कुछ खाएं न कुछ पीयें, बल्कि खाने पीने के साथ साथ जुबान पर भी कंट्रोल करें, बुरा न कहें, बुरी बातें न करें, गाली गलौज न करें, निगाह पर भी काबू रखें, बुरी नजर डालने से रोकें और वो काम जिनसे रोजे में खलल पड़ता है उनसे अपनी हिफाजत करें।
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