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Muzaffarnagar News: लजीज स्वाद वाला पेड़ा बन गया सीकरी की पहचान

Mon, 08 Jul 2024 03:58 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jul 2024 03:58 AM IST
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Delicious tasting Peda became the identity of Sikri
भोपा। खास अंदाज में बनाए जाने वाले पेड़े ने सीकरी की पहचान सरहद पार सऊदी अरब और पाकिस्तान तक है। खातिरदारी में परोसने के लिए लोग दूर-दराज से पेड़े को खरीदने के लिए आते हैं। सर्वसमाज के त्योहार में पेड़ा सबकी पहली पसंद है।
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भोपा से लगभग 12 किमी की दूरी पर बसे सीकरी गांव में बनने वाला पेड़ा अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। पेड़ा विक्रेता दिलशाद भारती बताते हैं कि उनके पिता गुलाम नबी को बचपन में पेड़ा बनाने का हुनर उनके दादा मोहम्मद अली से मिला था। तभी से वह कड़ी मेहनत और शुद्धता का ध्यान रखते हुए पेड़ा बनाने का कार्य करते रहे। अब गांव की पहचान इसी पेड़े के नाम से हो रही है।
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पेड़ा बनाने वाले शफात नबी, मोहम्मद किशाल, मोहम्मद मुस्तकीम कहते हैं कि गांव को पेड़े से पहचान मिली है। अब्दुल रज्जाक का कहना है कि पेड़ा और उर्स सीकरी की दूर तक पहचान है। पूर्व प्रधान के पति इरफान उर्फ अप्पी प्रधान का कहना है कि सीकरी के पेड़े ने अपने गांव की शोहरत को कम नहीं होने दिया। गांव के 10 से अधिक परिवार पेड़ा बना रहे हैं।
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शुगर वालों के लिए भी बनते हैं पेड़े
शुगर वालों के लिए आर्डर पर तैयार किया जाता है। सीकरी गांव में बनाए जा रहे पेड़े की कीमत 340 प्रति किलो होती है।
इस तरह विदेश में पहुंच गया स्वाद
सीकरी मुस्लिम बाहुल्य गांव है, जिसमें सऊदी अरब और पाकिस्तान से मेहमानों का आना-जाना लगा रहता है। विदेशों से आने वाले मेहमानों सहित अन्य मेहमान लोगों की मेहमान नवाजी इन प्रसिद्ध पेड़ों से ही की जाती है।
उर्स में भी लोगों की पहली पसंद
सीकरी में 50 वर्षों से भी अधिक समय से सूफी संत बाबा अब्दुल लतीफ की दरगाह पर उर्स का आयोजन होता चला आ रहा है। उर्स में देश ही नहीं विदेशों से भी लोग आते हैं। उर्स में भी पेड़े की मांग अधिक रहती है। इसके साथ ही आसपास लगने वाले मेलों में भी सीकरी का पेड़ा के नाम से अनेकों दुकान लगाई जाती हैं।
स्वाद से पहचान खुशी की बात : प्रधान
ग्राम प्रधान राजेंद्र सिंह का कहना है कि सीकरी के पेड़े ने गांव को बड़ी पहचान दी है। इसी के साथ साथ संत सूफी अब्दुल लतीफ की दरगाह पर लगने वाले उर्स से भी गांव सीकरी को एक बेहतर पहचान मिली है।

पेड़े का कोई जवाब नहीं : शाहनवाज

गांव के युवक शाहनवाज का कहना है कि गांव में नौ दशक से पेड़े बनाने का कार्य किया जा रहा है वह एक मिसाल है, साथ ही पेड़ों के कारण गांव सीकरी का नाम दूर-दूर तक है।
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