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आफत की बारिश :  गिरे दर्जनों कच्चे मकान, किशोरी और महिला की मौत             

Sun, 29 Jul 2018 12:34 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर Updated Sun, 29 Jul 2018 12:34 AM IST
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Fall house, teenager and woman's death
महिला की मौत के बाद लगी भीड़। - फोटो : अमर उजाला
जनपद में चार दिन से लगातार हो रही बारिश अब आफत का सबब बनने लगी है। जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार कच्चे मकान गिरने से आर्थिक के साथ ही जनहानि भी होने लगी है। शुक्रवार दिन में हुई जबरदस्त बारिश के बाद रात होते-होते जनपद के कई गांवों में कच्चे मकान धराशायी हो गए। मकान गिरने से जहां गांव खुड्डा में वृद्ध महिला की मौत हो गई। वहीं, चरथावल के गांव कुल्हेड़ी में भी मकान की छत गिरने से एक किशोरी की मौत हो गई।    
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छपार के  गांव रेई निवासी नफीस करीब चार साल पूर्व गांव खुड्डा में आकर रहने लगा था। फिलहाल वह कोल्हू पर मजदूरी करने के लिए महाराष्ट्र गया हुआ है। घर पर उसकी पत्नी फरीदा दो बच्चियों चांदनी व साहिबा के साथ रह रही है। तीन दिन पूर्व गांव रेई से नफीस की मां रईसा (65) पत्नी यासीन भी पुत्रवधू फरीदा के पास रहने के लिए आई हुई थी।
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बारिश से शनिवार सुबह करीब 5.30 बजे उनके कच्चे मकान की छत नीचे आ गिरी। सास-बहू व दोनों बच्चियां मलबे के नीचे दब गईं। मलबे में दबे परिवार की चीख- पुकार सुनकर पड़ोस के लोग मौके पर पहुंचे। लोगों ने मलबा हटाते हुए उसमें दबी दोनों महिलाओं व बच्चियों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक वृद्धा रईसा की मौत हो चुकी थी।
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फरीदा व उसकी दोनों बच्चियों की हालत गंभीर बनी हुई थी। घायलों को जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। घटना की जानकारी मिलने पर गांव रेई से भी नफीस के परिजन भी खुड्डा आ गए। परिजनों ने ग्राम प्रधान पर गंभीर आरोप लगाए।

सूचना पर जिला पंचायत सदस्य सईदुज्जमां के साथ ही थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची और पीड़ित परिजनों को समझा-बुझाकर शांत किया। बाद में पीड़ित परिजन बिना पुलिस कार्रवाई के वृद्धा के शव को गांव रेई ले गए, जहां उसे सुपुर्द ए-खाक कर दिया गया। ग्राम प्रधान मोहम्मद उवैश ने खुद पर लगे आरोपों को निराधार बताया है।  
     
चरथावल के कुल्हेड़ी निवासी इरशाद का परिवार नंगला रांई मार्ग पर ताज मस्जिद के सामने रहता है। शनिवार सुबह पूरा परिवार एक कमरे में सोया था। शनिवार की सुबह करीब पांच बजे कच्ची छत गिर गई। मलबे में पूरा परिवार दब गया। मलबे में दबकर 12 साल की बालिका मिस्बाह की मौत हो गई, जबकि फावड़े से मलबा हटाने में उसके पिता इरशाद की पैरों की हड्डियां टूट गई।

सीएसची से एंबुलेंस ने सभी को हॉस्पिटल भेजवाया गया। चिकित्सकों ने इरशाद (40) को जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया। मलबे में दबी मिस्बाह की मॉ शबनम (30), बहन अलसबा (2), शीबा (8) और भाई परवेज (10), शोख (6), शावेज (4) को प्राथमिक उपचार करने के बाद घर भेज दिया गया।

पुलिस ने किशोरी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इसके अलावा आस मोहम्मद, कामिल और नफीस की दीवार गिर गई। मुजम्मिल के मकान की छत गिरने से सामान दब गया। मुस्तफा पुत्र सईद का पशुओं के कमरे की छत गिरने से मवेशी दब गए। वहीं, कस्बे में शेखजादगान शर्की में जितेंद्र की पुरानी हवेली की दीवार सड़क पर गिरने से हादसा टल गया। कयामपुर,, कसौली और बिरालसी में कच्चे मकानों की जर्जर दीवार क्षतिग्रस्त हुई। 

मीरापुर में भी मकान गिरे, तीन बालक दबे       
मीरापुर। वर्षा के कारण क्षेत्र में सात मकान ढह गए। एक मकान के मलबे में तीन बच्चे भी दब गए। मोहल्ला मुश्तर्क ईदगाह रोड निवासी इसरार पुत्र इस्माईल, अब्दुल हकीम पुत्र अजीज, कल्लू पुत्र इमामुदीन, गुड्डू पुत्र रहीसू, सलीम पुत्र शब्बीर, खतौली रोड निवासी रशीद पुत्र शमशाद, मुकल्लमपुरा निवासी नरेंद्र पुत्र महावीर के मकान ढह गए। खतौली रोड निवासी रशीद के मकान के मलबे में उसके तीन बच्चे राजा (3), साहिल (5), सुहेल (7) घायल हो गए।

आसपास के करीब सैकड़ों मकानों में बरसात का पानी घुस गया। प्राइमरी स्कूल कैथोडा, प्राइमरी स्कूल खेड़ी सराय, जूनियर व प्राइमरी स्कूल तुल्हेडी, प्राइमरी स्कूल पुट्टी के भवन भी दरक गए। थाने के कार्यालय की छत टपकने से वहां रखे कंप्यूटर भी ठप हो गए।  बैराज पर गंगा जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है। जेई पीयूष कुमार ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्र से आए जल के कारण बैराज पर जलस्तर में मामूली वृद्धि हुई है।      

सो नहीं पा पाए भाई-बहन
छपार। बसेड़ा में भी शनिवार सुबह बारिश के चलते कच्चा मकान गिर गया, जिसकी चपेट में आने से उसमें रहने वाले भाई-बहन बाल-बाल बचे। बसेड़ा गांव निवासी इस्माइल व उसकी पत्नी की कई साल पूर्व बीमारी से मौत हो चुकी है। दोनों की मौत के बाद उनके दो बच्चे 14 वर्षीय गुलिस्तां व 12 वर्ष का बेटा शहजाद ही उनके कच्चे मकान में रहते हैं।


बारिश से उनके मकान की छत से पानी टपक रहा था, जिसके चलते शुक्रवार रात भाई-बहन नहीं सो पाए। शनिवार सुबह करीब पांच बजे अचानक उनके कच्चे मकान की छत गिर गई, लेकिन ऐन वक्त पर इसका अहसास होने से भाई-बहन दोनों कमरे से बाहर आ गए, जिसके चलते वे बाल-बाल बचे।   
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