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हत्या कर शव बिटौड़े में रखकर फूंक दिया   

Wed, 01 Jun 2016 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Wed, 01 Jun 2016 12:22 AM IST
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Burned dead bodies
बिटोड़े में रखकर जलाए गए शव की जांच करती पुलिस। - फोटो : अमर उजाला
जंधेड़ी जाटान गांव के जंगल में सोमवार रात किसी व्यक्ति की हत्या कर शव बिटौड़े में रखकर फूंक दिया गया। हालांकि शव जलाते समय किसी को नहीं देखा गया। मंगलवार सुबह बिटौड़े की आग में शव का अधजला कुछ हिस्सा दिखने से सनसनी फैल गई।
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सूचना पर पहुंची पुलिस ने डॉग स्क्वायड और फोरेंसिक टीम के साथ पहुंचकर जांच-पड़ताल की। शव महिला का है या पुरुष का, यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है। शव के अवशेष को फोरेंसिक टीम अपने साथ ले गई। 
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जंधेड़ी जाटान गांव के रहने वाले महकसिंह पुत्र शेरसिंह का गांव से बाहर जंगल में उपलों का बिटौड़ा रखा हुआ था। सोमवार रात बदमाशों ने किसी व्यक्ति की हत्या कर पहचान मिटाने के लिए शव को महकसिंह के बिटौड़े में रखकर आग लगा दी। मंगलवार सुबह तक पूरा बिटौड़ा जलकर राख हो चुका था। गांव निवासी सुक्खा सुबह पांच बजे चंदसीना गांव जा रहा था।
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उस समय नाले के पास मांस जलने की बदबू आ रही थी। सुक्खा ने नाले के पास जाकर देखा तो बिटौड़े की आग में शव का कुछ हिस्सा जल रहा था। सुक्खा ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी। ग्रामीण एकत्र होकर जंगल पहुंचे। ग्रामीणों ने बिटौड़े की आग में शव का कुछ हिस्सा जलते हुए देखा। ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस को दी।

सूचना मिलने पर सीओ शिवराज सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। सीओ ने मुख्यालय से जांच-पड़ताल के लिए फोरेंसिक और डॉग स्क्वायड टीम को बुलवाया। टीमों ने जंगल में घटना की छानबीन की। फोरेंसिक टीम ने शव के जले हिस्से को आग से बाहर निकाला।

टीम ने जांच के लिए शव के हिस्से को कब्जे में ले लिया। इंस्पेक्टर संजीव कुमार शर्मा का कहना है बिटौड़े में जलाए गए शव के बारे में अभी कुछ पता नहीं चल सका है। आसपास के इलाके में किसी ग्रामीण के लापता होने की सूचना नहीं मिली है। 

पहले भी ठिकाने लगाए गए शव
बिटौड़ों में शव को रखकर जला देेने वाली यह घटना कोई पहली नहीं है। इससे पूर्व भी इसी तरीके से रात के समय बिटौड़ों में शवों को रखकर फूंका गया है। उन घटनाओं में आज तक न तो जलने वाले शवों का पता चल सका और न ही पुलिस हत्यारों का सुराग लगा पाई।

यानी अपराध के बदलते इस ट्रेंड में न मृतक का कोई सबूत मिलता है और न ही किलर का। पुलिस भी यह मानकर फाइल बंद कर देती है कि कहीं बाहर से लाकर यहां शव को ठिकाने लगाया गया है। गांव जंधेड़ी जाटान गांव में चार वर्ष पूर्व भी इसी तरह से जंगल में रखे बिटौड़े में शव को रखकर फूंक दिया गया था।

सुबह होने पर पुलिस को राख के ढेर से जली हुई हड्डियां मिली थीं। इसके अलावा पिछले साल पास के ही गांव चांदसमंद के जंगल में भी इसी तरह बिटौड़े में शव रखकर फूंक दिया गया था। उस वक्त भी पुलिस को राख के ढेर से मात्र कंकाल ही मिला था। आज तक जलाए जाने वाले शव किसके थे, इसका पता नहीं चल सका है।


आखिर कौन है हत्यारा
शवों को बिटौड़े में फूंकने वाला आखिरकार इंसानों का दुश्मन कौन है। ग्रामीणों का कहना है कि बिटौड़ों में शवों को रखकर जलाने वाले किलर को आज तक उन्होंने भी नहीं देखा है। इन घटनाओं से ग्रामीणों में भी दहशत बनी हुई है। ग्रामीण रात के समय खेतों में भी जाने से डरने लगे हैं। किलर को तलाश करने में पुलिस का खुफिया तंत्र भी फेल हो चुका है।
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