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संभल जाओ... गन्ना प्रजाति 0238 में लग रहा है रोग
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गन्ने की फसल।
- फोटो : ????? ?? ????
संभल जाओ... गन्ना प्रजाति 0238 में लग रहा है रोग
मुजफ्फरनगर। जिले के किसानों में गन्ने की 0238 प्रजाति को लेकर जबर्दस्त क्रेज है, लेकिन अब इस प्रजाति पर संकट है। पूर्वी और मध्य यूपी में यह प्रजाति बीमारी की चपेट में है तथा अगेती प्रजाति के कारण इसमें बीमारी लगने का समय शुरू हो गया है। मुजफ्फरनगर जिले में 96 प्रतिशत भूमि पर इसी प्रजाति गन्ना उगाया जा रहा है। यदि समय रहते किसान नहीं जागे और गन्ने की प्रजाति नहीं बदली तो वह दिन दूर नहीं, जब 0238 में बीमारी आने से गन्ने की फसल चौपट हो जाएगी और किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। भविष्य के हालात को देखते हुए प्रदेश सरकार ने भी गन्ना विभाग को एक पत्र जारी किया है, जिसमें एक प्रजाति को 60 प्रतिशत से अधिक नहीं उगाने के लिए कहा है।
मुजफ्फरनगर जिले में खेती की दो लाख दस हजार हेक्टेयर भूमि है। इस समस्त भूमि में से एक लाख 47 हजार हेक्टेयर में गन्ने की खेती हो रही है। बीते तीन-चार साल से किसानों में 0238 का क्रेज बढ़ने से हालात यह हैं कि एक लाख 41 हजार हेक्टेयर भूमि में अकेले 0238 की खेती हो रही है। 0238 प्रजाति ने गन्ने की खेती में पुराने सभी रिकार्ड तोड़े हैं। तितावी के किसान उमेश ने अपने खेत में 140 क्विंटल प्रति बीघा गन्ना उत्पादन किया है। सामान्य रूप से 90 से 100 क्विंटल प्रति बीघा इसकी उपज हो रही है। हालांकि बीते वर्ष जिले का औसत 864 क्विंटल प्रति हेक्टेयर था, लेकिन इसमें गंगा के खादर से लेकर उन किसानों के खेत भी शामिल हैं जो खेती में मेहनत कम करते हैं। 0238 के अलावा छह हेक्टेयर में यहां 8436 और 98014 प्रजातियों की खेती हो रही है। जिला गन्ना अधिकारी आरडी द्विवेदी कहते हैं कि हम किसानों को जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं कि एक ही प्रजाति का गन्ना पैदा न करें, लेकिन किसानों पर ज्यादा असर नहीं हो रहा है।
गारंटी का समय हो चुका है पूरा: वीरेश
मुजफ्फरनगर। गन्ना शोध केंद्र के निदेशक डॉक्टर वीरेश कुमार ने बताया कि अगेती प्रजाति की आयु सात से 15 साल के बीच होती है। 0238 प्रजाति को लेकर वर्ष 2002 में काम शुरू हुआ। तमाम टेस्टिंग के बाद 2012 में यह रिलीज हुई। प्रजाति को सात साल हो चुके हैं। यही कारण है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश और मध्य यूपी में इस प्रजाति का गन्ना बीमारी की चपेट में है। केवल सहारनपुर और मेरठ मंडल बचा है, जिसमें इस प्रजाति में अभी बीमारी नहीं आई है।
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कोयंबटूर में तैयार होता है बीज
मुजफ्फरनगर। डॉक्टर वीरेश कुमार ने बताया कि गन्ने की जो भी प्रजाति रिलीज होती है, उसका बीज कोयंबटूर में तैयार होता है। गन्ने पर फूल आते हैं, फिर उससे बीज तैयार किया जाता है। 14 गन्ना संस्थानों में लगातार टेस्टिंग होती है। 10-12 साल में एक प्रजाति तैयार हो पाती है। 0238 की टेस्टिंग मुजफ्फरनगर के गन्ना शोध संस्थान में भी हुई थी।
13235 बनेगी 0238 प्रजाति का विकल्प
मुजफ्फरनगर। आने वाले समय में 0238 के विकल्प के रूप में गन्ना वैज्ञानिक 13235 प्रजाति को ला रहे हैं। डॉक्टर वीरेश कुमार ने बताया कि इस प्रजाति का गन्ना 1148 जैसा मोटा होगा। उपज और रिकवरी में यह 0238 के बराबर रहेगी। इस प्रजाति में पेस्टीसाइड की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। अभी इसका बीज नहीं है। अगले साल से किसानों को इस प्रजाति का बीज उपलब्ध कराया जाएगा। उनका कहना है कि गन्ने की 118, 3234 और 5199 प्रजाति भी अच्छी है। किसान इनकी उपज भी कर सकते हैं।
