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‘कैराना’ की राह पर निराना, आठ परिवारों ने किया पलायन का एलान
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 09 Jul 2018 12:28 AM IST
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मकान पर यह मकान बिकाऊ है,लिखती महिला।
- फोटो : अमर उजाला
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समुदाय विशेष के आतंक के चलते शामली जनपद के कस्बा कैराना से कारोबारियों और लोगों के पलायन का मुद्दा शहर से सटे गांव निराना तक आ पहुंचा है। समुदाय विशेष के लोगों की गुंडागर्दी के साथ ही थाना पुलिस की लचर कार्यप्रणाली से त्रस्त एक ग्रामीण अपना घर बेचकर पलायन की तैयारी में है। वहीं, आठ अन्य ग्रामीण भी अपने घरों पर ‘यह मकान बिकाऊ है’ लिखकर पलायन का ऐलान कर चुके हैं।
शामली जनपद के कस्बा कैराना की तर्ज पर सिखेड़ा क्षेत्र के जिला मुख्यालय से सटे गांव निराना में भी पलायन का मुद्दा चर्चाओं में आ गया है। समुदाय विशेष के कुछ दबंगों की गुंडागर्दी से त्रस्त बहुसंख्यक समुदाय के आधा दर्जन से अधिक परिवारों ने यहां अपने घरों की दीवारों पर ‘यह मकान बिकाऊ है’ लिखकर सनसनी फैला दी है।
दरअसल, मामला समुदाय विशेष के कुछ लोगों की गुंडागर्दी का है। जिनका डर ग्रामीणों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर कर रहा है। उक्त लोगों की गुंडागर्दी के कारण इससे पहलेे भी दो परिवार अपना घर-बार बेचकर गांव से पलायन कर चुके हैं। इसके बावजूद पुलिस-प्रशासन की लगातार बेरुखी ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
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मामले में सिखेड़ा थाना प्रभारी इंस्पेक्टर विक्रम सिंह का कहना है कि पुलिस थाने में आने वाली सभी शिकायतों पर कार्रवाई करती है, लेकिन अधिकांश मामलों में ग्रामीण दोनों पक्षों में समझौता करा देते हैं। अब समझौता डर से हुआ या सहमति से, इसकी शिकायत कोई पुलिस से नहीं करता, जिसके चलते इस तरह के मामलों में कार्रवाई सुनिश्चित भी नहीं हो पाती।
इन परिवारों ने किया पलायन का ऐलान
सिखेड़ा। गांव निराना में जिन परिवारों ने घर बेचकर गांव से पलायन करने का एलान किया है उनमें प्रमोद पुत्र कालूराम, चंद्रवती पत्नी वीरपाल, मूलचंद पुत्र गिरधारी लाल, बाबूराम पुत्र चमनसिंह, मंगलसेन पुत्र राजाराम, बिजेंद्र पाल पुत्र अजब सिंह, ऋषिपाल पुत्र उमराव और सतीश पाल शामिल हैं। वहीं, गांव निवासी अजब सिंह पुत्र बलबीर घर बेचकर यहां से पलायन कर चुका है, जबकि बाबूराम पुत्र चमनसिंह ने करीब 15 दिन पहले ही अपना मकान औने-पौने दामों में बेच दिया है, जो बहुत जल्द मकान खाली कर यहां से चला जाएगा।
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी पुलिस ने की कार्रवाई
मुजफ्फरनगर/सिखेड़ा। शहर से सटे गांव निराना में दबंगों की गुंडई से त्रस्त ग्रामीणों द्वारा अपने घरों पर ‘यह मकान बिकाऊ है’ लिखकर पलायन का एलान करने के बाद थाना पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।
ग्रामीणों की मानें तो विगत 29 जून को गांव निवासी काला की बेटी की बारात आई थी। घुड़चढ़ी के दौरान पाल समाज के अजय पाल व उसका चचेरा भाई विवेक अपने घर की छत पर खड़े बारात देख रहे थे। इसी दौरान समुदाय विशेष के दबंग वहां पहुंचे और अकारण घर में घुसकर दोनों चचेरे भाइयों पर हमला कर दिया।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने शहजाद, आदीश, अदनान, आमिर, मोहसिन, साहिब, तहसीन, गप्पा, कादिर, रिहान व अज्ञात हमलावरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। आरोप है कि गंभीर एफआईआर दर्ज होने के बावजूद थाना पुलिस ने अब तक एक भी हमलावर को गिरफ्तार नहीं किया।
