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Muzaffarnagar News: तेंदुआ जोन घोषित, पकड़ने के प्रयास नहीं
Tue, 15 Sep 2026 07:44 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 15 Sep 2026 07:44 PM IST
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मध्य गंग नहर के संपर्क मार्ग पर दहशत में सफर कर रहे ग्रामीण, किसान खेत में, बच्चे स्कूल जाने से कतरा रहे
वन विभाग के प्रयास से संतुष्ट नहीं ग्रामीण
बोले-तेंदुआ पकड़ने के गंभीर प्रयास कर वन विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के वन अभयारण्य क्षेत्र से होकर गुजरने वाले मध्य गंग नहर के मालीपुर संपर्क मार्ग पर तेंदुआ दिखाई देने से क्षेत्र के ग्रामीण दहशत में हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग ने क्षेत्र को तेंदुआ जोन तो घोषित कर दिया लेकिन तेंदुआ पकड़ने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे। खेतों में जाने पर भी डर लग रहा है। सिचाई के अभाव में किसानों को फसल सूखने का डर सता रहा है।
कस्बे से मध्य गंग नहर की ओर जाने वाले इस संपर्क मार्ग से खादर क्षेत्र के लोग पैदल, साइकिल, मोटरसाइकिल और अन्य वाहनों से गुजरते हैं। आसपास के गांव के सैकड़ों छात्र साइकिल से आवागमन करते हैं। खादर का मुख्य मार्ग जर्जर होने के कारण इस संपर्क मार्ग पर आवागमन बढ़ गया है। एक महीने में इस मार्ग पर तेंदुआ दिखाई देने के चार वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग को भी इसकी सूचना दी। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग ने इसके बाद विभाग ने क्षेत्र को तेंदुआ जोन घोषित कर निगरानी शुरू कर दी, लेकिन तेंदुए को पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
मालीपुर निवासी भीम सिंह, अंकुश कश्यप, तारापुर निवासी मूलचंद, विपिन चौधरी और सुंदर सिंह ने बताया कि खादर क्षेत्र के अधिकतर लोग मुख्य मार्ग जर्जर होने के कारण इसी मार्ग से गुजरना पड़ता है। बच्चे साइकिल आदि से स्कूलों में जाते हैं। तेंदुए के खतरे के बावजूद दूसरा सुरक्षित रास्ता जर्जर है और लंबा है।
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कस्बा निवासी मुकेश, जेपी बैसला ने बताया कि उन्होंने पूर्व में वन विभाग के अधिकारियों को तेंदुआ पकड़ने के लिए अवगत कराया था, लेकिन अभी तक प्रयास नहीं किए गए। संपर्क मार्ग से आसपास के गांवों के छात्र भी साइकिल से स्कूल जाते हैं। ऐसे में किसी अप्रिय घटना की आशंका बनी हुई है। उन्होंने तेंदुए को पकड़कर सुरक्षित संरक्षित क्षेत्र में छोड़ने की मांग की।
तीन गांव में सबसे अधिक खतरा
मध्य गंग नहर मार्ग करीब तीन किमी लंबा है। यह मार्ग हस्तिनापुर-बिजनौर जाता है। इस संपर्क मार्ग पर करीब 10 गांव हैं। इनमें मालीपुर, खेड़ी सराय ,पलटूपुरी गांव में सबसे अधिक खतरा बना है क्योंकि यह गांव मध्यगंग नहर के पटरी पर पड़ने वाले गांव हैं। तेंदुआ भी मालीपुर गांव के आसपस ही नजर आ रहा है। इन तीनों गांव में करीब 450 घर हैं। आबादी करीब दो हजार से अधिक है। इसलिए इन तीनों गांव के ग्रामीण सबसे अधिक दहशत में है। हालांकि इस मार्ग पर रठौरा खुर्द, नंगली, गजरौली, भैंसियावाला, पलटूपुरी, तारापुर, कुन्हैड़ा, चामरोध आदि गांव पड़ते हैं। यहां के ग्रामीण भी इधर से आते जाते हैं।
लगातार निगरानी कर रहा विभाग : वन क्षेत्राधिकारी
