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Deport From America: मैक्सिको में घुसते ही पकड़ लिया, डिटेंशन सेंटर में भारतीयों को ऐसे दी गईं यातनाएं

Fri, 07 Feb 2025 12:22 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर Published by: मोहम्मद मुस्तकीम Updated Fri, 07 Feb 2025 12:22 PM IST
सार

अमेरिका से वापस भारत भेजे गए रक्षित और देवेंद्र विर्क ने अपने हालात बयान किए तो रौंगटे खड़े हो गए। यातनाएं तो दी ही गईं, दोनों के करीब 40-40 लाख रुपये भी खर्च हो गए। 

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Deport From America: Caught as soon as they entered Mexico, Indians were tortured like this...
अमेरिका से लौटा देवेंद्र। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रसूलपुर जाटान का रहने वाला रक्षित बालियान इंजीनियरिंग के सुनहरे ख्वाब लेकर सात महीने पहले अमेरिका में दाखिल हुआ था। नौकरी तो नहीं मिली, मगर अवैध प्रवेश के आरोप में डिटेंशन सेंटर में रखा गया। 40 लाख रुपये खर्च हुए। बेटा किसी तरह वापस लौटा तो परिवार ने राहत की सांस ली।
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सात महीने पहले परिचितों के जरिए रक्षित की मुलाकात पानीपत के एजेंट से हुई तो अमेरिका जाने की तैयारियां शुरू हो गईं। सेना से सेवानिवृत्त सुधीर बालियान वर्तमान में यूपीसीए में कार्यरत हैं। रुपयों का इंतजाम कर बेटे को अमेरिका भेज दिया गया।
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रक्षित ने बताया कि मैक्सिको के रास्ते प्रवेश किया था, लेकिन अमेरीकी सेना ने पकड़ लिया और उसे डिटेंशन सेंटर ले गई। वहां पर उसे सात महीने रखा गया। इस दौरान बीच में परिवार से भी बात कराई गई।
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अमेरिका में पहले से ही कई परिचित
रक्षित का कहना है कि अमेरिका में उनके कई परिचित रह रहे हैं। इसी वजह से पढ़ाई करने के लिए वह भी गया था। उसके पास वैध वीजा था और इंजीनियरिंग की पढ़ाई करनी थी, लेकिन अमेरिका की सरकार ने उन्हें गलत तरीके से वापस भेजा है। वह अकेला नहीं, बल्कि अन्य लोगों के पास भी वैध वीजा था, जिन्हें जबरन वापस भेजा गया है।
दिल्ली से लौटा और मेरठ पहुंच गया
छात्र रक्षित दिल्ली से वापस रसूलपुर जाटान लौटा। इसके बाद परिजनों ने उसे मेरठ के कंकरखेड़ा स्थित आवास पर भेज दिया। रक्षित ने कहा कि उनके करीब 40 लाख रुपये खर्च हुए हैं।
घर पर सन्नाटा, परिवार ने साधी चुप्पी
रक्षित के रसूलपुर स्थित घर पर सन्नाटा पसरा रहा। परिवार दुखी रहा। प्रकरण में माता-पिता और अन्य सदस्यों ने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया। छात्र ने कहा कि वह फिर पढ़ाई करेगा और आगे बढ़ेगा।
 

देवेंद्र बोला, कोई एजेंट के चक्कर में मत फंस जाना
अपने गांव मारकपुर पहुंचे देवेंद्र ने कहा कि कोई भी एजेंट के चक्कर में मत फंस जाना। विदेश ले जाने के नाम पर ठगी करते हैं। मोटी कमाई का लालच दिया जाता है और सफर शुरू होते ही ब्लैकमेलिंग शुरू कर देते हैं। उन्हें गलत तरीके से फंसाकर ले जाया गया। वह अपने परिवार की आय बढ़ाने के लिए विदेश जाना चाहते थे।

पॉलीथिन पर सुलाए, कभी हीटर चला तो कभी एसी
अमेरिका से लौटे देवेंद्र विर्क ने कहा कि डिटेंशन सेंटर में बेहद खराब वक्त गुजरा। बिस्तर की जगह सफेद रंग की पॉलीथिन दी जाती थी। कभी हीटर चला देते थे तो कभी तेजी से एसी चलाते थे। खाने में सिर्फ चिप्स, चॉकलेट और घटिया खाना दिया गया। उनका 37 घंटे का सफर रहा। हवाई यात्रा के दौरान भी खाना नहीं दिया गया।

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