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गन्ने वाले खेत में किसान ने उगाए आलू
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सिसौली में आलू के खेत में किसान एवं मिल अधिकारी
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
गन्ने वाले खेत में किसान ने उगाए आलू
मुजफ्फरनगर, भौराकलां। सिसौली कसबे के किसान धर्मेंद्र कुमार ने गन्ने के साथ आलू की खेती कर मुनाफा कमाया है। किसान का कहना है कि तीन महीने की खेती में गन्ने की फसल पर होने वाला सारा खर्च किसान निकाल सकते हैं। इसके अलावा घर की शुद्ध सब्जी भी उपलब्ध रहेगी। किसानों को खेती में प्रयोग जरूर करना चाहिए।
नई आबादी निवासी धर्मेंद्र कुमार ने एक बीघा गन्ने की अगेती फसल के साथ आलू की बुआई की है। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह से सहफसली खेती का यह प्रयोग किया है। प्रगतिशील किसान धर्मेंद्र का कहना है कि अगेती गन्ने की फसल के साथ आलू की तीन महीने की फसल बेहद लाभकारी है। किसान इस तरह भी समझ सकते हैं कि गन्ने की फसल पर होने वाला सारा खर्च भी इस खेती से मिल जाता है। इसके अलावा बचत भी अलग से होती है। बाजार से आलू भी किसान को नहीं खरीदने पड़ते। सहफसली खेती से किसान को किसी तरह का नुकसान नहीं है।
गन्ना खेत में और 16 हजार की हुई बचत
किसान का कहना है कि पिछले साल भी गन्ने की फसल के साथ आलू उगाए थे। तीन महीने में 16 हजार रुपये की बचत हुई और गन्ने का खेत बेहद अच्छा खड़ा हुआ है। आसपास के लोग उसकी फसल को देखने के लिए पहुंच रहे हैं।
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खतौली मिल के अधिकारियों ने किया दौरा
किसान का खेत देखने के लिए खतौली चीनी मिल के अधिकारी संदीप कुमार के नेतृत्व में खेत पर पहुंचे। किसान की प्रशंसा की और सहफसली खेती को बढ़ावा देने की बात कही। अधिकारियों का कहना है कि किसान प्रयोग कर मुनाफा कमा सकते हैं।
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मुजफ्फरनगर, भौराकलां। सिसौली कसबे के किसान धर्मेंद्र कुमार ने गन्ने के साथ आलू की खेती कर मुनाफा कमाया है। किसान का कहना है कि तीन महीने की खेती में गन्ने की फसल पर होने वाला सारा खर्च किसान निकाल सकते हैं। इसके अलावा घर की शुद्ध सब्जी भी उपलब्ध रहेगी। किसानों को खेती में प्रयोग जरूर करना चाहिए।
नई आबादी निवासी धर्मेंद्र कुमार ने एक बीघा गन्ने की अगेती फसल के साथ आलू की बुआई की है। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह से सहफसली खेती का यह प्रयोग किया है। प्रगतिशील किसान धर्मेंद्र का कहना है कि अगेती गन्ने की फसल के साथ आलू की तीन महीने की फसल बेहद लाभकारी है। किसान इस तरह भी समझ सकते हैं कि गन्ने की फसल पर होने वाला सारा खर्च भी इस खेती से मिल जाता है। इसके अलावा बचत भी अलग से होती है। बाजार से आलू भी किसान को नहीं खरीदने पड़ते। सहफसली खेती से किसान को किसी तरह का नुकसान नहीं है।
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गन्ना खेत में और 16 हजार की हुई बचत
किसान का कहना है कि पिछले साल भी गन्ने की फसल के साथ आलू उगाए थे। तीन महीने में 16 हजार रुपये की बचत हुई और गन्ने का खेत बेहद अच्छा खड़ा हुआ है। आसपास के लोग उसकी फसल को देखने के लिए पहुंच रहे हैं।
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खतौली मिल के अधिकारियों ने किया दौरा
किसान का खेत देखने के लिए खतौली चीनी मिल के अधिकारी संदीप कुमार के नेतृत्व में खेत पर पहुंचे। किसान की प्रशंसा की और सहफसली खेती को बढ़ावा देने की बात कही। अधिकारियों का कहना है कि किसान प्रयोग कर मुनाफा कमा सकते हैं।

सिसौली में आलू एवं गन्ने का खेत- फोटो : MUZAFFARNAGAR