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किसानों ने रेलवे ट्रैक पर काम रुकवाया
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किसानों ने रेलवे ट्रैक पर काम रुकवाया
मंसूरपुर। रेलवे मंत्रालय की ओर से अनुदान नहीं दिए जाने से खफा किसानों ने रेलवे ट्रैक का काम रोक कर तीसरे दिन भी धरना जारी रखा।
रेलवे विभाग द्वारा डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के तहत माल ढुलाई के लिए रेलवे ट्रैक का निर्माण किया जा रहा है। तीन दिन पूर्व गांव लछेड़ा व सिमली के जंगल में किसानों ने रेलवे ट्रैक बनाने के लिए किए जा रहे मिट्टी भराव को यह कहकर बंद करा दिया था कि जब तक उन्हें अनुदान नहीं मिलेगा, तब तक वे कार्य को नहीं करने देंगे। लछेड़ा व सीमली के जंगल में दोनों गांव के किसान टेंट लगाकर लगातार धरना दे रहे हैं। तीन दिनों में उनके पास वार्ता के लिए कोई अधिकारी नहीं पहुंचा है। तीन दिन पहले भाकियू नेता अंतरवीर के नेतृत्व में गांव जड़ौदा में भी किसानों ने रेलवे ट्रैक का कार्य बंद करा दिया था, जो लगातार जारी है। किसान देवराज, रामवीर, जयपाल, लोकेंद्र, बाबू, तेजपाल, सेवाराम, इंद्रपाल, बिजेंद्र, सुखपाल आदि का कहना है कि अधिग्रहीत की गई भूमि के मुआवजे के अतिरिक्त रेलवे विभाग द्वारा प्रत्येक किसान को 5 लाख 50 हजार रुपये अनुदान के रुप में देने का प्रावधान है, लेकिन अभी तक उन्हें अनुदान के रूप में कोई पैसा नहीं मिला है। जब तक अनुदान नहीं मिलेगा वे किसी भी कीमत पर कार्य प्रारंभ नहीं होने देंगे।
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मंसूरपुर। रेलवे मंत्रालय की ओर से अनुदान नहीं दिए जाने से खफा किसानों ने रेलवे ट्रैक का काम रोक कर तीसरे दिन भी धरना जारी रखा।
रेलवे विभाग द्वारा डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के तहत माल ढुलाई के लिए रेलवे ट्रैक का निर्माण किया जा रहा है। तीन दिन पूर्व गांव लछेड़ा व सिमली के जंगल में किसानों ने रेलवे ट्रैक बनाने के लिए किए जा रहे मिट्टी भराव को यह कहकर बंद करा दिया था कि जब तक उन्हें अनुदान नहीं मिलेगा, तब तक वे कार्य को नहीं करने देंगे। लछेड़ा व सीमली के जंगल में दोनों गांव के किसान टेंट लगाकर लगातार धरना दे रहे हैं। तीन दिनों में उनके पास वार्ता के लिए कोई अधिकारी नहीं पहुंचा है। तीन दिन पहले भाकियू नेता अंतरवीर के नेतृत्व में गांव जड़ौदा में भी किसानों ने रेलवे ट्रैक का कार्य बंद करा दिया था, जो लगातार जारी है। किसान देवराज, रामवीर, जयपाल, लोकेंद्र, बाबू, तेजपाल, सेवाराम, इंद्रपाल, बिजेंद्र, सुखपाल आदि का कहना है कि अधिग्रहीत की गई भूमि के मुआवजे के अतिरिक्त रेलवे विभाग द्वारा प्रत्येक किसान को 5 लाख 50 हजार रुपये अनुदान के रुप में देने का प्रावधान है, लेकिन अभी तक उन्हें अनुदान के रूप में कोई पैसा नहीं मिला है। जब तक अनुदान नहीं मिलेगा वे किसी भी कीमत पर कार्य प्रारंभ नहीं होने देंगे।