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चाट विक्रेताओं के समक्ष रोजी रोटी का संकट
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चाट विक्रेताओं के समक्ष रोजी रोटी का संकट
मुजफ्फरनगर, पुरकाजी। दूर तक मशहूर हो चुकी पुरकाजी की चाट की दुकानें दो माह से नहीं खुलने से जहां चाट खाने वाले शौकीन तरस गए हैं। वहीं चाट विक्रेताओं के समक्ष भी रोजी रोटी की विकराल समस्या आने लगी है। चाट विक्रेताओं का कहना है कि दो माह से लगातार दुकानें बंद रहने से परिवारों का पालन पोषण मुश्किल होता जा रहा है।
पुरकाजी कस्बे में हाईवे पर पर चाट की तीन दुकानें है। यहां से रोजाना गुजरने वाले दिल्ली व हरियाणा और उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश के दर्जनों शहरों के अलावा देहात से आने वाले लोग चाट खाये बिना नहीं रह पाते थे। मगर लॉकडाउन के बाद दो माह तक लगातार दुकानें बंद रहने से चाट शौकीन तरस गए हैं। वहीं दुकानें नहीं खुलने से चाट विक्रेताओं के समक्ष भी रोजी रोटी की समस्या है। चाट विक्रेता बृज किशोर गुप्ता, लवी जिंदल, दीपू गुप्ता, सुनील गुप्ता का कहना है कि दो माह से दुकानें नहीं खुलने से सारा बजट बिगड़ गया है। जो पैसा घर पर जमा था वह खर्च हो जाने पर परिवार के खर्चे में दिक्कत आने लगी हैं। उनका कहना है कि यही हाल रहा तो व्यापार बदलना पड़ सकता है।
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मुजफ्फरनगर, पुरकाजी। दूर तक मशहूर हो चुकी पुरकाजी की चाट की दुकानें दो माह से नहीं खुलने से जहां चाट खाने वाले शौकीन तरस गए हैं। वहीं चाट विक्रेताओं के समक्ष भी रोजी रोटी की विकराल समस्या आने लगी है। चाट विक्रेताओं का कहना है कि दो माह से लगातार दुकानें बंद रहने से परिवारों का पालन पोषण मुश्किल होता जा रहा है।
पुरकाजी कस्बे में हाईवे पर पर चाट की तीन दुकानें है। यहां से रोजाना गुजरने वाले दिल्ली व हरियाणा और उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश के दर्जनों शहरों के अलावा देहात से आने वाले लोग चाट खाये बिना नहीं रह पाते थे। मगर लॉकडाउन के बाद दो माह तक लगातार दुकानें बंद रहने से चाट शौकीन तरस गए हैं। वहीं दुकानें नहीं खुलने से चाट विक्रेताओं के समक्ष भी रोजी रोटी की समस्या है। चाट विक्रेता बृज किशोर गुप्ता, लवी जिंदल, दीपू गुप्ता, सुनील गुप्ता का कहना है कि दो माह से दुकानें नहीं खुलने से सारा बजट बिगड़ गया है। जो पैसा घर पर जमा था वह खर्च हो जाने पर परिवार के खर्चे में दिक्कत आने लगी हैं। उनका कहना है कि यही हाल रहा तो व्यापार बदलना पड़ सकता है।
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