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खादर क्षेत्र में बाढ़ में फसलें डूबीं, चारे का भी संकट
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मुजफ्फरनगर : रामराज खादर क्षेत्र में संपर्क मार्गों पर हुए जलभराव से होकर जाते वाहन।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
खादर क्षेत्र में बाढ़ में फसलें डूबीं, चारे का भी संकट
मोरना (मुजफ्फरनगर)। गंगा खादर में आई बाढ़ के कारण खेतों में खड़ी फसल डूब गई। ग्रामीणों के आगे पशुओं के चारे का संकट खड़ा हो गया है। पशुपालक गंगा खादर से अपने पशुओं को निकालकर कहीं और ले जाने में लगे हुए हैं। शुकदेव सेतु पुल के पिलरों में फंसी जलीय घास को जेसीबी निकालने में लगी हुई है।
पहाड़ों पर हो रही बारिश के चलते गंगा नदी में उफान के कारण पानी आसपास के गांवों खेत खलिहानों से होते हुए मुख्यमार्गों और मकानों के अंदर घुसना आरंभ हो गया है। ग्रामीणों को हरे चारे की फसल सहित गन्ना , सब्जी आदि की फसलों की बर्बादी की चिंता का डर किसानों के चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा है। हरियाणा के करनाल निवासी सोहमवीर, किशन, सरदार बिशन, गांव फिरोजपुर हुकम सिंह, लोकेंद्र, रविंद्र, चरणसिंह, मोरना हासिम, शमीम, शुकतीर्थ निवासी बीर सिंह, राजेंद्र, सतपाल, जयपाल, दीपचंद, काला, आशा, बडौत निवासी राजू, बबलू, कैराना निवासी मोहरम, जेगम,खुर्रम आदि ने बताया कि वे अपने परिवार के संग सब्जी की फसल उगाते हैं।
गंगा खादर में मुनासिब दाम में ठेके पर जमीन आसानी से उपलब्ध हो जाती है। शुकतीर्थ, बिहारगढ़, इंच्छावाल, गंगा खादर में हजारों मजदूर किसान बडे़ पैमाने पर तुरई, पैठा, लौकी, बैंगन, टमाटर, खीरा, हरी मिर्च आदि की फसलें उगा रखी है। तैयार सब्जी की फसल को पिकप गाड़ियों द्वारा दिल्ली आजादपुर मंडी, देहरादून, हरिद्वार, नोएडा, मेरठ सहित आसपास शहरों की सब्जी मंडियों में सप्लाई किया जा रहा था। अब बाढ़ के कारण सब्जी की फसलों में गलन पैदा करेगा। तैयार सब्जियों की फसल बर्बाद होने से आर्थिक नुकसान होगा। उधर. उपजिलाधिकारी जानसठ जयेंद्र कुमार ने बताया कि दो लाख क्यूसेक पानी गंगा खादर में शेष रह गया है, जो धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। सूचना है कि पानी काफी कम हुआ है। लेखपाल आदि कर्मचारी निगरानी चौकियों से गंगा खादर में हर पल नजर बनाकर अपडेट करा रहे हैं। एक दो दिन मे हालत सामान्य हो जाएंगे।
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मोरना (मुजफ्फरनगर)। गंगा खादर में आई बाढ़ के कारण खेतों में खड़ी फसल डूब गई। ग्रामीणों के आगे पशुओं के चारे का संकट खड़ा हो गया है। पशुपालक गंगा खादर से अपने पशुओं को निकालकर कहीं और ले जाने में लगे हुए हैं। शुकदेव सेतु पुल के पिलरों में फंसी जलीय घास को जेसीबी निकालने में लगी हुई है।
पहाड़ों पर हो रही बारिश के चलते गंगा नदी में उफान के कारण पानी आसपास के गांवों खेत खलिहानों से होते हुए मुख्यमार्गों और मकानों के अंदर घुसना आरंभ हो गया है। ग्रामीणों को हरे चारे की फसल सहित गन्ना , सब्जी आदि की फसलों की बर्बादी की चिंता का डर किसानों के चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा है। हरियाणा के करनाल निवासी सोहमवीर, किशन, सरदार बिशन, गांव फिरोजपुर हुकम सिंह, लोकेंद्र, रविंद्र, चरणसिंह, मोरना हासिम, शमीम, शुकतीर्थ निवासी बीर सिंह, राजेंद्र, सतपाल, जयपाल, दीपचंद, काला, आशा, बडौत निवासी राजू, बबलू, कैराना निवासी मोहरम, जेगम,खुर्रम आदि ने बताया कि वे अपने परिवार के संग सब्जी की फसल उगाते हैं।
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गंगा खादर में मुनासिब दाम में ठेके पर जमीन आसानी से उपलब्ध हो जाती है। शुकतीर्थ, बिहारगढ़, इंच्छावाल, गंगा खादर में हजारों मजदूर किसान बडे़ पैमाने पर तुरई, पैठा, लौकी, बैंगन, टमाटर, खीरा, हरी मिर्च आदि की फसलें उगा रखी है। तैयार सब्जी की फसल को पिकप गाड़ियों द्वारा दिल्ली आजादपुर मंडी, देहरादून, हरिद्वार, नोएडा, मेरठ सहित आसपास शहरों की सब्जी मंडियों में सप्लाई किया जा रहा था। अब बाढ़ के कारण सब्जी की फसलों में गलन पैदा करेगा। तैयार सब्जियों की फसल बर्बाद होने से आर्थिक नुकसान होगा। उधर. उपजिलाधिकारी जानसठ जयेंद्र कुमार ने बताया कि दो लाख क्यूसेक पानी गंगा खादर में शेष रह गया है, जो धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। सूचना है कि पानी काफी कम हुआ है। लेखपाल आदि कर्मचारी निगरानी चौकियों से गंगा खादर में हर पल नजर बनाकर अपडेट करा रहे हैं। एक दो दिन मे हालत सामान्य हो जाएंगे।
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