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नवजात को नाले में फेंका
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Sat, 16 Dec 2017 11:40 PM IST
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crime
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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भोपा (मुजफ्फरनगर)। पूत के कपूत होने के किस्से अनेक सामने आए हैं, लेकिन एक मां ऐसी कुमाता निकलेगी किसी ने सोचा नहीं होगा। कड़ाके की सर्दी में एक मां अपने जिगर के टुकड़े को नाले में फेंक आई। नवजात ने कुछ घंटे पहले ही इस दुनिया में आंखें खोली थीं। मासूम पर किसी राहगीर की नजर पड़ी और उसे नाले से निकाल लिया। बच्चा बेटा है और एकदम स्वस्थ है। वह बोल तो नहीं सकता, लेकिन अगर बोल पाता तो शायद यही सवाल करता कि मां...मेरी क्या खता थी। मुझे अपने से दूर क्यों किया। क्या मजबूरी थी, मुझे भी यह जानने का हक है।
भोपा इलाके का पटौली गांव। 800 लोगों की आबादी का यह गांव कभी सुर्खियों में नहीं रहा। शुक्रवार शाम एक मां ने गांव के माथे पर कलंक लगा दिया। गांव के बाहरी छोर पर नाले में नवजात पड़ा मिला। ठंड लगी तो उसकी चीख निकल पड़ी। मासूम की चीखें सुनकर राहगीरों की नजरें उधर गईं। ठंड में मासूम के शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था। उसके शरीर पर खून के धब्बे और आहरनाल लटकी होने से जाहिर था कि मासूम ने कुछ ही देर पहले इस दुनिया में आंखें खोली हैं। मोहल्ले के फरीद, इंतजार, बाबू असगर और अय्यूब फरिश्ता बने। नवजात को उठाकर चिकित्सक के यहां ले गए। डॉक्टर ने परीक्षण किया। नवजात बेटा है और पूरी तरह स्वस्थ है।
फिलहाल मासूम को गांव के ही गुलशनव्वर और उसकी पत्नी ने अपने पास रखा है। मां से दूर होने का अहसास भी मासूम के चेहरे पर है। नवजात बोल नहीं सकता, लेकिन अगर बोल पाता तो शायद यही सवाल करता कि मां मुझे खुद से दूर करना था तो जन्म ही क्यों दिया। कोई लाज थी या फिर मजबूरी, मुझे यह जानने का पूरा हक है।
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जितने मुंह, उतनी बात
भोपा। गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ का कहना था कि रात में कोई बच्चे को नाले में डालने आया होगा, जो किसी कारणवश वह पूरी तरह से पानी में नहीं डूब पाया। वहीं, कुछ का मानना है कि कोई बिन ब्याही मां लोक-लाज के भय से नवजात को यहां डाल गई है।
एक हाथ में पंजा नहीं
भोपा। नवजात के जन्म से ही दाहिने हाथ में पंजा नहीं है। नवजात के शरीर पर किसी प्रकार का कोई निशान भी नहीं मिला है। नवजात को उठाकर उसकी आहरनाल भी ग्रामीणों ने काटी है। देखने से लग रहा था कि कुछ ही घंटे पहले पैदा हुआ बच्चा काफी समय से चीख रहा था।
कोशिश करें, मासूम को मिले मां की गोद
आखिर कौन है इस मासूम की मां। नवजात को उसकी मां से मिलाने के लिए हर किसी को आगे आना चाहिए। इस कोशिश में अमर उजाला भी साथ है। किसी व्यक्ति को इसके परिजन, इसके जन्म स्थान आदि के बारे में जानकारी मिले तो वह बता सकता है। मासूम को उसका हक मिले, इसके लिए पुलिस, प्रशासन की भी जिम्मेदारी बनती है।
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भोपा इलाके का पटौली गांव। 800 लोगों की आबादी का यह गांव कभी सुर्खियों में नहीं रहा। शुक्रवार शाम एक मां ने गांव के माथे पर कलंक लगा दिया। गांव के बाहरी छोर पर नाले में नवजात पड़ा मिला। ठंड लगी तो उसकी चीख निकल पड़ी। मासूम की चीखें सुनकर राहगीरों की नजरें उधर गईं। ठंड में मासूम के शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था। उसके शरीर पर खून के धब्बे और आहरनाल लटकी होने से जाहिर था कि मासूम ने कुछ ही देर पहले इस दुनिया में आंखें खोली हैं। मोहल्ले के फरीद, इंतजार, बाबू असगर और अय्यूब फरिश्ता बने। नवजात को उठाकर चिकित्सक के यहां ले गए। डॉक्टर ने परीक्षण किया। नवजात बेटा है और पूरी तरह स्वस्थ है।
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फिलहाल मासूम को गांव के ही गुलशनव्वर और उसकी पत्नी ने अपने पास रखा है। मां से दूर होने का अहसास भी मासूम के चेहरे पर है। नवजात बोल नहीं सकता, लेकिन अगर बोल पाता तो शायद यही सवाल करता कि मां मुझे खुद से दूर करना था तो जन्म ही क्यों दिया। कोई लाज थी या फिर मजबूरी, मुझे यह जानने का पूरा हक है।
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जितने मुंह, उतनी बात
भोपा। गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ का कहना था कि रात में कोई बच्चे को नाले में डालने आया होगा, जो किसी कारणवश वह पूरी तरह से पानी में नहीं डूब पाया। वहीं, कुछ का मानना है कि कोई बिन ब्याही मां लोक-लाज के भय से नवजात को यहां डाल गई है।
एक हाथ में पंजा नहीं
भोपा। नवजात के जन्म से ही दाहिने हाथ में पंजा नहीं है। नवजात के शरीर पर किसी प्रकार का कोई निशान भी नहीं मिला है। नवजात को उठाकर उसकी आहरनाल भी ग्रामीणों ने काटी है। देखने से लग रहा था कि कुछ ही घंटे पहले पैदा हुआ बच्चा काफी समय से चीख रहा था।
कोशिश करें, मासूम को मिले मां की गोद
आखिर कौन है इस मासूम की मां। नवजात को उसकी मां से मिलाने के लिए हर किसी को आगे आना चाहिए। इस कोशिश में अमर उजाला भी साथ है। किसी व्यक्ति को इसके परिजन, इसके जन्म स्थान आदि के बारे में जानकारी मिले तो वह बता सकता है। मासूम को उसका हक मिले, इसके लिए पुलिस, प्रशासन की भी जिम्मेदारी बनती है।