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गन्ने के पूरे भुगतान के लिए रात भर ठंड में ठिठुरता है किसान
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मन्सूरपुर चीनी मिल के बहार टैक्टर ट्राली में गन्ना लिए किसान।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
सर्दी में पूरी रात मिल गेट पर ठिठुरता है किसान
मुजफ्फरनगर। मिल गेट और क्रय केंद्रों पर गन्ना तुलवाने के भाव में अंतर होने के कारण किसानों की मुसीबत है। मिल गेट पर गन्ना तुलवाने के लिए ठंड में ठिठुरते हुए किसानों को अपनी बुग्गी या ट्रैक्टर-ट्राली को लेकर लाइन में खड़ा होना पड़ता है। किसान को मिल गेट पर गन्ना तुलवाने की प्रक्रिया में आठ से दस घंटे देने पड़ते हैं। गेट पर गन्ना डालने वाले किसान को 325 रुपये प्रति क्विंटल गन्ने का भाव मिलता है, जबकि क्रय केंद्र पर गन्ना देने वाले किसान को 316 रुपये 25 पैसे प्रति क्विंटल का भुगतान होता है। ऐसे में क्रय केंद्र पर गन्ना डालने वाले किसान को 8.75 रुपये प्रति क्विंटल का सीधा नुकसान होता है।
जिले में लगभग दो लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती हो रही है। इसमें एक लाख 64 हजार 391 हेक्टेयर जमीन में गन्ना है। जनपद के 85 प्रतिशत किसान गन्ने की ही खेती करते हैं। जिले में कुल किसानों की संख्या दो लाख 31 हजार है। इनमें से एक लाख 99 हजार 700 किसान गन्ने की खेती कर रहे हैं। गन्ना किसान यदि अपने आप काम न करे तो गन्ना उसके लिए लाभ का सौदा नहीं रहा है। हालत यह हैं कि किसान अपना पैसा बचाने के लिए और गन्ने का पूरा भुगतान लेने के लिए मिल गेट पर अधिक गन्ना डाल रहा है। आंधी-तूफान और बारिश की परवाह किए बिना वह चीनी मिल के गेट पर लाइन में खड़ा रहता है। कितनी ही शीतलहर चल रही हो और पाला पड़ रहा हो किसान को सुबह चार बजे भी चीनी मिल के गेट पर अपने गन्ने के साथ लाइन में लगे देखा जा सकता है। गन्ना विभाग के रिकार्ड के अनुसार एक लाख 64 हजार 391 हेक्टेयर में से 84 हजार 690 हेक्टेयर का गन्ना सीधे मिल गेट पर जा रहा है। 79 हजार 701 हेक्टेयर क्षेत्रफल का गन्ना क्रय केंद्रों पर डाला जा रहा है। जसोई के किसान रामकुमार का कहना है कि किसान को गन्ने में एक-एक पैसा बचाना पड़ता है। यदि मिल पर गन्ना न डाले तो आठ रुपये 75 पैसे प्रति क्विंटल का सीधा नुकसान होता है। लागत इतनी अधिक आ रही है किसान को गन्ना काटने से लेकर मिल में डालने तक का काम खुद ही करना पड़ रहा है।
चीनी मिल- गन्ना क्षेत्रफल- मिल गेट- क्रय केंद्र
खतौली- 31174 हे.- 11997- 19177
तितावी- 16751 हे.- 7700- 9051
मंसूरपुर- 26572 हे.- 14330- 12242
रोहाना- 7188 हे- 6456- 732
मोरना- 14397 हे.- 13283- 1114
टिकौला- 21965 हे.- 9852- 12113
भैसाना- 18796 हे.- 10247- 8549
खाईखेडी- 17117 हे.- 9721- 7396
मोरना, रोहाना का 90 प्रतिशत गन्ना गेट पर जाता है
मुजफ्फरनगर। जिले की मोरना और रोहाना ऐसी चीनी मिले हैं, जिनका 90 प्रतिशत गन्ना मिल गेट पर ही जाता है। रोहाना चीनी मिल में केवल 732 हेक्टेयर जमीन का गन्ना ही क्रय केंद्रों के माध्यम से खरीदा जाता है। यहां 6456 हेक्टेयर जमीन का गन्ना सीधे गेट पर आता है। इसी तरह मोरना का केवल 1114 हेक्टेयर जमीन का गन्ना क्रय केंद्रों के माध्यम से खरीदा जाता है। यहां 13283 हेक्टेयर जमीन का गन्ना सीधे मिल गेट पर ही जाता है।
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किसान को मिलती है छूट
मुजफ्फरनगर। जिला गन्ना अधिकारी डॉ आरडी द्विवेदी का कहना है कि मिल गेट और क्रय केंद्र पर गन्ना डालने को लेकर किसान की छूट होती है। पहले से चली आ रही प्रक्रिया के हिसाब से ही उसकी पर्ची जारी होती है। यदि कोई बदलवाना चाहता है तो उसे प्रार्थना पत्र देना होता है। मिल गेट की जारी पर्ची का गन्ना गेट पर ही तुलेगा और क्रय केंद्र की पर्ची का गन्ना क्रय केंद्र पर ही तौला जाएगा। क्रय केंद्र यदि चीनी मिल से 20 किमी से कम है तो 45 पैसे प्रति किमी के हिसाब से किराया कटता है। किसान से आठ रुपये 75 पैसे से ज्यादा नहीं लिया जाएगा। कांटा चाहे जितनी दूर हो।
