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सुरक्षा मांगने गए किसान को गोलियों से भूना
ब्यूरो/अमर उजाला, शाहपुर
Updated Sat, 20 Aug 2016 12:19 AM IST
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बरवाला में आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पहुंची पुलिस फोर्स।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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एसएसपी से सुरक्षा मांग कर लौट रहे बरवाला निवासी किसान, उसके चचेरे भाई और एक ग्रामीण पर हमलावरों ने शुक्रवार को ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी, जिसमें किसान की मौत हो गई, जबकि दूसरे को गंभीर हालत में मेरठ रेफर किया गया है।
किसान के बेटे की भी चुनावी रंजिश के चलते दस माह पूर्व गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। गुस्साए परिजन रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तैयार नहीं हैं। यहां तक कि उन्होंने शव लेने से भी इंकार कर दिया है।
शाहपुर थाना क्षेत्र के गांव बरवाला निवासी कृष्णपाल, महक सिंह पुत्रगण बलजीत अपने गांव के ही चचेरे भाई मदन पुत्र इलम सिंह के साथ एसएसपी दीपक कुमार से मिलने गए थे। एसएसपी के नहीं मिलने पर शुक्रवार शाम करीब तीन बजे बाइक से वह गांव लौट रहे। जब वह सांझक-बरवाला मार्ग पर पहुंचे, तभी वहां घात लगाए हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी।
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हमले में कृष्णपाल और चचेरे भाई मदन गोलियां लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि महक सिंह बच गया। हमलावर फायरिंग करते हुए फरार हो गए। खबर पाकर परिजन और ग्रामीण दोनों घायलों को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने कृष्णपाल (55) को मृत घोषित कर दिया, जबकि मदन सिंह की गंभीर हालत को देखते हुए मेरठ मेडिकल के लिए रेफर कर दिया गया है।
खबर पाकर जिला अस्पताल में इंस्पेक्टर कोतवाली चमन सिंह चावड़ा फोर्स लेकर पहुंच गए। अस्पताल में परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल था। उधर, हत्याकांड की खबर मिलने पर एसएसपी दीपक कुमार घटनास्थल पर पहुंचे। मौके से 315 बोर के दो खोखे और एक कारतूस बरामद किया गया है।
घटना की सूचना पर आसपास के थानों की पुलिस और आलाधिकारी मौके पर पहुंचे। एसएसपी ने घटनास्थल का मुआयना करने के बाद शक के आधार पर आरोपियों के घरों पर दबिश दी, परंतु कोई भी आरोपी हत्थे नहीं चढ़ा।
परिजनों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है। इतना ही नहीं पंचनामे पर ग्रामीणों ने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। मोर्चरी पर एकत्र ग्रामीण बिना शव लिए ही गांव लौट गए। परिजन थाने में घटना की तहरीर देने से भी इंकार कर रहे हैं।
उनका कहना है कि मुकदमा दर्ज कराने से क्या होगा, जो गवाह बनेगा, उसे भी मार दिया जाएगा। देर शाम तक पीड़ित पक्ष की ओर से शाहपुर थाने पर तहरीर नहीं दी गई थी। पुलिस पीड़ित पक्ष को मनाने के प्रयास में लगी है।
उनका कहना है कि काफी दिनों से पुलिस अधिकारियों से सुरक्षा की गुहार लगा रहे थे, मगर पुलिस ने कोई सुरक्षा मुहैया नहीं कराई। नतीजा हमलावरों ने कृष्णपाल की भी हत्या कर दी।
शव मोर्चरी छोड़ा और रिपोर्ट भी नहीं लिखाई
बरवाला की वारदात को लेकर पुलिस संकट में फंस गई है। परिवार के लोग न मुकदमा दर्ज करा रहे हैं और न ही शव लेने को तैयार हैं। पोस्टमार्टम के बाद कृष्णपाल का शव मोर्चरी पर रखा हुआ है।
पिता की मौत की सूचना मिलने के बाद कृष्णपाल का बेटा प्रवेश ग्रामीणों के साथ मोर्चरी पर पहुंचा था, जहां पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। प्रवेश ने अपने पिता के शव को लेने से इंकार कर दिया।
प्रवेश ने पुलिस कार्रवाई से इंकार करते हुए पिता का पंचनामा भी नहीं भरवाया और ग्रामीणों के साथ लौट गया। प्रवेश का कहना था कि उसके भाई अश्वनी की भी हत्या कर दी गई थी, परन्तु पुलिस की लापरवाही के चलते अब उसके पिता की हत्या कर दी गई।
उसके परिवार ने खतरे को भांपते हुए पुलिस को पहले ही अवगत करा दिया था और लगातार सुरक्षा मांगी जा रही थी, परन्तु पुलिस ने उसके परिवार को सुरक्षा नहीं दी, जिसका नतीजा यह हुआ कि उसके पिता की हत्या कर दी गई। उसके चाचा जिन्दगी और मौत से जूझ रहे हैं। देर रात तक पुलिस अधिकारी गांव पहुंचकर प्रवेश और उसके परिजनों को समझाने का प्रयास कर रहे थे।
