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फसलों को बचाने के लिए दिन-रात देना पड़ रहा पहरा

Sun, 13 Feb 2022 11:42 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 13 Feb 2022 11:42 PM IST
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Day and night have to be guarded to save the crops
गढ़ी सखावतपुर गांव के जंगल में खेत में घुसे लावारिस पशु। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
फसलों को बचाने के लिए दिन-रात देना पड़ रहा पहरा
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मुजफ्फरनगर, बुढ़ाना। तहसील क्षेत्र में बेसहारा पशु किसानों के सिर का दर्द बन गया है। वर्तमान में लावारिस पशुओं का झुंड किसान की गेहूं की फसल को चौपट कर रहा है। किसान को दिन-रात अपने खेतों में बेसहारा पशुओं की रखवाली करनी पड़ रही है।
कस्बा व देहात क्षेत्र में काफी संख्या में गोवंश के झुंड सड़कों व खेतों में बेसहारा घूम रहे हैं। देहात में पारिवारिक बटवारे के कारण घर व घेर का आकर भी छोटा हो गया है। ऐसी हालत में खेती की जमीन व पशुओं के रखरखाव की जमीन कम होने के कारण किसान गोवंश को नहीं पालना चाहते। छोटे बछड़ों को देर रात के समय दूसरे गांव में छोड़ दिया जाता है।
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कस्बा व देहात में बेसहारा गोवंश की संख्या लगातार बढ़ रही है। गोवंश के झुंड दिन-रात खेतों में गेहूं की फसल को बर्बाद कर रहे हैं। किसान परिवार के एक सदस्य को रात-दिन बेसहारा पशुओं से अपने खेतों को बचाने के लिए रखवाली करनी पड़ रही है। इन्हें खेतों से भगाते समय किसान को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है। क्षेत्र में कई किसान इनके हमले से घायल भी हो चुके हैं।
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- विदेशी नस्ल की गाय व बछड़ों की बिक्री न होने के कारण किसान व पशुपालक उन्हें लावारिस छोड़ रहे हैं। लावारिस पशु किसानों की फसलों को बर्बाद कर रहे हं। आवारा पशु खेतों से बाहर निकाले जाने पर किसान पर हमला करते है। - सुरेंद्र सहरावत, चेयरमैन, किसान सेवा सहकारी समिति बुढ़ाना।
- आवारा पशु किसानों के सिर का दर्द बन गए हैं। ये किसान की गेहूं की फसल को चौपट कर रहे हैं। पशुओं के झुंड को भगाते समय किसान इनके हमले का शिकार भी हो रहे हैं। - चौ. मुकेश मलिक, फुगाना।
- लावारिस पशु किसानों की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं, जिसका उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। वैसे भी किसान की खेती की उत्पादन लागत बढ़ रही हैं। फसलों के दाम जस के तस हैं। जिससे किसान कर्जदार होता जा रहा है। - अनुज बालियान, तहसील अध्यक्ष भाकियू बुढ़ाना।

- भाजपा की केंद्र व प्रदेश सरकार की नीति के कारण गोवंश लावारिस होने पर मजबूर हो गए हैं। किसान अथवा पशुपालक अब गाय रखने में व पालने से बचने लगा है। सरकार द्वारा इनके पालन-पोषण की कोई व्यवस्था नहीं की है। आवारा पशुओं की समस्या अब किसान का, फिर सरकार के सिर का दर्द बन जाएगी। - हाजी जमशेद, ग्राम प्रधान जौला।
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