फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   Doctors are the real heroes in the Corona era

कोरोना काल में डॉक्टर ही हैं असली होरी

Thu, 01 Jul 2021 12:01 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 01 Jul 2021 12:01 AM IST
विज्ञापन
Doctors are the real heroes in the Corona era
डॉ मनोज काबरा। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
कोरोना काल में डॉक्टर ही हैं असली हीरो
विज्ञापन

मुजफ्फरनगर। कोरोना काल में डॉक्टरों की सेवाएं पूरे देश के लिए अनुकरणीय है। खुद कोरोना संक्रमित होने के बावजूद ड्यूटी का फर्ज निभाते चिकित्सकों का जज्बा बेमिसाल है। वैश्विक महामारी में दूसरों की जान बचाने के प्रयास में जुटे डॉक्टर ही समाज के असली हीरो हैं। पूरी तैयारियों के साथ लोगों को अब तीसरी लहर से बचने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
चिकित्सा जगत की पहचान हैं पद्मश्री प्रोफेसर डॉ. रविकांत
चिकित्सा क्षेत्र में देश के प्रतिष्ठित अवार्ड डॉ. बीसी राय से अलंकृत जनपद सदर ब्लॉक के गांव चांदपुर मखियाली निवासी प्रोफेसर पद्मश्री डा. रविकांत जिले की शान हैं। वर्तमान में वह एम्स ऋषिकेश के डायरेक्टर हैं। उन्हें वर्ष 2016 में भारत सरकार की तरफ से राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री पुरस्कार मिला। उनके अनूठे योगदान और कुशल प्रशासक के मद्देनजर उन्हें प्रदेश सरकार ने यश भारती पुरस्कार से सम्मानित किया। डॉ. रविकांत ने कोरोना संक्रमण के दरमियान डेढ़ साल कोरोना महामारी से जुड़ी अनेक सेमिनार में टिप्स दिए। उनके नेतृत्व में एम्स ने तीसरी लहर से बचने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। उन्होंने केजीएमयू लखनऊ के वीसी के पद को भी सुशोभित किया है। उनका कहना है विपरीत परिस्थितियों में कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। कोरोना संकट से सतर्कता से हम जीतेंगे।
विज्ञापन

चिकित्सा पेशे की गरिमा अहम: सुधीर
चिकित्सा जगत में जिले के सोहंजनी तगान निवासी डॉ. सुधीर त्यागी की न्यूरो सर्जन के रूप में ख्याति देश-विदेश में है। वर्तमान में वह दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में वरिष्ठ न्यूरो सर्जन के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि कोरोना काल में सर्जन के कार्य को सबसे बड़ा जोखिम माना जाता है। बावजूद उन्होंने निरंतर सेवाएं दीं। उच्च ओहदे के बावजूद पेशे की गरिमा उनका अनमोल रत्न है। हर रविवार को वह पैतृक गांव सोहंजनी में आते हैं और आसपास के लोगों को मुफ्त में परामर्श देते है। कहते हैं कि कोरोना का खतरा टला नहीं है, कम हुआ है। तीसरी लहर के लिए आमजन को सावधानी बरतनी होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

कोरोना संक्रमित होने पर भी नहीं मानी हार
मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर डॉ. भारती माहेश्वरी का जज्बा बेमिसाल है। परिवार का फिक्र किए बिना उन्होंने कोविड वार्ड में पूरे समय सेवाएं दी और संक्रमित हो गईं। दो दशक से वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ रूप में सेवाएं देने वाली डॉक्टर भारती कहती हैं कि कोरोना के दौर में 53 ऑपरेशन, नौ नॉर्मल डिलीवरी और 40 महिला रोगियों का अन्य बीमारियों में इलाज किया। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। कोरोना संक्रमित होने पर क्रिटिकल हो गई, लेकिन हौसले से स्वस्थ होकर ड्यूटी पर आ गई हैं। डीएम ने उन्हें नारी शक्ति सम्मान से सम्मानित किया। वह देश की प्रतिष्ठित संस्था एफओजीएसआई की एमटीपी कमेटी की चेयरमैन हैं। कहती हैं कि हौसले के साथ फर्ज को निभा रही हैं। खतरों से घबराना उनकी किताब में नहीं है।

वैक्सीनेशन है कोरोना का बचाव
मखियाली सीएचसी प्रभारी डॉ. महक सिंह कोरोना की चपेट में आ गए थे। स्वस्थ होने के बाद अवकाश नहीं लिया, बल्कि ड्यूटी पर डटकर सेवाएं देनी शुरू कर दी। कहते हैं खुद और बच्चों को सामाजिक दूरी का पालन करना है। कोविड नियमों का पालन करते हुए टीकाकरण जरूर लगवाएं। कोरोना को बचाने का वहीं रामबाण है।

पदमश्री प्रोफेसर डा.रविकांत

पदमश्री प्रोफेसर डा.रविकांत- फोटो : MUZAFFARNAGAR

न्यूरो सर्जन डा. सुधीर त्यागी

न्यूरो सर्जन डा. सुधीर त्यागी- फोटो : MUZAFFARNAGAR

डा. महक सिंह सीएचसी प्रभारी मखियाली

डा. महक सिंह सीएचसी प्रभारी मखियाली- फोटो : MUZAFFARNAGAR

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed