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Muzaffarnagar News: बिटिया ने पूरा किया पिता की आंखों का ख्वाब
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चरथावल । कुटेसरा की बेटी संधि जैन ने अपने पिता अर्जुन जैन की आंखों में छिपा सिविल सेवा का ख्वाब पूरा कर दिखाया। सिविल सेवा की परीक्षा में कामयाब संधि जैन रक्षा विभाग में आईडीएएस (इंडियन डिफेंस एकाउंट सर्विस) कैडर में पटना में एसीडीए (असिस्टेंट कंट्रोलर डिफेंस एकाउंट) का दायित्व निभा रहीं है। वह कहती हैं कि पिता ने आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
कुटेसरा में मध्यम वर्गीय सराफा परिवार में जन्मीं संधि जैन बताती हैं कि पिता ने उन्हें सिविल सेवा में भेजने का सपना देखा। प्रतिभावान बिटिया ने एसडी इंजीनियरिंग काॅलेज से बीटेक किया। पिता ने हौसला बढ़ाया तो बेटी ने दिल्ली के करोल बाग में एकाग्र मन से सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। कड़ी मेहनत के दम पर यूपीएससी परीक्षा वर्ष 2021 बैच में उन्हें 329 वीं रैक मिलीं।
बकौल संधि, पिता के मार्गदर्शन और अनुशासन से उन्होंने कामयाबी की उड़ान भरी। पिता ने जो सपना देखा, उसको पंख लगाने में कठिन परिश्रम किया। मुश्किल वक्त में पिता का प्रोत्साहन कामयाबी में सार्थक बना। वर्तमान में परिवार शहर की नई मंडी में रहता है।
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मोबाइल में सेव थे सिर्फ तीन नंबर
संधि जैन बताती है कि पढ़ाई के दौरान कड़ी मेहनत की। ग्रेजुएशन तक कभी कोई कोचिंग नहीं ली। दिल्ली में काेचिंग के दौरान मोबाइल में पिता के अलावा माता पिंकी जैन और भाई पुरू का नंबर सेव था। रात को मैस में खाना खाते वक्त इन नंबरों पर नियमित बात करती थी।
पटना में रक्षा विभाग में मिलीं तैनाती
15 दिन पूर्व संधि को दो साल की ट्रेनिंग करने के बाद पटना में आईडीएएस कैडर में एसीडीए पद मिला है। उन पर पांच पूर्वाेंत्तर राज्य बिहार, सिक्किम, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और झारखंड की रक्षा विभाग की यूनिटों के आर्थिक मामलों में सहायक नियंत्रक का दायित्व है। वह लड़कियों को सिविल सेवा की तैयारी के टिप्स देकर प्रेरित भी करतीं है।
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कुटेसरा में मध्यम वर्गीय सराफा परिवार में जन्मीं संधि जैन बताती हैं कि पिता ने उन्हें सिविल सेवा में भेजने का सपना देखा। प्रतिभावान बिटिया ने एसडी इंजीनियरिंग काॅलेज से बीटेक किया। पिता ने हौसला बढ़ाया तो बेटी ने दिल्ली के करोल बाग में एकाग्र मन से सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। कड़ी मेहनत के दम पर यूपीएससी परीक्षा वर्ष 2021 बैच में उन्हें 329 वीं रैक मिलीं।
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बकौल संधि, पिता के मार्गदर्शन और अनुशासन से उन्होंने कामयाबी की उड़ान भरी। पिता ने जो सपना देखा, उसको पंख लगाने में कठिन परिश्रम किया। मुश्किल वक्त में पिता का प्रोत्साहन कामयाबी में सार्थक बना। वर्तमान में परिवार शहर की नई मंडी में रहता है।
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मोबाइल में सेव थे सिर्फ तीन नंबर
संधि जैन बताती है कि पढ़ाई के दौरान कड़ी मेहनत की। ग्रेजुएशन तक कभी कोई कोचिंग नहीं ली। दिल्ली में काेचिंग के दौरान मोबाइल में पिता के अलावा माता पिंकी जैन और भाई पुरू का नंबर सेव था। रात को मैस में खाना खाते वक्त इन नंबरों पर नियमित बात करती थी।
पटना में रक्षा विभाग में मिलीं तैनाती
15 दिन पूर्व संधि को दो साल की ट्रेनिंग करने के बाद पटना में आईडीएएस कैडर में एसीडीए पद मिला है। उन पर पांच पूर्वाेंत्तर राज्य बिहार, सिक्किम, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और झारखंड की रक्षा विभाग की यूनिटों के आर्थिक मामलों में सहायक नियंत्रक का दायित्व है। वह लड़कियों को सिविल सेवा की तैयारी के टिप्स देकर प्रेरित भी करतीं है।