फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   Got justice after suicide

इंसाफ मिला पर महिमा के जाने के बाद, जनाक्रोश बढ़ने पर जागी पुलिस

Thu, 02 Mar 2017 12:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Thu, 02 Mar 2017 12:03 AM IST
विज्ञापन
Got justice after suicide
demo pic - फोटो : अमर उजाला
ग्रेजुएशन की छात्रा महिमा को समय रहते पुलिस इंसाफ दिलाती तो वह आज जिंदा होती। गुनहगार के सलाखों के पीछे जाने से परिवार को इंसाफ तो मिला, लेकिन बेटी को खोने के बाद। इतना ही नहीं बेटी के जाने के बाद परिवार को कई तोहमतों का भी सामना करना पड़ा। किसी ने बेटी के संबंधों पर कीचड़ उछाली तो किसी ने मौत पर परिवार को ही कटघरे में खड़ा करने से गुरेज नहीं किया। आखिरकार सत्य की जीत हुई और आरोपी को तमाम कवायद के बावजूद राहत नहीं मिली। 
विज्ञापन


महिमा सुसाइड केस में पुलिस देर से जागी। मां संजू देवी  और बेटी महिमा खुद राजनीतिज्ञों और कप्तान से मदद की गुहार करती रही, लेकिन कुंद सिस्टम में उनकी आवाज दबकर रह गई। कानून ने सही तरीके से अपना फर्ज नहीं निभाया। अगर सबकुछ सही होता तो 14 फरवरी को एसएसपी को दिए प्रार्थनापत्र पर कार्रवाई होती और पीड़िता को जान देने जैसा आत्मघाती कदम नहीं उठाना पड़ता।
विज्ञापन


आरोपियों की बढ़ती दबंगई और कानून के कमजोर इकबाल को देखकर भी महिमा का आत्मविश्वास डगमगा गया। विडंबना यह भी है कि खुदकुशी के बाद दहशत के साए में जीते परिवार का सहारा बनने के बजाय पुलिस आरोपियों की पैरोकारी में खड़ी हो गई, जिसकी वजह से ही जनाक्रोश बढ़ता गया। दुस्साहस इतना था कि खुदकुशी के बाद अंकित विहार में भीड़ और पुलिस अफसरों के होते हुए भी दबंग मौके पर पहुंच गए। पोस्टमार्टम के बाद रात में ही शव को सीधे शमशान में ले जाकर अंतिम संस्कार करने की तैयारी थी। मृतका के दादा रामस्वरूप ने विरोध किया तो शव को घर ले जाया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


अंत्येष्टि से पहले ही आरोपियों ने मृतका के पिता से सौ रुपये के स्टांप पर सुलहनामा भी तैयार करा लिया, जिसमें लिखवाया कि हमारा पैसे का कोई लेन-देन नहीं है। युधिष्ठिर पहलवान पर लगाए गए आरोप भी निराधार हैं। नईमंडी के श्मशान घाट से ही पिता को आरोपी अपनी गाड़ी में बैठाकर ले गए। पीड़ित परिवार पर बेटी की मौत का गम, ऊपर से ताकतवर आरोपियों से लड़ने का डर। सोशल मीडिया पर भी खुदकुशी पर शक जाहिर करने से गुरेज नहीं किया गया। 

लखनऊ से आई फोरेंसिक जांच टीम की त्वरित कार्रवाई के पीछे सच कम और मौत का क्लू तलाशने का प्रयास ज्यादा था। आत्महत्या के कितने मामलों में एफएसएल के डायरेक्टर टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचते हैं, यह किसी से छिपा नहीं है। सवाल अनगिनत थे। लखनऊ में साढ़े चार लाख की कथित लूट के लिए मृतका के पिता और भाई शक जताया। कॉल डिटेल में घटना के दिन भाई अक्षय की मौजूदगी अंकित विहार में मिली। मां संजू देवी कहती हैं कि पुलिस ने वक्त रहते सुन ली होती तो आज यह दिन नहीं देखना पड़ता। आरोपियों से जुड़े लोग सच को दबाने के लिए बेटी के चरित्र पर सवाल उठाने लगे। किसी ने कह दिया कि हमने खुद ही महिमा को मार दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ था कि महिमा की मौत का कारण खुदकुशी है। 

लोटा-बाल्टी लिए खड़ा रहा दरोगा      
मुजफ्फरनगर। गिरफ्तारी के बाद नई मंडी कोतवाली में आरोपी युधिष्ठिर की आवभगत में पुलिस ने कोई कमी नहीं रखी। मंगलवार रात हिरासत में लेने के बाद पहलवान को हवालात से दूर रखा गया। सुबह लोटा-बाल्टी लिए थाने का एक दरोगा ही खड़ा रहा। नहाने के बाद आरोपी को लेकर पुलिस कचहरी के लिए चली। 


लगा कपड़ों का बैग, तय हुई गिरफ्तारी      
मुजफ्फरनगर। युधिष्ठिर की गिरफ्तारी को लेकर मंगलवार को दिनभर ड्रामा चला। पहले सूचना मिली थी कि वह कोर्ट में सरेंडर कर सकता है। उसके गांव पचेंडा से कपड़ों का बैग लगाने की भनक मिली तो तय हो गया कि अगले कुछ घंटों में पुलिस करतब दिखाएगी। रात होते-होते मृतका का पिता देवप्रकाश को भी पुलिस घर छोड़ आई और युधिष्ठिर को भी गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि अफसर गिरफ्तारी से ना-नुकर करते रहे। 
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed