{"_id":"5f664fb38ebc3e0f4468abe2","slug":"dm-listened-to-complaints-during-the-resolution-day-muzaffarnagar-news-mrt5021572173","type":"story","status":"publish","title_hn":"आठ साल से शुद्ध पेयजल को तरस रहे हजारों ग्रामीण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आठ साल से शुद्ध पेयजल को तरस रहे हजारों ग्रामीण
विज्ञापन
पीनना गांव में अधूरी पड़ी पानी की टंकी।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
आठ साल से शुद्ध पेयजल के लिए तरसते ग्रामीण
मुजफ्फरनगर। ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने को सरकार ने जिले के 24 ग्रामों में टंकी लगा कर घर-घर जल पहुंचाने की योजना बनाई, मगर आठ साल बाद भी योजना अधर में लटकी है। 24 गांव में शुरू की गई 91.13 करोड़ रुपये की परियोजनाएं पूरी नहीं हो सकी। आज भी 15 ग्रामों में परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं। इन ग्रामों के हजारों ग्रामीण शुद्ध पेयजल को तरस रहे हैं। जल निगम अभी भी इस परियोजनाओं को पूरा करने के प्रति गंभीर नहीं है। वो नई आई परियोजनाओं पर ज्यादा ध्यान दे रहा है।
जनपद के अनेक ऐसे गांव हैं, जहां पर पानी पीने के योग्य नहीं है, फिर भी ग्रामीण पी रहे हैं, क्योंकि करें भी करें क्या। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच रिपोर्ट के बाद जिले के 24 ऐसे ग्रामों को चिह्नित किया गया था, जहां का पानी प्रदूषित है। इसके बाद वर्ष 2012 में राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना (अब घर-घर नल योजना) में पानी की टंकी लगाने को मंजूरी मिली थी। इसके लिए सरकार की ओर से 91.13 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था। उप्र जल निगम को दो साल में इस ग्रामों में परियोजनाएं पूरी करके ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराए के आदेश मिले थे। आठ साल बीते हुए, मगर परियोजनाएं पूरी नहीं हो सकी। ये परियोजनाएं अभी भी अधर में लटकी है। जबकि इन परियोजनाओं में खर्च का बजट बढ़ता गया। आठ साल बाद केवल नौ ग्रामों में टंकियों का निर्माण पूरा हो सका है, वहां भी सभी घरों में पानी नहीं मिल पा रहा है।
इन 15 ग्रामों में अधूरी परियोजनाएं
- बसेडा़, कसरेवा, पीनना, मोरना, भोपा, संभलहेड़ा, मेहलकी, मंसूरपुर, रसूलपुर जाटान, जौली, तिसंग, कुल्हेड़ी, रियावली नंगला, उत्तरी घटायन और बसधाड़ा में परियोजनाएं अधूरी पड़ी है। इन ग्रामों के ग्रामीणों को अभी तक एक बूंद भी शुद्ध पेयजल नहीं मिला है। वो हैंडपंप के पानी पर ही निर्भर है। इनमें बसधाडा गांव में तो टंकी निर्माण के लिए जल निगम को जमीन ही नहीं मिली, इसलिए यहां अब टंकी का निर्माण ही नहीं होगा।
विज्ञापन
नौ गांव में टंकी चालू की
- जल निगम की ओर से हाल में ही नौ गांव बोपाड़ा, चंदसीना, जसोई, सरवट, खुड्डा, सांझक, दधेडूखुर्द, खाईखेड़ी और बलवाखेड़ी में परियोजनांए पूरी की है। मगर इन ग्रामों में पानी की सप्लाई तो शुरू कर दी गई, मगर अभी हर घर तक पानी नहीं पहुंच रहा है। बोपाड़ा गांव का भूजल सबसे प्रदूषित है। यहां पर तीन माह पहले ही टंकी का निर्माण पूरा हुआ, मगर अभी 40 प्रतिशत ग्रामीणों के घर तक पानी नहीं पहुंचा है।
----------
इन्होंने कहा...
- ये सब पुरानी परियोजनाएं है, जो किसी न किसी कारण से अधूरी रही। 24 ग्रामों में से नौ में परियोजनाएं पूरी हो चुकी है, बाकी 14 में अभी काम अधूरा है। बसधाड़ा में जमीन नहीं मिलने के कारण परियोजना खत्म हो गई है।
योगेश रायजादा
अधिशासी अभियंता
उप्र जल निगम, ग्रामीण मुजफ्फरनगर
काली-हिंडन के किनारे बसे 44 गांव के ग्रामीणों को मिलेगी राहत
मुजफ्फरनगर। जिले में काली और हिंडन नदी का पानी प्रदूषित होने के कारण इनके किनारे बसें ग्रामों का भूगर्भ जल भी प्रदूषित हो गया है। प्रदूषित पानी पीने से ग्रामीण बीमार हो रहे है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने इसे गंभीरता से लेकर ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे। केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान के प्रयास से काली और हिंडन नदी के किनारे बसे 44 ग्रामों में पानी की टंकी के लिए 88.86 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत हुई। जिन्हें इसी वर्ष दिसंबर तक पूरा करने के निर्देश जल निगम को दिए गए हैं। इनमें 10 गांव में टंकी के निर्माण की जिम्मेदारी जल निगम की नगर इकाई और बाकी 34 ग्रामों में जल निगम ग्रामीण इकाई को मिली है।
इन ग्रामों में होगा टंकी का निर्माण
धनसैनी, तितावी, मंधेड़ा, धौलरा, बहादरपुर, आदमपुर, हबीबपुर, कितास, कुतुबपुर दताना, सदरुद्दीननगर, बिटावदा, नसीरपुर, बडकता, शाहपुर बसी, सुल्तानपुर, ढिंढावली, हडौली, जीवना, उमरपुर, इंचौडा, अटाली, किनौनी, बडौदा, मलीरा, बवाना, लकडसंधा, भसाना, मिमलाना, बिराल, बामनहेड़ी, चंधेडी, लच्छेडा, डूंगर, चांदपुर, दुर्गनपुर, बेगराजपुर, हरियाखेड़ा, खेडीतगान, नगवा, बुडीनाकलां, सरनावली, कुटबा, उकावली व नवादा शामिल हैं।
इन्होंने कहा..
- हिंडन और काली नदी के किनारे 44 ग्रामों में नई परियोजनाएं मंजूर हुई है। नगर ईकाई को पहले दस ग्रामों में परियोजनाएं पूरी करने की जिम्मेदारी मिली है। काम शुरू हो गया है, प्रयास है कि दिसंबर तक ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।
- राजीव त्यागी
-अधिशासी अभियंता
नगर ईकाई जल निगम
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर। ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने को सरकार ने जिले के 24 ग्रामों में टंकी लगा कर घर-घर जल पहुंचाने की योजना बनाई, मगर आठ साल बाद भी योजना अधर में लटकी है। 24 गांव में शुरू की गई 91.13 करोड़ रुपये की परियोजनाएं पूरी नहीं हो सकी। आज भी 15 ग्रामों में परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं। इन ग्रामों के हजारों ग्रामीण शुद्ध पेयजल को तरस रहे हैं। जल निगम अभी भी इस परियोजनाओं को पूरा करने के प्रति गंभीर नहीं है। वो नई आई परियोजनाओं पर ज्यादा ध्यान दे रहा है।
जनपद के अनेक ऐसे गांव हैं, जहां पर पानी पीने के योग्य नहीं है, फिर भी ग्रामीण पी रहे हैं, क्योंकि करें भी करें क्या। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच रिपोर्ट के बाद जिले के 24 ऐसे ग्रामों को चिह्नित किया गया था, जहां का पानी प्रदूषित है। इसके बाद वर्ष 2012 में राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना (अब घर-घर नल योजना) में पानी की टंकी लगाने को मंजूरी मिली थी। इसके लिए सरकार की ओर से 91.13 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था। उप्र जल निगम को दो साल में इस ग्रामों में परियोजनाएं पूरी करके ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराए के आदेश मिले थे। आठ साल बीते हुए, मगर परियोजनाएं पूरी नहीं हो सकी। ये परियोजनाएं अभी भी अधर में लटकी है। जबकि इन परियोजनाओं में खर्च का बजट बढ़ता गया। आठ साल बाद केवल नौ ग्रामों में टंकियों का निर्माण पूरा हो सका है, वहां भी सभी घरों में पानी नहीं मिल पा रहा है।
विज्ञापन
इन 15 ग्रामों में अधूरी परियोजनाएं
- बसेडा़, कसरेवा, पीनना, मोरना, भोपा, संभलहेड़ा, मेहलकी, मंसूरपुर, रसूलपुर जाटान, जौली, तिसंग, कुल्हेड़ी, रियावली नंगला, उत्तरी घटायन और बसधाड़ा में परियोजनाएं अधूरी पड़ी है। इन ग्रामों के ग्रामीणों को अभी तक एक बूंद भी शुद्ध पेयजल नहीं मिला है। वो हैंडपंप के पानी पर ही निर्भर है। इनमें बसधाडा गांव में तो टंकी निर्माण के लिए जल निगम को जमीन ही नहीं मिली, इसलिए यहां अब टंकी का निर्माण ही नहीं होगा।
विज्ञापन
नौ गांव में टंकी चालू की
- जल निगम की ओर से हाल में ही नौ गांव बोपाड़ा, चंदसीना, जसोई, सरवट, खुड्डा, सांझक, दधेडूखुर्द, खाईखेड़ी और बलवाखेड़ी में परियोजनांए पूरी की है। मगर इन ग्रामों में पानी की सप्लाई तो शुरू कर दी गई, मगर अभी हर घर तक पानी नहीं पहुंच रहा है। बोपाड़ा गांव का भूजल सबसे प्रदूषित है। यहां पर तीन माह पहले ही टंकी का निर्माण पूरा हुआ, मगर अभी 40 प्रतिशत ग्रामीणों के घर तक पानी नहीं पहुंचा है।
----------
इन्होंने कहा...
- ये सब पुरानी परियोजनाएं है, जो किसी न किसी कारण से अधूरी रही। 24 ग्रामों में से नौ में परियोजनाएं पूरी हो चुकी है, बाकी 14 में अभी काम अधूरा है। बसधाड़ा में जमीन नहीं मिलने के कारण परियोजना खत्म हो गई है।
योगेश रायजादा
अधिशासी अभियंता
उप्र जल निगम, ग्रामीण मुजफ्फरनगर
काली-हिंडन के किनारे बसे 44 गांव के ग्रामीणों को मिलेगी राहत
मुजफ्फरनगर। जिले में काली और हिंडन नदी का पानी प्रदूषित होने के कारण इनके किनारे बसें ग्रामों का भूगर्भ जल भी प्रदूषित हो गया है। प्रदूषित पानी पीने से ग्रामीण बीमार हो रहे है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने इसे गंभीरता से लेकर ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे। केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान के प्रयास से काली और हिंडन नदी के किनारे बसे 44 ग्रामों में पानी की टंकी के लिए 88.86 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत हुई। जिन्हें इसी वर्ष दिसंबर तक पूरा करने के निर्देश जल निगम को दिए गए हैं। इनमें 10 गांव में टंकी के निर्माण की जिम्मेदारी जल निगम की नगर इकाई और बाकी 34 ग्रामों में जल निगम ग्रामीण इकाई को मिली है।
इन ग्रामों में होगा टंकी का निर्माण
धनसैनी, तितावी, मंधेड़ा, धौलरा, बहादरपुर, आदमपुर, हबीबपुर, कितास, कुतुबपुर दताना, सदरुद्दीननगर, बिटावदा, नसीरपुर, बडकता, शाहपुर बसी, सुल्तानपुर, ढिंढावली, हडौली, जीवना, उमरपुर, इंचौडा, अटाली, किनौनी, बडौदा, मलीरा, बवाना, लकडसंधा, भसाना, मिमलाना, बिराल, बामनहेड़ी, चंधेडी, लच्छेडा, डूंगर, चांदपुर, दुर्गनपुर, बेगराजपुर, हरियाखेड़ा, खेडीतगान, नगवा, बुडीनाकलां, सरनावली, कुटबा, उकावली व नवादा शामिल हैं।
इन्होंने कहा..
- हिंडन और काली नदी के किनारे 44 ग्रामों में नई परियोजनाएं मंजूर हुई है। नगर ईकाई को पहले दस ग्रामों में परियोजनाएं पूरी करने की जिम्मेदारी मिली है। काम शुरू हो गया है, प्रयास है कि दिसंबर तक ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।
- राजीव त्यागी
-अधिशासी अभियंता
नगर ईकाई जल निगम