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मुजफ्फरनगर। मिल गेट और क्रय केंद्रों पर गन्ना तुलवाने के भाव में अंतर होने के कारण किसानों की मुसीबत है। मिल गेट पर गन्ना तुलवाने के लिए ठंड में ठिठुरते हुए किसानों को अपनी बुग्गी या ट्रैक्टर-ट्राली को लेकर लाइन में खड़ा होना पड़ता है। किसान को मिल गेट पर गन्ना तुलवाने की प्रक्रिया में आठ से दस घंटे देने पड़ते हैं। गेट पर गन्ना डालने वाले किसान को 325 रुपये प्रति क्विंटल गन्ने का भाव मिलता है, जबकि क्रय केंद्र पर गन्ना देने वाले किसान को 316 रुपये 25 पैसे प्रति क्विंटल का भुगतान होता है। ऐसे में क्रय केंद्र पर गन्ना डालने वाले किसान को 8.75 रुपये प्रति क्विंटल का सीधा नुकसान होता है।
जिले में लगभग दो लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती हो रही है। इसमें एक लाख 64 हजार 391 हेक्टेयर जमीन में गन्ना है। जनपद के 85 प्रतिशत किसान गन्ने की ही खेती करते हैं। जिले में कुल किसानों की संख्या दो लाख 31 हजार है। इनमें से एक लाख 99 हजार 700 किसान गन्ने की खेती कर रहे हैं। गन्ना किसान यदि अपने आप काम न करे तो गन्ना उसके लिए लाभ का सौदा नहीं रहा है। हालत यह हैं कि किसान अपना पैसा बचाने के लिए और गन्ने का पूरा भुगतान लेने के लिए मिल गेट पर अधिक गन्ना डाल रहा है। आंधी-तूफान और बारिश की परवाह किए बिना वह चीनी मिल के गेट पर लाइन में खड़ा रहता है। कितनी ही शीतलहर चल रही हो और पाला पड़ रहा हो किसान को सुबह चार बजे भी चीनी मिल के गेट पर अपने गन्ने के साथ लाइन में लगे देखा जा सकता है। गन्ना विभाग के रिकार्ड के अनुसार एक लाख 64 हजार 391 हेक्टेयर में से 84 हजार 690 हेक्टेयर का गन्ना सीधे मिल गेट पर जा रहा है। 79 हजार 701 हेक्टेयर क्षेत्रफल का गन्ना क्रय केंद्रों पर डाला जा रहा है। जसोई के किसान रामकुमार का कहना है कि किसान को गन्ने में एक-एक पैसा बचाना पड़ता है। यदि मिल पर गन्ना न डाले तो आठ रुपये 75 पैसे प्रति क्विंटल का सीधा नुकसान होता है। लागत इतनी अधिक आ रही है किसान को गन्ना काटने से लेकर मिल में डालने तक का काम खुद ही करना पड़ रहा है।
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चीनी मिल- गन्ना क्षेत्रफल- मिल गेट- क्रय केंद्र
खतौली- 31174 हे.- 11997- 19177
तितावी- 16751 हे.- 7700- 9051
मंसूरपुर- 26572 हे.- 14330- 12242
रोहाना- 7188 हे- 6456- 732
मोरना- 14397 हे.- 13283- 1114
टिकौला- 21965 हे.- 9852- 12113
भैसाना- 18796 हे.- 10247- 8549
खाईखेडी- 17117 हे.- 9721- 7396
मोरना, रोहाना का 90 प्रतिशत गन्ना गेट पर जाता है
मुजफ्फरनगर। जिले की मोरना और रोहाना ऐसी चीनी मिले हैं, जिनका 90 प्रतिशत गन्ना मिल गेट पर ही जाता है। रोहाना चीनी मिल में केवल 732 हेक्टेयर जमीन का गन्ना ही क्रय केंद्रों के माध्यम से खरीदा जाता है। यहां 6456 हेक्टेयर जमीन का गन्ना सीधे गेट पर आता है। इसी तरह मोरना का केवल 1114 हेक्टेयर जमीन का गन्ना क्रय केंद्रों के माध्यम से खरीदा जाता है। यहां 13283 हेक्टेयर जमीन का गन्ना सीधे मिल गेट पर ही जाता है।
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किसान को मिलती है छूट
मुजफ्फरनगर। जिला गन्ना अधिकारी डॉ आरडी द्विवेदी का कहना है कि मिल गेट और क्रय केंद्र पर गन्ना डालने को लेकर किसान की छूट होती है। पहले से चली आ रही प्रक्रिया के हिसाब से ही उसकी पर्ची जारी होती है। यदि कोई बदलवाना चाहता है तो उसे प्रार्थना पत्र देना होता है। मिल गेट की जारी पर्ची का गन्ना गेट पर ही तुलेगा और क्रय केंद्र की पर्ची का गन्ना क्रय केंद्र पर ही तौला जाएगा। क्रय केंद्र यदि चीनी मिल से 20 किमी से कम है तो 45 पैसे प्रति किमी के हिसाब से किराया कटता है। किसान से आठ रुपये 75 पैसे से ज्यादा नहीं लिया जाएगा। कांटा चाहे जितनी दूर हो।