उल्टे थाने का एक दरोगा तो हमलावरों व उनके परिजनों को अपनी ही बाइक पर बैठाकर पीड़ित पक्ष के घर उन्हें ले जाकर उनके ऊपर समझौते का दबाव बनाता घूम रहा है। यही नहीं, दरोगा द्वारा पीड़ित पक्ष पर समझौता नहीं करने पर उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर जेल भेजने तक की धमकी दे रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले भी यही दबंग हमलावर विगत जनवरी माह में पीड़ित अजय पाल के माता-पिता पर भी हमला कर चुके हैं। बाद में पुलिस ने इस मामले में भी समझौता ही करा दिया था।
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शामली जनपद के कस्बा कैराना की तर्ज पर सिखेड़ा क्षेत्र के जिला मुख्यालय से सटे गांव निराना में भी पलायन का मुद्दा चर्चाओं में आ गया है। समुदाय विशेष के कुछ दबंगों की गुंडागर्दी से त्रस्त बहुसंख्यक समुदाय के आधा दर्जन से अधिक परिवारों ने यहां अपने घरों की दीवारों पर ‘यह मकान बिकाऊ है’ लिखकर सनसनी फैला दी है।
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दरअसल, मामला समुदाय विशेष के कुछ लोगों की गुंडागर्दी का है। जिनका डर ग्रामीणों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर कर रहा है। उक्त लोगों की गुंडागर्दी के कारण इससे पहलेे भी दो परिवार अपना घर-बार बेचकर गांव से पलायन कर चुके हैं। इसके बावजूद पुलिस-प्रशासन की लगातार बेरुखी ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
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मामले में सिखेड़ा थाना प्रभारी इंस्पेक्टर विक्रम सिंह का कहना है कि पुलिस थाने में आने वाली सभी शिकायतों पर कार्रवाई करती है, लेकिन अधिकांश मामलों में ग्रामीण दोनों पक्षों में समझौता करा देते हैं। अब समझौता डर से हुआ या सहमति से, इसकी शिकायत कोई पुलिस से नहीं करता, जिसके चलते इस तरह के मामलों में कार्रवाई सुनिश्चित भी नहीं हो पाती।
इन परिवारों ने किया पलायन का ऐलान
सिखेड़ा। गांव निराना में जिन परिवारों ने घर बेचकर गांव से पलायन करने का एलान किया है उनमें प्रमोद पुत्र कालूराम, चंद्रवती पत्नी वीरपाल, मूलचंद पुत्र गिरधारी लाल, बाबूराम पुत्र चमनसिंह, मंगलसेन पुत्र राजाराम, बिजेंद्र पाल पुत्र अजब सिंह, ऋषिपाल पुत्र उमराव और सतीश पाल शामिल हैं। वहीं, गांव निवासी अजब सिंह पुत्र बलबीर घर बेचकर यहां से पलायन कर चुका है, जबकि बाबूराम पुत्र चमनसिंह ने करीब 15 दिन पहले ही अपना मकान औने-पौने दामों में बेच दिया है, जो बहुत जल्द मकान खाली कर यहां से चला जाएगा।
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी पुलिस ने की कार्रवाई
मुजफ्फरनगर/सिखेड़ा। शहर से सटे गांव निराना में दबंगों की गुंडई से त्रस्त ग्रामीणों द्वारा अपने घरों पर ‘यह मकान बिकाऊ है’ लिखकर पलायन का एलान करने के बाद थाना पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।
ग्रामीणों की मानें तो विगत 29 जून को गांव निवासी काला की बेटी की बारात आई थी। घुड़चढ़ी के दौरान पाल समाज के अजय पाल व उसका चचेरा भाई विवेक अपने घर की छत पर खड़े बारात देख रहे थे। इसी दौरान समुदाय विशेष के दबंग वहां पहुंचे और अकारण घर में घुसकर दोनों चचेरे भाइयों पर हमला कर दिया।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने शहजाद, आदीश, अदनान, आमिर, मोहसिन, साहिब, तहसीन, गप्पा, कादिर, रिहान व अज्ञात हमलावरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। आरोप है कि गंभीर एफआईआर दर्ज होने के बावजूद थाना पुलिस ने अब तक एक भी हमलावर को गिरफ्तार नहीं किया।
उल्टे थाने का एक दरोगा तो हमलावरों व उनके परिजनों को अपनी ही बाइक पर बैठाकर पीड़ित पक्ष के घर उन्हें ले जाकर उनके ऊपर समझौते का दबाव बनाता घूम रहा है। यही नहीं, दरोगा द्वारा पीड़ित पक्ष पर समझौता नहीं करने पर उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर जेल भेजने तक की धमकी दे रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले भी यही दबंग हमलावर विगत जनवरी माह में पीड़ित अजय पाल के माता-पिता पर भी हमला कर चुके हैं। बाद में पुलिस ने इस मामले में भी समझौता ही करा दिया था।