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Muzaffarnagar News: रोज लगता है, दरवाजा खटखटाएगा बेटा और कुंडी खुलते ही बोलेगा...मां

Sun, 11 May 2025 01:01 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 11 May 2025 01:01 AM IST
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Every day it seems that my son will knock on the door and as soon as the latch opens hEvery day it seems that my son will knock on the door and as soon as the latch opens he will say... Maae will say... Maa
मुजफ्फरनगर। वीरांगना मां ने जन्म दिया और बेटे मातृभूमि पर कुर्बान हो गए। सालों बाद भी मां की आंखों के आंसू गौरवान्वित होते हैं, लेकिन बेटे भुलाए नहीं भूलते। बचपन याद आता है और याद आती है, उनकी देश की सीमा पर रवानगी। फिर एक शहादत की चिट्ठी और जिंदगीभर के लिए आंगन का सूनापन। मां का दिल है, फिर भी रोज लगता है, जैसे किसी दिन बेटा दरवाजा खटखटाएगा और कुंडी खोलते ही बोलेगा...मां।
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हबीबपुर सीकरी की मुशबरा बेगम (85) की आंखों से बेटे का जिक्र छिड़ते ही आंसू बहने लगते हैं। वर्ष 1993 में लद्दाख में तैनाती के दौरान सैनिक शहजाद खान शहीद हुआ था। बड़े साहस के साथ कहती हैं कि बेटे ने देश की सेवा के लिए अपनी जान को कुर्बान किया है, मेरा उनका दूसरा बेटा भी बीएसफ में है। मुझे अपने बेटों पर गर्व है।
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वर्ष 2008 में बुड़ीना कलां के वरुणदीप लाटियान शहीद हो गए थे। इकलौते बेटे की मां माया देवी बताती हैं कि सेना में गए हुए पांच साल ही हुए थे। जब बेटा छुट्टी पर आता तो दिवाली होती थी। वह चला जाता तो मन नहीं लगता था। जननी मां को अकेला छोड़कर मातृभूमि का फर्ज निभाया। एक ही बात पर फख्र है कि वह तिरंगे में लिपटकर घर आया।
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देश की सेवा के लिए बलिदान हुआ

पुलवामा हमले में शहीद हुए सिपाही प्रशांत की मां रीता देवी बताती हैं कि उनका बेटा पढ़ने और खेलने दोनों में तेज था। 2016 में खेल कोटे में भर्ती हुआ। सेना में गए हुए चार साल ही हुए थे कि हमले के दौरान शहीद हो गया। उसकी कमी तो हर वक्त खलती है, लेकिन देश ही सेवा के लिए गया था, उस पर बलिदान हुआ।

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भारत मां को मेरे लाल की जरूरत थी

बुढ़ाना के गांव राजपुर छाजपुर के कंवर सिंह ऑपरेशन रक्षक के दौरान शहीद हुए थे। गांव के प्राथमिक विद्यालय से पढ़ाई के बाद दिगंबर जैन कॉलेज बड़ौत से बीकॉम की पढ़ाई के दौरान ही सेना में भर्ती हुए थे। उनकी माता बोहती देवी बताती हैं कि सेना में गए हुए दूसरा साल ही था कि शहीद हो गया। यही सोचा कि मुझसे ज्यादा भारत मां को मेरे लाल की जरूरत थी।


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मातृभूमि के लिए बेटों की कुर्बानियों का अंतहीन सिलसिला

मुजफ्फरनगर। आज लोग मातृ दिवस मना रहे हैं। अपनी मां को गले लगाकर या संदेश भेज कर मां की ममता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है। जिले में मातृभूमि के लिए बेटों की कुर्बानियों का अंतहीन सिलसिला है। वर्ष 1948 से 2022 तक 43 जवान शहीद हुए हैं। साहसी माताओं की साहसी संतानों ने सरहद पर जाकर देश के दुश्मनों को सबक सिखाने में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी।

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