वहीं, इसी पक्ष के जिला पंचायत सदस्य धीरेंद्र सिंह ने कहा कि परिवार को कानून पर भरोसा नहीं रहा है। सुरक्षा के लिए एक महीने से पुलिस दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। जो मुकदमा लिखवाएगा या गवाह बनेगा, उसे भी इसी तरह मार दिया जाएगा और पुलिस इसी तरह तमाशा देखती रहेगी। देर रात एसएसपी दीपक कुमार ने गांव के कुछ मोअज्जि लोगों को वार्ता के लिए बुलाया है।
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किसान के बेटे की भी चुनावी रंजिश के चलते दस माह पूर्व गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। गुस्साए परिजन रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तैयार नहीं हैं। यहां तक कि उन्होंने शव लेने से भी इंकार कर दिया है।
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शाहपुर थाना क्षेत्र के गांव बरवाला निवासी कृष्णपाल, महक सिंह पुत्रगण बलजीत अपने गांव के ही चचेरे भाई मदन पुत्र इलम सिंह के साथ एसएसपी दीपक कुमार से मिलने गए थे। एसएसपी के नहीं मिलने पर शुक्रवार शाम करीब तीन बजे बाइक से वह गांव लौट रहे। जब वह सांझक-बरवाला मार्ग पर पहुंचे, तभी वहां घात लगाए हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी।
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हमले में कृष्णपाल और चचेरे भाई मदन गोलियां लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि महक सिंह बच गया। हमलावर फायरिंग करते हुए फरार हो गए। खबर पाकर परिजन और ग्रामीण दोनों घायलों को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने कृष्णपाल (55) को मृत घोषित कर दिया, जबकि मदन सिंह की गंभीर हालत को देखते हुए मेरठ मेडिकल के लिए रेफर कर दिया गया है।
खबर पाकर जिला अस्पताल में इंस्पेक्टर कोतवाली चमन सिंह चावड़ा फोर्स लेकर पहुंच गए। अस्पताल में परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल था। उधर, हत्याकांड की खबर मिलने पर एसएसपी दीपक कुमार घटनास्थल पर पहुंचे। मौके से 315 बोर के दो खोखे और एक कारतूस बरामद किया गया है।
घटना की सूचना पर आसपास के थानों की पुलिस और आलाधिकारी मौके पर पहुंचे। एसएसपी ने घटनास्थल का मुआयना करने के बाद शक के आधार पर आरोपियों के घरों पर दबिश दी, परंतु कोई भी आरोपी हत्थे नहीं चढ़ा।
परिजनों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है। इतना ही नहीं पंचनामे पर ग्रामीणों ने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। मोर्चरी पर एकत्र ग्रामीण बिना शव लिए ही गांव लौट गए। परिजन थाने में घटना की तहरीर देने से भी इंकार कर रहे हैं।
उनका कहना है कि मुकदमा दर्ज कराने से क्या होगा, जो गवाह बनेगा, उसे भी मार दिया जाएगा। देर शाम तक पीड़ित पक्ष की ओर से शाहपुर थाने पर तहरीर नहीं दी गई थी। पुलिस पीड़ित पक्ष को मनाने के प्रयास में लगी है।
उनका कहना है कि काफी दिनों से पुलिस अधिकारियों से सुरक्षा की गुहार लगा रहे थे, मगर पुलिस ने कोई सुरक्षा मुहैया नहीं कराई। नतीजा हमलावरों ने कृष्णपाल की भी हत्या कर दी।
शव मोर्चरी छोड़ा और रिपोर्ट भी नहीं लिखाई
बरवाला की वारदात को लेकर पुलिस संकट में फंस गई है। परिवार के लोग न मुकदमा दर्ज करा रहे हैं और न ही शव लेने को तैयार हैं। पोस्टमार्टम के बाद कृष्णपाल का शव मोर्चरी पर रखा हुआ है।
पिता की मौत की सूचना मिलने के बाद कृष्णपाल का बेटा प्रवेश ग्रामीणों के साथ मोर्चरी पर पहुंचा था, जहां पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। प्रवेश ने अपने पिता के शव को लेने से इंकार कर दिया।
प्रवेश ने पुलिस कार्रवाई से इंकार करते हुए पिता का पंचनामा भी नहीं भरवाया और ग्रामीणों के साथ लौट गया। प्रवेश का कहना था कि उसके भाई अश्वनी की भी हत्या कर दी गई थी, परन्तु पुलिस की लापरवाही के चलते अब उसके पिता की हत्या कर दी गई।
उसके परिवार ने खतरे को भांपते हुए पुलिस को पहले ही अवगत करा दिया था और लगातार सुरक्षा मांगी जा रही थी, परन्तु पुलिस ने उसके परिवार को सुरक्षा नहीं दी, जिसका नतीजा यह हुआ कि उसके पिता की हत्या कर दी गई। उसके चाचा जिन्दगी और मौत से जूझ रहे हैं। देर रात तक पुलिस अधिकारी गांव पहुंचकर प्रवेश और उसके परिजनों को समझाने का प्रयास कर रहे थे।
वहीं, इसी पक्ष के जिला पंचायत सदस्य धीरेंद्र सिंह ने कहा कि परिवार को कानून पर भरोसा नहीं रहा है। सुरक्षा के लिए एक महीने से पुलिस दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। जो मुकदमा लिखवाएगा या गवाह बनेगा, उसे भी इसी तरह मार दिया जाएगा और पुलिस इसी तरह तमाशा देखती रहेगी। देर रात एसएसपी दीपक कुमार ने गांव के कुछ मोअज्जि लोगों को वार्ता के लिए बुलाया है।