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मुझे छुट्टी मिल गई है, कल घर आ जाऊंगा
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 24 Aug 2016 01:18 AM IST
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सिपाही सौरभ की शव यात्रा में शामिल लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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बुलंदशहर पुलिस लाइन में गोलियां बरसाकर दो सिपाहियों की हत्या कर खुदकुशी करने वाला सिपाही सौरभ त्यागी छह माह से घर नहीं आया था। वह इसको लेकर तनाव में था। वारदात से कुछ देर पहले सौरभ ने अपनी पत्नी को फोन कर बताया था कि उसे छुट्टी मिल गई है और वह मंगलवार को घर आएगा। सौरभ तो नहीं आया, लेकिन मंगलवार को उसकी लाश यहां पहुंची। घटना कैसे और क्यों घटी, परिजनों को भी आभास नहीं है। परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
सौरभ त्यागी मूल रूप से छपार के गांव कुतुबपुर गांव का मूल निवासी था। छह साल पहले वह शहर जनकपुरी में आकर रहने लगे थे। रायबरेली के महात्मा गांधी इंटर कालेज से इंटर करने के बाद स्पोर्ट्स कोटे से वर्ष-2006 में सौरभ यूपी पुलिस में भर्ती हुआ था, तभी से उसकी तैनाती बुलंदशहर में थी। सौरभ के पिता मुनेश त्यागी ने बताया कि बुलंदशहर से फोन आया कि सौरभ ने दो सिपाहियों पर गोली चला दी है, उन्हें इस पर विश्वास नहीं हुआ।
अधिकारियों से बात की, तब मामले की जानकारी हुई। पिता ने बताया कि उनका बेटा होनहार था, वह ऐसा कैसे कर सकता है। मुनेश बताते हैं कि सौरभ ने 400 मीटर बाधा दौड़ में राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट में पदक जीता था। हाल ही में वह छह माह की आजमगढ़ में ट्रेनिंग पूरी कर अपनी ड्यूटी पर बुलंदशहर लौटा था। जिसके चलते पिछले छह माह से वह घर नहीं आ पाया था।
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सोमवार शाम उसने पत्नी शालिनी को फोन कर बताया था कि उसकी छुट्टी मंजूर हो गई है और वह मंगलवार को घर आएगा। पत्नी और बच्चे सौरभ के आने का इंतजार कर रहे थे। रात अचानक आए फोन से घर में कोहराम मच गया। बुलंदशहर पुलिस लाइन में क्या हुआ, कैसे हुआ इस बारे में उन्हें कुछ नहीं पता। पिता ने इतना जरूर बताया कि सौरभ के साथ रहने वाले कुछ कर्मचारी अक्सर उसकी छुट्टी कटवा दिया करते थे। जिसके चलतेे वह परेशान रहता था।
बच्चों की वॉट्सअप से मंगाता था फोटो
स्पोर्ट्स कोटे से पुलिस की नौकरी पाने वाले सौरभ के परिवार की माली हालत अच्छी नहीं है। पैतृक गांव कुतुबपुर में थोड़ी खेतीबाड़ी भी है। सौरभ की मां सुनीता गांव में आंगनबाड़ी कर्मी है, जो रोज ड्यूटी के लिए शहर से गांव आती-जाती है। छोटा भाई विवेक अविवाहित है।
पहले प्राइवेट मेडिकल कंपनी में नौकरी करता था और फिलहाल दिल्ली में आप पार्टी में पदाधिकारी है। सौरभ की छह वर्ष पूर्व हरिद्वार निवासी शालिनी त्यागी से शादी हुई थी। उसके दो बच्चे पांच वर्षीय बेटा अर्पण है, जो कि यूकेजी में पढ़ता है। छोटी बेटी गौरी तीन वर्ष की है। पिता ने बताया कि सौरभ अपने बच्चों से बहुत प्यार करता था, रोजाना वॉट्सअप पर बच्चों के फोटो मंगाया करता था।
पिता ने लगाई सरकार से गुहार
मृतक सौरभ त्यागी के पिता ने सरकार से उसके बच्चों का ख्याल रखने की गुहार लगाई है। पिता ने कहा कि सौरभ के बच्चे बहुत छोटे हैं। उनकी परवरिश के लिए सरकार से मदद करने की गुहार लगाई। बुलंदशहर में घटना के बाद आला अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस ने परिजनों से पूछताछ की। शहर कोतवाल चमन सिंह चावड़ा और एसआईयू टीम ने सौरभ त्यागी के घर जाकर उसके परिजनों से मामले की जानकारी ली।
सौरभ त्यागी की मौत से कुुतुबपुर मेेें शोक
छपार क्षेत्र के गांव कुतुबपुर निवासी सौरभ त्यागी यूपी पुलिस में जनपद बुलंदशहर में तैनात था। मृतक सिपाही का परिवार फिलहाल मुजफ्फरनगर की जनकपुरी कालोनी में रहता है। गांव में सिर्फ बंद पड़ा मकान है। सोमवार रात सौरभ त्यागी की मौत की खबर गांव में लगी। जिससे ग्रामीणों में शोक की शोक की लहर दौड़ गई।
