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मुजफ्फरनगर - किसान गन्ने की पत्ती का खाद बनाएं : यादव
Tue, 14 Nov 2023 11:46 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 14 Nov 2023 11:46 PM IST
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- उप कृषि निदेशक बोले - खेतों में पत्ती जलाने से होता है दोहरा नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। उप कृषि निदेशक संतोष कुमार यादव ने बताया कि किसानों को गन्ने की पत्ती को जलाकर नष्ट नहीं करना चाहिए। इससे पर्यावरण को नुकसान होता है।
उन्होंने बताया कि गन्ने में सूखी पत्ती की मात्रा गन्ने की प्रजाति, फसल की उम्र, मिट्टी और मौसम पर निर्भर करती है। आमतौर पर यह फसल में कुछ बायोमास का लगभग 10 से 15 प्रतिशत होती है। इसको प्रबंधन करके खाद बनाकर भूमि की उर्वरता बढ़ाई जा सकती है। उप निदेशक ने कहा कि पत्ती के जलाने से जमीन का तापमान बढ़ता है, जिससे मित्र कीट समाप्त होते हैं। भूमि में सूक्ष्म जीवाणु की संख्या नगण्य हो जाती है। मृदा की उर्वरा शक्ति का हृास हो जाता है। फसल में जल की मांग बढ़ जाती है। वायु मण्डल प्रदूषित हो जाता है।
किसान पत्ती का प्रबंधन करें तो यह मृदा नमी को बनाए रखने में सहायक होगी। इससे 25 से 30 प्रतिशत तक सिंचाई पानी में बचत होगी। खरपतवारों पर नियंत्रण रहेगा, निराई-गुडाई के खर्च में बचत होगी। मृदा में जीवांश पदार्थ की बढ़ोत्तरी होगी। लगातार दो वर्षों में 0.2 से 0.3 प्रतिशत तक जीवांश बढे़गा। मृदा में मित्र कीटों एवं जीवाणुओं की संख्या में ब्रढ़ोत्तरी होगी। प्रति टन पत्ती से 5.4 किग्रा नाइट्रोजन, 1.3 किग्रा फास्फोरस एवं 3.1 किलो पोटाश का लाभ होगा।
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मुजफ्फरनगर। उप कृषि निदेशक संतोष कुमार यादव ने बताया कि किसानों को गन्ने की पत्ती को जलाकर नष्ट नहीं करना चाहिए। इससे पर्यावरण को नुकसान होता है।
उन्होंने बताया कि गन्ने में सूखी पत्ती की मात्रा गन्ने की प्रजाति, फसल की उम्र, मिट्टी और मौसम पर निर्भर करती है। आमतौर पर यह फसल में कुछ बायोमास का लगभग 10 से 15 प्रतिशत होती है। इसको प्रबंधन करके खाद बनाकर भूमि की उर्वरता बढ़ाई जा सकती है। उप निदेशक ने कहा कि पत्ती के जलाने से जमीन का तापमान बढ़ता है, जिससे मित्र कीट समाप्त होते हैं। भूमि में सूक्ष्म जीवाणु की संख्या नगण्य हो जाती है। मृदा की उर्वरा शक्ति का हृास हो जाता है। फसल में जल की मांग बढ़ जाती है। वायु मण्डल प्रदूषित हो जाता है।
किसान पत्ती का प्रबंधन करें तो यह मृदा नमी को बनाए रखने में सहायक होगी। इससे 25 से 30 प्रतिशत तक सिंचाई पानी में बचत होगी। खरपतवारों पर नियंत्रण रहेगा, निराई-गुडाई के खर्च में बचत होगी। मृदा में जीवांश पदार्थ की बढ़ोत्तरी होगी। लगातार दो वर्षों में 0.2 से 0.3 प्रतिशत तक जीवांश बढे़गा। मृदा में मित्र कीटों एवं जीवाणुओं की संख्या में ब्रढ़ोत्तरी होगी। प्रति टन पत्ती से 5.4 किग्रा नाइट्रोजन, 1.3 किग्रा फास्फोरस एवं 3.1 किलो पोटाश का लाभ होगा।
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