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मुजफ्फरनगर। जिले के किसानों में गन्ने की 0238 प्रजाति को लेकर जबर्दस्त क्रेज है, लेकिन अब इस प्रजाति पर संकट है। पूर्वी और मध्य यूपी में यह प्रजाति बीमारी की चपेट में है तथा अगेती प्रजाति के कारण इसमें बीमारी लगने का समय शुरू हो गया है। मुजफ्फरनगर जिले में 96 प्रतिशत भूमि पर इसी प्रजाति गन्ना उगाया जा रहा है। यदि समय रहते किसान नहीं जागे और गन्ने की प्रजाति नहीं बदली तो वह दिन दूर नहीं, जब 0238 में बीमारी आने से गन्ने की फसल चौपट हो जाएगी और किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। भविष्य के हालात को देखते हुए प्रदेश सरकार ने भी गन्ना विभाग को एक पत्र जारी किया है, जिसमें एक प्रजाति को 60 प्रतिशत से अधिक नहीं उगाने के लिए कहा है।
मुजफ्फरनगर जिले में खेती की दो लाख दस हजार हेक्टेयर भूमि है। इस समस्त भूमि में से एक लाख 47 हजार हेक्टेयर में गन्ने की खेती हो रही है। बीते तीन-चार साल से किसानों में 0238 का क्रेज बढ़ने से हालात यह हैं कि एक लाख 41 हजार हेक्टेयर भूमि में अकेले 0238 की खेती हो रही है। 0238 प्रजाति ने गन्ने की खेती में पुराने सभी रिकार्ड तोड़े हैं। तितावी के किसान उमेश ने अपने खेत में 140 क्विंटल प्रति बीघा गन्ना उत्पादन किया है। सामान्य रूप से 90 से 100 क्विंटल प्रति बीघा इसकी उपज हो रही है। हालांकि बीते वर्ष जिले का औसत 864 क्विंटल प्रति हेक्टेयर था, लेकिन इसमें गंगा के खादर से लेकर उन किसानों के खेत भी शामिल हैं जो खेती में मेहनत कम करते हैं। 0238 के अलावा छह हेक्टेयर में यहां 8436 और 98014 प्रजातियों की खेती हो रही है। जिला गन्ना अधिकारी आरडी द्विवेदी कहते हैं कि हम किसानों को जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं कि एक ही प्रजाति का गन्ना पैदा न करें, लेकिन किसानों पर ज्यादा असर नहीं हो रहा है।
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गारंटी का समय हो चुका है पूरा: वीरेश
मुजफ्फरनगर। गन्ना शोध केंद्र के निदेशक डॉक्टर वीरेश कुमार ने बताया कि अगेती प्रजाति की आयु सात से 15 साल के बीच होती है। 0238 प्रजाति को लेकर वर्ष 2002 में काम शुरू हुआ। तमाम टेस्टिंग के बाद 2012 में यह रिलीज हुई। प्रजाति को सात साल हो चुके हैं। यही कारण है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश और मध्य यूपी में इस प्रजाति का गन्ना बीमारी की चपेट में है। केवल सहारनपुर और मेरठ मंडल बचा है, जिसमें इस प्रजाति में अभी बीमारी नहीं आई है।
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कोयंबटूर में तैयार होता है बीज
मुजफ्फरनगर। डॉक्टर वीरेश कुमार ने बताया कि गन्ने की जो भी प्रजाति रिलीज होती है, उसका बीज कोयंबटूर में तैयार होता है। गन्ने पर फूल आते हैं, फिर उससे बीज तैयार किया जाता है। 14 गन्ना संस्थानों में लगातार टेस्टिंग होती है। 10-12 साल में एक प्रजाति तैयार हो पाती है। 0238 की टेस्टिंग मुजफ्फरनगर के गन्ना शोध संस्थान में भी हुई थी।
13235 बनेगी 0238 प्रजाति का विकल्प
मुजफ्फरनगर। आने वाले समय में 0238 के विकल्प के रूप में गन्ना वैज्ञानिक 13235 प्रजाति को ला रहे हैं। डॉक्टर वीरेश कुमार ने बताया कि इस प्रजाति का गन्ना 1148 जैसा मोटा होगा। उपज और रिकवरी में यह 0238 के बराबर रहेगी। इस प्रजाति में पेस्टीसाइड की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। अभी इसका बीज नहीं है। अगले साल से किसानों को इस प्रजाति का बीज उपलब्ध कराया जाएगा। उनका कहना है कि गन्ने की 118, 3234 और 5199 प्रजाति भी अच्छी है। किसान इनकी उपज भी कर सकते हैं।