वास्तविकता जानने के लिए लोग एक दूसरे के घर पहुंचे। सारी रात पूछताछ में ही गुजर गई और ग्रामीण शव पहुंचने का इंतजार करने लगे। मंगलवार दुपहर शव शुक्रताल पहुंचने की सूचना मिलते ही ग्रामीण ट्रैक्टरों और बाइक से अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए शुक्रताल रवाना हो गए। शुक्रताल में शाम को गमगीन माहौल में सौरभ त्यागी के शव का अंतिम संस्कार किया गया।
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सौरभ त्यागी मूल रूप से छपार के गांव कुतुबपुर गांव का मूल निवासी था। छह साल पहले वह शहर जनकपुरी में आकर रहने लगे थे। रायबरेली के महात्मा गांधी इंटर कालेज से इंटर करने के बाद स्पोर्ट्स कोटे से वर्ष-2006 में सौरभ यूपी पुलिस में भर्ती हुआ था, तभी से उसकी तैनाती बुलंदशहर में थी। सौरभ के पिता मुनेश त्यागी ने बताया कि बुलंदशहर से फोन आया कि सौरभ ने दो सिपाहियों पर गोली चला दी है, उन्हें इस पर विश्वास नहीं हुआ।
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अधिकारियों से बात की, तब मामले की जानकारी हुई। पिता ने बताया कि उनका बेटा होनहार था, वह ऐसा कैसे कर सकता है। मुनेश बताते हैं कि सौरभ ने 400 मीटर बाधा दौड़ में राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट में पदक जीता था। हाल ही में वह छह माह की आजमगढ़ में ट्रेनिंग पूरी कर अपनी ड्यूटी पर बुलंदशहर लौटा था। जिसके चलते पिछले छह माह से वह घर नहीं आ पाया था।
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सोमवार शाम उसने पत्नी शालिनी को फोन कर बताया था कि उसकी छुट्टी मंजूर हो गई है और वह मंगलवार को घर आएगा। पत्नी और बच्चे सौरभ के आने का इंतजार कर रहे थे। रात अचानक आए फोन से घर में कोहराम मच गया। बुलंदशहर पुलिस लाइन में क्या हुआ, कैसे हुआ इस बारे में उन्हें कुछ नहीं पता। पिता ने इतना जरूर बताया कि सौरभ के साथ रहने वाले कुछ कर्मचारी अक्सर उसकी छुट्टी कटवा दिया करते थे। जिसके चलतेे वह परेशान रहता था।
बच्चों की वॉट्सअप से मंगाता था फोटो
स्पोर्ट्स कोटे से पुलिस की नौकरी पाने वाले सौरभ के परिवार की माली हालत अच्छी नहीं है। पैतृक गांव कुतुबपुर में थोड़ी खेतीबाड़ी भी है। सौरभ की मां सुनीता गांव में आंगनबाड़ी कर्मी है, जो रोज ड्यूटी के लिए शहर से गांव आती-जाती है। छोटा भाई विवेक अविवाहित है।
पहले प्राइवेट मेडिकल कंपनी में नौकरी करता था और फिलहाल दिल्ली में आप पार्टी में पदाधिकारी है। सौरभ की छह वर्ष पूर्व हरिद्वार निवासी शालिनी त्यागी से शादी हुई थी। उसके दो बच्चे पांच वर्षीय बेटा अर्पण है, जो कि यूकेजी में पढ़ता है। छोटी बेटी गौरी तीन वर्ष की है। पिता ने बताया कि सौरभ अपने बच्चों से बहुत प्यार करता था, रोजाना वॉट्सअप पर बच्चों के फोटो मंगाया करता था।
पिता ने लगाई सरकार से गुहार
मृतक सौरभ त्यागी के पिता ने सरकार से उसके बच्चों का ख्याल रखने की गुहार लगाई है। पिता ने कहा कि सौरभ के बच्चे बहुत छोटे हैं। उनकी परवरिश के लिए सरकार से मदद करने की गुहार लगाई। बुलंदशहर में घटना के बाद आला अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस ने परिजनों से पूछताछ की। शहर कोतवाल चमन सिंह चावड़ा और एसआईयू टीम ने सौरभ त्यागी के घर जाकर उसके परिजनों से मामले की जानकारी ली।
सौरभ त्यागी की मौत से कुुतुबपुर मेेें शोक
छपार क्षेत्र के गांव कुतुबपुर निवासी सौरभ त्यागी यूपी पुलिस में जनपद बुलंदशहर में तैनात था। मृतक सिपाही का परिवार फिलहाल मुजफ्फरनगर की जनकपुरी कालोनी में रहता है। गांव में सिर्फ बंद पड़ा मकान है। सोमवार रात सौरभ त्यागी की मौत की खबर गांव में लगी। जिससे ग्रामीणों में शोक की शोक की लहर दौड़ गई।
वास्तविकता जानने के लिए लोग एक दूसरे के घर पहुंचे। सारी रात पूछताछ में ही गुजर गई और ग्रामीण शव पहुंचने का इंतजार करने लगे। मंगलवार दुपहर शव शुक्रताल पहुंचने की सूचना मिलते ही ग्रामीण ट्रैक्टरों और बाइक से अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए शुक्रताल रवाना हो गए। शुक्रताल में शाम को गमगीन माहौल में सौरभ त्यागी के शव का अंतिम संस्कार किया गया।