वन क्षेत्राधिकारी खुशबू उपाध्याय ने बताया कि मध्य गंग नहर संपर्क मार्ग पर लगातार निगरानी की जा रही है। तेंदुए की कोई लोकेशन अब यहां नहीं मिल रही है।
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वन विभाग के प्रयास से संतुष्ट नहीं ग्रामीण
बोले-तेंदुआ पकड़ने के गंभीर प्रयास कर वन विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के वन अभयारण्य क्षेत्र से होकर गुजरने वाले मध्य गंग नहर के मालीपुर संपर्क मार्ग पर तेंदुआ दिखाई देने से क्षेत्र के ग्रामीण दहशत में हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग ने क्षेत्र को तेंदुआ जोन तो घोषित कर दिया लेकिन तेंदुआ पकड़ने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे। खेतों में जाने पर भी डर लग रहा है। सिचाई के अभाव में किसानों को फसल सूखने का डर सता रहा है।
कस्बे से मध्य गंग नहर की ओर जाने वाले इस संपर्क मार्ग से खादर क्षेत्र के लोग पैदल, साइकिल, मोटरसाइकिल और अन्य वाहनों से गुजरते हैं। आसपास के गांव के सैकड़ों छात्र साइकिल से आवागमन करते हैं। खादर का मुख्य मार्ग जर्जर होने के कारण इस संपर्क मार्ग पर आवागमन बढ़ गया है। एक महीने में इस मार्ग पर तेंदुआ दिखाई देने के चार वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग को भी इसकी सूचना दी। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग ने इसके बाद विभाग ने क्षेत्र को तेंदुआ जोन घोषित कर निगरानी शुरू कर दी, लेकिन तेंदुए को पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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मालीपुर निवासी भीम सिंह, अंकुश कश्यप, तारापुर निवासी मूलचंद, विपिन चौधरी और सुंदर सिंह ने बताया कि खादर क्षेत्र के अधिकतर लोग मुख्य मार्ग जर्जर होने के कारण इसी मार्ग से गुजरना पड़ता है। बच्चे साइकिल आदि से स्कूलों में जाते हैं। तेंदुए के खतरे के बावजूद दूसरा सुरक्षित रास्ता जर्जर है और लंबा है।
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कस्बा निवासी मुकेश, जेपी बैसला ने बताया कि उन्होंने पूर्व में वन विभाग के अधिकारियों को तेंदुआ पकड़ने के लिए अवगत कराया था, लेकिन अभी तक प्रयास नहीं किए गए। संपर्क मार्ग से आसपास के गांवों के छात्र भी साइकिल से स्कूल जाते हैं। ऐसे में किसी अप्रिय घटना की आशंका बनी हुई है। उन्होंने तेंदुए को पकड़कर सुरक्षित संरक्षित क्षेत्र में छोड़ने की मांग की।
तीन गांव में सबसे अधिक खतरा
मध्य गंग नहर मार्ग करीब तीन किमी लंबा है। यह मार्ग हस्तिनापुर-बिजनौर जाता है। इस संपर्क मार्ग पर करीब 10 गांव हैं। इनमें मालीपुर, खेड़ी सराय ,पलटूपुरी गांव में सबसे अधिक खतरा बना है क्योंकि यह गांव मध्यगंग नहर के पटरी पर पड़ने वाले गांव हैं। तेंदुआ भी मालीपुर गांव के आसपस ही नजर आ रहा है। इन तीनों गांव में करीब 450 घर हैं। आबादी करीब दो हजार से अधिक है। इसलिए इन तीनों गांव के ग्रामीण सबसे अधिक दहशत में है। हालांकि इस मार्ग पर रठौरा खुर्द, नंगली, गजरौली, भैंसियावाला, पलटूपुरी, तारापुर, कुन्हैड़ा, चामरोध आदि गांव पड़ते हैं। यहां के ग्रामीण भी इधर से आते जाते हैं।
लगातार निगरानी कर रहा विभाग : वन क्षेत्राधिकारी
वन क्षेत्राधिकारी खुशबू उपाध्याय ने बताया कि मध्य गंग नहर संपर्क मार्ग पर लगातार निगरानी की जा रही है। तेंदुए की कोई लोकेशन अब यहां नहीं मिल रही है।