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वर्चस्व की जंग की भेंट चढ़ा किसान दिवस
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 19 May 2016 12:24 AM IST
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किसान दिवस में हंगामा करते भाकियू कार्यकर्ता।
- फोटो : अमर उजाला
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किसान दिवस पर किसानों की समस्याएं उठाने के साथ ही भाकियू और भानू गुट के कार्यकर्ता वर्चस्व की जंग में उलझे रहे। जिला पंचायत के सभागार में दोनों संगठनों में जहां टोपी की जंग दिखाई दी, वहीं वाकयुद्घ भी जमकर हुआ।
माइक पकड़कर बात कहने को लेकर तनाव का माहौल बना रहा। भानू गुट के कार्यकर्ताओं के कुर्सियां कब्जा लेने से भाकियू कार्यकर्ताओं ने डीएम को ऑफिस में घेर लिया। किसान दिवस में जाने तक नहीं दिया। किसान दिवस में अन्य अधिकारियों के साथ सीडीओ ही डटे रहे।
जिला प्रशासन ने प्रदेश सरकार के निर्देश पर बुधवार को जिला पंचायत के सभागार में साढ़े बारह बजे से किसान दिवस का आयोजन किया। बीते किसान दिवस में किसान संगठनों के बीच मारपीट और हंगामे के चलते इस बार भी तनाव साफ दिखाई दिया। किसान दिवस में भाकियू भानू के कार्यकर्ताओं ने पहले पहुंचकर कुर्सियों पर कब्जा कर लिया।
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अन्य अफसरों के साथ सीडीओ अंकित अग्रवाल ने किसानों की समस्याएं सुनी। भाकियू कार्यकर्ताओं ने जब देखा कि सीटें कम है तो उन्होंने सीधे डीएम को उनके ऑफिस में ही घेर लिया। गेट पर बैठकर आने जाने का रास्ता बंद कर दिया। डीएम ऑफिस पर हंगामा होते देख सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र सिंह, एडीएम प्रशासन मनोज सिंह भी डीएम ऑफिस पहुंच गए।
डीएम ऑफिस में काफी शोर शराबे और हंगामे के बीच भाकियू ने अपनी मांगों को लेकर डीएम डीके सिंह को ज्ञापन दिया। जिलाध्यक्ष राजू अहलावत ने गन्ना मूल्य सहित 14 मांगे रखी। इसी बीच किसान दिवस में धीरे-धीरे दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं ने अपनी समस्याएं रखनी शुरू की। दोनों गुटों ने अपने सिरों पर टोपी लगाकर ताकत का अहसान कराने का प्रयास किया।
माइक पर समस्या रखने को लेकर भी टकराव के हालात देखे गए। दोनों किसान गुटों के आमने-सामने आने की स्थिति में पंचायत सभागार के बाहर जहां पीएसी मोर्चा संभाले रही, वहीं सभागार के अंदर एसओ सिविल लाइन चंद्रकिरण यादव अपने कुछ दरोगाओं को लेकर दोनो गुटों के बीच दीवार बने रहे।
हालांकि कई बार शोर-शराबा और हो-हल्ला हुआ। पुलिस ने दोनो पक्षों को एक दूसरे से भिड़ने नहीं दिया। भानू गुट के जिलाध्यक्ष संजीव तोमर ने कहा कि वह तो शांतिपूर्वक समस्या रखने आए हैं। किसान दिवस में जब ज्यादा हंगामे के हालात बने तो सीडीओ ने किसान दिवस समाप्ति की घोषणा कर दी।
बड़े अफसर क्यों नी आए...
किसान दिवस के दौरान कुछ लोगों का अफसरों को अपमानित करना ही शगल बन गया है। एक महिला किसान ने आईएएस अधिकारी सीडीओ अंकित अग्रवाल पर कमेंट करते हुए कहा कि यहां बड़े अफसर क्यूं नी आए, तम्हे क्यूं भेज दिया। जिले के नंबर टू के अफसर ये सुनकर गर्दन नीचे कर बैठ गए। इस तरह की बात करने से अन्य अधिकारियों में भी प्रतिक्रिया होती दिखाई दी।
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माइक पकड़कर बात कहने को लेकर तनाव का माहौल बना रहा। भानू गुट के कार्यकर्ताओं के कुर्सियां कब्जा लेने से भाकियू कार्यकर्ताओं ने डीएम को ऑफिस में घेर लिया। किसान दिवस में जाने तक नहीं दिया। किसान दिवस में अन्य अधिकारियों के साथ सीडीओ ही डटे रहे।
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जिला प्रशासन ने प्रदेश सरकार के निर्देश पर बुधवार को जिला पंचायत के सभागार में साढ़े बारह बजे से किसान दिवस का आयोजन किया। बीते किसान दिवस में किसान संगठनों के बीच मारपीट और हंगामे के चलते इस बार भी तनाव साफ दिखाई दिया। किसान दिवस में भाकियू भानू के कार्यकर्ताओं ने पहले पहुंचकर कुर्सियों पर कब्जा कर लिया।
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अन्य अफसरों के साथ सीडीओ अंकित अग्रवाल ने किसानों की समस्याएं सुनी। भाकियू कार्यकर्ताओं ने जब देखा कि सीटें कम है तो उन्होंने सीधे डीएम को उनके ऑफिस में ही घेर लिया। गेट पर बैठकर आने जाने का रास्ता बंद कर दिया। डीएम ऑफिस पर हंगामा होते देख सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र सिंह, एडीएम प्रशासन मनोज सिंह भी डीएम ऑफिस पहुंच गए।
डीएम ऑफिस में काफी शोर शराबे और हंगामे के बीच भाकियू ने अपनी मांगों को लेकर डीएम डीके सिंह को ज्ञापन दिया। जिलाध्यक्ष राजू अहलावत ने गन्ना मूल्य सहित 14 मांगे रखी। इसी बीच किसान दिवस में धीरे-धीरे दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं ने अपनी समस्याएं रखनी शुरू की। दोनों गुटों ने अपने सिरों पर टोपी लगाकर ताकत का अहसान कराने का प्रयास किया।
माइक पर समस्या रखने को लेकर भी टकराव के हालात देखे गए। दोनों किसान गुटों के आमने-सामने आने की स्थिति में पंचायत सभागार के बाहर जहां पीएसी मोर्चा संभाले रही, वहीं सभागार के अंदर एसओ सिविल लाइन चंद्रकिरण यादव अपने कुछ दरोगाओं को लेकर दोनो गुटों के बीच दीवार बने रहे।
हालांकि कई बार शोर-शराबा और हो-हल्ला हुआ। पुलिस ने दोनो पक्षों को एक दूसरे से भिड़ने नहीं दिया। भानू गुट के जिलाध्यक्ष संजीव तोमर ने कहा कि वह तो शांतिपूर्वक समस्या रखने आए हैं। किसान दिवस में जब ज्यादा हंगामे के हालात बने तो सीडीओ ने किसान दिवस समाप्ति की घोषणा कर दी।
बड़े अफसर क्यों नी आए...
किसान दिवस के दौरान कुछ लोगों का अफसरों को अपमानित करना ही शगल बन गया है। एक महिला किसान ने आईएएस अधिकारी सीडीओ अंकित अग्रवाल पर कमेंट करते हुए कहा कि यहां बड़े अफसर क्यूं नी आए, तम्हे क्यूं भेज दिया। जिले के नंबर टू के अफसर ये सुनकर गर्दन नीचे कर बैठ गए। इस तरह की बात करने से अन्य अधिकारियों में भी प्रतिक्रिया होती दिखाई दी।